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Wednesday, September 24, 2008

उस दिन के बाद से पार्ट--३

उस दिन के बाद से पार्ट--३
दोस्तो अब आपकी सेवा मैं यानी आपका राज शर्मा उस दिन के बाद से पार्ट--३ लेकर हाज़िर हूँ ये इस कहानी का अंतिम पार्ट है
मुझे भाभी का हाथ कुछ चिपचपा लगा. ओर मई समझ गया की
उनके हाथ मे भी शहद लगा है जौंहोने मेरे लॅंड पर लगा दिया
है. हाथ तो धो आती भाभी. मैने कहा. क्यो? उन्होने पूछा. मेरे
लॅंड पर शहद लग गया. मैने ही लगाया है. तुम मेरा दूध पी
रहे हो, मई भी तो कुछ पियूंगी. "च्चि" तो क्या आप मेरा पेशाब
पियोगी? अरे नही,मई तुम्हारा दूध पियूंगी. मेरा दूध,मेरा दूध
कहाँ से आएगा. उन्होने मेरे छ्होटे-छ्होटे निपल्स कोपाकड़ कर कहा
आदमियों का दूध यहाँ से नही उनके लॅंड से आता है. "लॅंड से?"
मेरा तो कभी नही आया सिर्फ़ सस्यू आती है. तो दूध आज आएगा,
देखना तुम? कहते हुए उन्होने मेरी गर्दन उपेर की ओर मेरे निपल
चाटने लगी. जिन पर उनके हाथ का शहद लग गया था. मेरे निपल
छत कर बोली अब तुम बाद मे दूध पीना पहले मेरी छूट को भी तो
फूक मार दो. कहते हुए वो मेरे उपेर घोड़ी बन गयी. उनकी छूट के
चीड़ मेरे मूह के एकद्ूम सामने थे ओर वहाँ से मीठी सी खुश्बू आ
रही थी शायद उन्होने कोई पर्फ्यूम लगाया था. मैने फूक मारनी
शुरू की ओर उधर उन्होने मेरा लॅंड अपने मूह मे ले लिया ओर चूसने
लगी. मई फिर से घबरा गया उन्होने मेरा लॅंड मूह से बाहर किया ओर
बोली फूक मरते रहो मई शहद छत रही हून, फूक मारनी बंद की
तो लॅंड काट लूँगी तुम्हारा. कह कर उन्होने मेरे लॅंड पर दाँत
घड़ाए. मई फिर से फूक मरने लगा. वो काफ़ी देर तक मेरे लॅंड को
चुस्ती रही. मेरा लॅंड रोड की तरह सकत हो रखा था. उसने पूछा-
क्या कभी मलाई नही निकली इसमे से? मैने कहा- कॉआन सी मलाई? इसमे
से तो सिर्फ़ सू-सू आती है ओर ये गंदा होता है आप इसे मो मे ले
रही हो. उसने कहा अच्छा रहने दो चलो सोते हैं. मई निक्कर उठाने
चला तो उन्होने माना कर दिया, बोली- इतनी गर्मी मे कपड़े नही
पहनते. ऐसे ही सोएंगे ओर तुम्हे अभी मेरा दूध भी तो पीना है.
फिर मई उनसे चिपक गया ओर रात को उनका दूध पीते-पीते ही सो
गया. वो मेरा लॅंड अपने हाथों मे पकड़े सहलाती रही. सुबह जब मेरी
आख खुली तो मैने देखा भाभी अभी तक सो ही रही थी उनका मूह
मेरे परों की साइड मे था ओर पेर मेरी तराफ़, शायद वो मेरा लॅंड
चूस्ते हुए ही सो गयी थी. मेरा लॅंड अभी तक सकत ओर गरम था ओर
उसमे से अभी तक कुछ नही निकला था. मैने भाभी की ओर देखा उनके
बूब्स साइड मे लटक रहे थे रात की तरह ताने हुए नही थे. फिर
मैने उनकी छूट की तरफ देखा, छूट ऐसी लग रही थी जैसे कोई
लड़की तोड़ा सा मूह खोले हुए हो. दो होंठ भी दिख रहे थे. मैने
उंगली से उन होंठो को टच किया ओर भाभी की तरफ देखा. वो वैसे
ही सो रही थी. मैने उंगलियो से दोनो होंठो को हल्के से पकड़ा तो
छूट का मूह खुल गया. मुझे रात बातरूम की याद आई जब मैने
उसमे उंगली दल कर सॉफ की थी. मैने उस मूह मे फिर से उंगली दल
दी. तभी भाभी ने अपने पेर सिकोड लिए ओर मेरा हाथ उनके परॉन के
बीच मे डब गया. वो आखें खोल कर मुसकुरी ओर बोली- क्या कर रहे
हो वीनू जी? कल तक तो बहुत शर्मा रहे थे आज उंगीयाँ बहुत चल
रही हैं. तुम्हारी मों से कह डून की तुम्हारे लिए अब लड़की ढूँढ
ले. मई शर्मा कर रह गया. उन्होने अपने पेर खोले ओर अपनी छूट को
सहलाते हुए बोली- इसमे उंगली नही लॅंड डालते हैं. उंगलियाँ तो मेरे
पास भी हैं, मई खुद भी दल सकती हून, फिर तुम्हारे लॅंड की क्या
ज़रूरात है. "इसमे लॅंड डालते हैं, कैसे भाभी, ये तो मेरे साथ
जुड़ा हुआ है, कैसे दल सकेंगे इसमे?" मैने पूचछा. बता दूँगी
कुछ रात के लिए भी रहने दो अब कपड़े पहन कर घर जाओ वरना
तुम्हारी मों आवाज़ देंगी या यही आ जाएँगी. जा रहा हून, मैने बुरा
सा मूह बनाया ओर बोला पर भाभी ये किसी ओर को मत कहना वरना मेरी
मार लग जाएगी. तुम भी किसी से मत कहना, अपने दोस्तों से भी नही-
वो बोली. मैने कहा- नही कहूँगा मारना थोड़े ही है, पर एक बार
दूध ओर पीला दो ना. नही अब रत को, अब जाओ. मान मार कर मैने कपड़े
पहने ओर घर आ गया. पर मेरा मान किसी काम मे नही लग रहा था.
बार-बार भाभी का शरीर आखों के सामने आ रहा था. मान कर रहा
था की भाभी के पास वापस चला जाओं. पार वो घर पर नही थी.
अपनी किसी सहेली के घर गयी हुई थी. पूरा दिन उनके इंतेज़ार मई ही
कटा. सुबह को ही मैने मों से कह दिया था था की भाभी की तबीयत
क्योंकि अभी पूरी तरह से ठीक नही है इसलिए आज भी उनका खाना
यही बना लेना मई ले जाऊँगा. डोफेर का खाना उन्हे अपनी सहेली के
घर खाना ही था. शाम को मैने जल्दी-जल्दी कह कर खाना पॅक
करवाया ओर 7.30 बजे से ही खाना ले कार उनके घर पहुच गया. वो
बोली अरे तुम इतनी जल्दी आ गये मई तो तुम्हारे घर ही आ रही थी.
मेरे घर, क्यो? मई फिर घबरा गया कहीं भाभी मेरी शिकायत ना
कर दे. वो हसी बोली अरे डरो मत मई तो वैसे ही आ रही थी. थोड़ी
देर तुम्हारे यहाँ टाइम-पास किया जाए. चलो खाना बाद मे खाएँगे
अभी भूक भी नही है तुम्हारे घर चल कर ग़मे खेलते हैं. ओर
आप मुझे कुछ बताने वाली थी- मैने कहा. क्या? वो बोली. मई
शरमाया- मेरा आपकी उसमे कैसे जाएगा? वो हसी, बोली सबर करो वो
सब रत को, दिन मे भूल जया करो चलो तुम्हारे घर चलते हैं.
अब मई क्या कह सकता था. उन्होने कपड़े बदलने के लिए अपनी मेक्शी
उतरी, नीचे वो ब्लाउस ओर पेटीकोत पहने हुए थी. मई समझा वो भी
उतरेंगी. पर उन्होने मुस्कुराते हुए एक सारी लपेटनी शुरू कर दी.
फिर हम लोग मेरे घर गये. वहाँ वो मों से बातें करती रही ओर मई
आसपास इसलिए लगा रहा की कहीं वो मेरी शिकायत ना कर दे, कितना
भोला था मई. पर फिर भी एक बार तो मेरी हवा खराब हो ही गयी
जब मों बोली- "रूपी" तुमने तो हुमारे लड़के पर जादू सा कर दिया
है, जब देखो भाभी-भाभी ही करता रहता है. मई दर गया पर
भाभी मुस्कुरई ओर मेरे गाल पकड़ कर खिचते हुए बोली- ये है ही
इतना प्यारा, मेरा तो इसके बागेर समय ही नही करता. मों को हेस्ट
देख मुझे कुछ सुकून मिला. फिर हम रात को 9.00 बजे करीब घर
वापस आए. मैं डोर बंद करते हुए उन्होने पूचछा- कैसी रही?
क्या?-मई बोला. पर वो जवाब ना दे कर मुस्कुराते हुए रूम की तरफ
चल दी. मई भी पीछे-पीछे आ गया. वो सारी उतरते हुए बोली तुम
खाना लगाओ मई आती हून. मई उन्हे देखना चाह रहा था पर मान
मार कर कित्चान की ओर बढ़ गया. तिफ्फ़ान बॉक्स खोल कर खाना लगा ही
रहा था की भाभी की तरफ नज़र गयी. वो सिर्फ़ ब्रा ओर पेंटी मई
थी, उन्होने भी मेरी तरफ देखा ओर मुझे अपनी ओर देखता पा कर
मुस्कुरई ओर निघट्य पहन ली. मेरा लॅंड टाइट हो चुका था. फिर हम
दोनो खाना खाने डाइनिंग-तबले पर बैठे तो मैने जैसे ही तली
उनकी ओर बधाई, उन्होने नीचे हाथ करके मेरे निक्कर के उपेर से मेरा
लॅंड पकड़ लिया ओर बोली इसे संभलो जहाँ-तहाँ खड़ा हो जाता है.
ना-नही तो-मई बोला. वो बोली मैने देखा था कित्चान मे तुम इसे दबा
रहे थे. चलो खाना खाओ. उन्होने मेरा लॅंड छोड़ दिया ओर हम दोनो
ने जल्दी से खाना ख़तम किया. उन्होने बर्तन वॉशबेसिन मे डाले ओर
बेडरूम मे आ गयी. मई बेड पर बेता था. बोली आज क्या कपड़े पहन
कर ही सोने का इरादा है. मैने जल्दी से शर्ट ओर बनियान उतरी ओर
लेट गया, निक्कर उतरने मे मुझे आज फिर शरम आ रही थी. भाभी
कुछ नही बोली लाइट ऑफ की निगठलंप ओं किया, निघट्य का बंद खोला
ओर उसे पहने हुए ही मेरे पास आ कर लेट गयी. मई सोचता रह की अब
शायद वो मेरा निक्कर उतार देंगी. पर उन्होने ऐसा कुछ नही कहा,
बोली तक गयी हों नींद आ रही है, तुम भी सो जाओ. मई मान ही मान
कूड़ता हुआ जाने कब सो गया. रात मे आख खुली तो देखा भाभी गहरी
नींद मे सो रही थी, उनकी निघट्य खुली हुई साइड मे पड़ी थी ओर
वाइट ब्रा ओर पेंटी उनके उपेर चमक रही थी. मेरी नींद गायब हो
गयी. मैने उन्हे हिला कर देख लिया वो वाकई मे गहरी नींद मे ही सो
रही थी. मैने धीरे से उनकी ब्रा की दोनो स्ट्रीप उनके कंधे से
नीचे कर दी पर पीठ पर से वो कसी हुई थी. मैने बूब्स का
ख़याल छ्चोड़ा ओर पेंटी की तरफ देखने लगा. दर तो लग रहा था
फिर याद आया भाभी भी तो मेरे निक्कर मे हाथ दल देती है.
साहस करके मैने उनकी पेंटी को पकड़ के तोड़ा खीचा ओर हाथ दल
दिया पर हाथ उनकी छूट तक नही पहुच सका. अब मुझे जोश आ
चुका था मेरा लॅंड भी ताना हुआ था मे देखना चाहता था की ये
छूट मे जाएगा कैसे. भाभी अभी भी सोई हुई थी, शायद डॉवा का
असर था जो उन्होने सोने से पहले खाई थी. मैने धीरे-धीरे उनकी
पेंटी को नीचे करना शुरू कर दिया ओर देखता रहा की कहीं वो जाग
ना जाए. उनके फेले हुए पेर सीधे करके मैने पूरी पेंटी उतार दी.
अब उनकी छूट दिख रही थी. पर लॅंड इसमे कैसे जाएगा मई इस
परेशानी मे था. मैने उंगली च्छेद मे सर्काय, अंदर तोड़ा गरम ओर
गीलापन था. मैने उंगली बाहर निकल ली. अपना निक्कर उतरा ओर तरह-
तरह से पोज़िशन ले कर सोचने लगा की लॅंड इसमे जाएगा कैसे.
मुझे लगा जा सकता है अगर भाभी अपनी एक तंग के बीच मे मेरी एक
तंग ले-ले तो लॅंड शायद इस च्छेद मे चला जाए. मई धीरे से
भाभी के उपेर आया इस तरह की उनसे टच ना हो सकूँ ओर अपने लॅंड
को उनकी छूट पर सेट करने लगा. पर ऐसा कुछ नही हो पाया. तो
मैने अपना लॅंड उनके हाथ मे पकड़ा दिया ओर उनके पास लेट गया ओर
अपना हाथ उनकी छूट पर रख दिया. मैने सोचा थोड़ी देर के बाद
निक्कर पहन लूँगा ओर भाभी को भी पेंटी पहना दूँगा, उन्हे कुछ
पता ही नही चलेगा पर पता नही कब मुझे नींद आ गयी. सुबह
भाभी ने मुझे उठाया बोली मेरी पेंटी तुमने उतरी. मई भी नंगा
था ओर मेरा लॅंड भी ताना हुआ था. मैने उल्टा कह दिया आप ही करती
हो सब आपने ही मेरा निक्कर भी उतारा है. भाभी समझ गयी की
मैने ही सब किया है बोली तुम बहुत नॉटी हो रहे हो मैने कहा
मई तो बस ये देख रहा था की मेरा लॅंड आपकी छूट मई जाएगा
कैसे. पर जेया नही पाया. आज रात को मई तुम्हे बताऊंगी. उन्होने
कहा. फिर मई रोजाना की तरह घर चला गया. घर पहुच कर पता
चला की मों & दाद बाहर जेया रहे हैं ओर शाम तक वापस आएँगे.
मों ने पूचछा यही रुकोगे या तुम्हे बुआजी के पास छोड़ड़ दे. मैने
कहा यही रुक जाऊँगा. तो मों बोली फिर कपड़े ले कर अपनी भाभी के
घर ही चलो. मई यहाँ की कीस उन्ही को दे दूँगी. मेरी तो मान की
मुराद पूरी हो रही थी. मैने जल्दी से कपड़े उठाए ओर हम वापस
भाभी के घर पहुच गये. मों ने भाभी से कहा हम काम से बाहर
जेया रहे हैं, वापसी मे शाम हो जाएगी, तुम्हे कहीं जाना ना हो तो
वोनू को यही छोड़ड़ दे या फिर बुआजी के घर पर छोड़ड़ देंगे. भाभी
मुझे देख कर मुस्कुरई, बोली नही मुझे आज कही नही जाना आप इसे
यही छोड़ड़ दो. मों-दाद के जाने के बाद भाभी ने पूछा कपड़े क्यो
लाए हो मैने कहा नहाने के बाद पहनने के लिए. बोली तो चलो
फिर नहा लो. मैने कपड़े उतरे ओर टवल लपेट कर बातरूम मे चला
गया ओर डोर ऐसे ही बंद कर लिया क्योंकि उसकी कुण्डी मेरी पहुच से
बाहर थी. मई शावर के नीचे खड़ा हुआ ही था की दरवाजा खुला
मैने देखा तो भाभी आ रही थी वो उस समय भी निघट्य ही पहने
थी. बोली- मुझे भी नहाना है चलो साथ मे ही नहाते हैं. उन्होने
अपनी निघट्य उतार कर कील पर तंग दी, बात-टब मे शॅमपू डाला ओर
उसे भरने के लिए टंकी चालू करके खुद भी शावर के नीच आ कर
खड़ी हो गयी. पानी उनके सर से बहता हुआ उनकी ब्रा ओर पेंटी पर आ
गया ओर उनमे से सब कुछ दिखने लगा. मई उनके आयेज दीवार से ही
लगा खड़ा था ओर पानी मुझ पर भी गिर रहा था. अचानक वो नीचे
झुकी ओर जब तक मई कुछ समझ पता उन्होने मेरा अंडरवेर नीचे
खिच दिया. अब मई एकदम नंगा खड़ा था. मैने अपना अंडरवेर उपेर
करना चाहा पर उन्होने मुझे अपने ओर दीवार के बीच मे दबा लिया.
उनके बूब्स मेरे मूह एक एकदम सामने थे ओर वो अपने हाथ से मेरा लॅंड
पकड़ रही थी. अचानक मैने उंकीक बूब पर काट लिया. वो सिसकारी
ले कर ज़रा सा पीछे हटी ओर जब तक वो कुछ बोलती मैने उनकी पेंटी
पकड़ कर नीचे खिचनी शुरू कर दी. उन्होने मुझे रोका ओर खुद ही
पेंटी उतार दी ओर ब्रा की स्ट्रीप खोलने लगी उनके हाथ पीछे पीठ पर
थे ओर ब्रा मे उनके बूब्स ताने हुए थे मैने फॉरन हाथ मे उनके बूब्स
पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए. "अया"- वो बोली तुम तो एक ही दिन मे
मर्द हो गये. उन्होने ब्रा उतार कर वही दल दी ओर बोली चलो टब मे
आ जाओ. फिर हम दोनो टब मे जेया कर बेत गये. मैने कहा अब बताओ
मेरा लॅंड आपकी छूट मे कैसे जाएगा. वो बोली- बताऊगी सबर करो.
वो बहुत देर तक मेरे लॅंड को अपने हाथों मे ले कर सहलाती रही ओर
मई उनके बूब्स पर हाथ फेरता रहा. फिर वो उठी ओर टब से बाहर
निकल गयी मैने देखा तो मुझे भी बाहर आने का इशारा किया. मई
भी उठ कर बाहर आ गया. वो झुक कर टब की साइड को पकड़ने लगी,
मैने पूचछा भाभी क्या कर रही हो. वो बोली मेरे पीछे आओ. मई
पीछे आ गया. वो बहुत झुक गयी थी. उनके चूटर मेरे लॅंड के अब
सामने ही थे. बोली- अब तुम दल सकते हो. पीछे से उनकी गांद भी
दिख रही थी. सॉफ ओर चिकनी. उनके पुर शरीर पर कोई बॉल नही
था ओर मेरे तो उस समय बॉल होने का सवाल ही नही उठता था. मई
उनके पीछे आ गया ओर पूचछा भाभी कॉआन से छेड़द मे डालना है. वो
बोली नीचे वाले मे. वही उनकी छूट का छेड़ था. अब मैने ध्यान से
देखा उनकी छूट मे 2 छेड़ दिख रहे थे मैने हाथ से उनकी छूट को
छुआ ओर बोला भाभी यहाँ तो 2 छेड़ हैं. एक नन्हा सा ओर एक बड़ा सा.
उन्होने अपना हाथ अपनी छूट पर रखा ओर छेड़ दिखाते हुए बोली इसमे
डालो. मैने पीछे से अपना ताना हुआ लॅंड पकड़ कर उसमे डालने की
कोशिश की पर लॅंड था की जा ही नही रहा था. एक-दो बार गया भी
पर फॉरन ही बाहर भी आ गया. भाभी बोली यहाँ नही हो पाएगा
चलो कमरे मे चलते हैं. ओर हम नंगे भीगे हुए ही रूम मे आ
गये. वहाँ भाभी बोली पहले तुम्हारे लॅंड से माल निकलना होगा तब
ये जेया पाएगा. कह कर उन्होने मुझे चेर पर बिताया ओर खुद नीचे
बात कर मेरे लॅंड को मुट्ठी मे ले कर उपेर-नीचे करते हुए रगार्ने
लगी. बहुत देर तक वो रगर्ति रही मेरे लॅंड मे जलन होने लगी
मैने उन्हे रोका भाभी जलन हो रही है अब रहने दो. पर वो बोली
माल तो निकलना ही पड़ेगा. उन्होने मेरे लॅंड पर 4-5 ठंडी फ़ूके
मारी ओर मेरे लॅंड को मूह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया. वो मेरे
सामने नंगी बती थी पर मई चाह कर भी उन्हे चू नही पा रहा
था क्योकि मई चेर पर था ओर वो नीचे. पर वो मेरा लॅंड चूस रही
थी तो मज़ा बहुत आ रहा था. मेरा लॅंड बुरी तरह से ताना हुआ था
ओर गर्मी से जल रहा था. उनकी पूरी कोशिश के बाद भी जब मेरे
लॅंड से कुछ नही निकला तो वो मुझे बेड पर लेटने को कह कर आल्मिराह
की ओर बढ़ गयी, उन्होने कोई क्रीम निकली ओर मेरे पास आ कर मेरे
लॅंड पर रगार्ने लगी. ये क्या है भाभी मैने पूचछा तो बोली मई
तुम्हारे लिए कुछ ओर लाई थी पर जब तुम्हारे लॅंड से कुछ निकल ही
नही रहा है तो इस क्रीम से ही काम चल जाएगा. क्रीम लगाने के
बाद वो बेड पर बेत गयी ओर अपने पेर फेला कर मेरे पेर अपने पेर से
फसा लिए इस तरह से मई सरक कर उनके पास हो गया ओर मेरा लॅंड
उनकी छूट के दरवाजे पर पहुच गया ओर मेरे मूह के सामने उनके
बूब्स आ गये. उन्होने मेरा लॅंड पकड़ कर अपनी छूट मे घुसेड लिया
ओर मुझे वैसे ही रोक कर अपने चूटर धीरे-धीरे हिलने लगी. अब
मेरा लॅंड उनकी छूट मे अंदर बाहर हो रहा था. काफ़ी देर तक वो
ऐसे ही करती रही ओर फिर उनकी छूट से जैसे ज्वालामुखी फूट कर
बाहर आ गया. वो बोली ऐसे निकलता है माल. पर मेरा तो नही निकला
आप तो कह रही थी की तुम्हारा माल निकलेगा. उन्होने कहा तुम अभी
छोटे हो शायद इसलिए अभी तुम्हारा माल नही निकल रहा है. कुछ
दिन बाद निकालने लगेगा. फिर हमने पुर दिन ऐसे ही मज़ा लिया
भाभी ओर मई पुर दिन नंगे ही रहे. ओर दिन मे कम से कम 7-8 बार
भाभी का माल निकल गया. हुँने शहद लगा कर एक-दूसरे को चटा.
भाभी ने मुझे कांडों भी दिया जो वो मेरे लिए लाई थी. उसे देख
कर मई समझा की वो बूब्स पर पहनते हैं. पर भाभी ने बताया की
इसे आदमी अपने लॅंड पर पहनते हैं जिससे औरतों के बच्चा नही
होता. फिर मैने उससे बहुत मज़ा किया, जब भाभी कित्चान मे खाना
बना रही थी मैने उसका एक सिरा उंगली दल कर भाभी की छूट मे
घुसेड दिया वो कहती ही रह गयी ये क्या कर्रहे हो ओर मैने उसके
दूसरे सिरे से फूक मार कर उसे उनकी छूट के अंदर ही फूला दिया.
भाभी को भी बहुत मज़ा आया. फिर खाना खाने के बाद भाभी बेड
पर लेट गयी ओर मई उनके उपेर उल्टा लेट गया वो मेरे लॅंड मे शहद
लगा कर चूस रही थी ओर मई बार बार कांडों को उंगली से उनकी
छूट मे दल कर हवा भरता ओर फिर उसे बाहर निकलता. भाभी
खुशी से सिसकारी भर रही थी ओर मेरे लॅंड को ज़ोर-ज़ोर से चूज़
रही थी पर मेरे लॅंड से कुछ निकल ही नही रहा था. उनकी छूट से
कई बार माल निकल चुका था. उस दिन से हम लोग बहुत मज़े करने
लगे हम साथ-साथ नंगे ही सोने लगे. साथ मे ही सू-सू करने जाते
भाभी मेरा लॅंड पकड़ कर ही मुझे पेशाब करती ओर धार को इधर
उधर उछालती रहती. मई भी जब वो पेशाब कर रही होती उनकी छूट
मे कभी उंगली घुसेड देता ओर कभी पूरा हाथ लगा कर बंद कर
देता. फिर उनकी सस्यू एक साथ नीचे गिरती. उसके बाद हम एक दूसरे को
पानी से सॉफ करते ओर फिर बेड पर फूक मार कर सुखाते. एक रत
भाभी मे मेरा लॅंड का माप लिया बोली लगभग 4' का हो गया है ओर
अभी तो तुम 13 साल के हो जब तुम 20 साल के होगे ये 7-8 इंच का हो
जाएगा तब बहुत मज़ा आएगा. मैने भी एक बार जब वो सो रही थी
एक सीक उनकी छूट मे दल दो वो अचानक जाग गयी बोली ऐसा नही
करते चोट लग जाती है अंदर. मैने कहा मई तो गहराई माप रहा
था. वो हास पड़ी बोली इसमे मापा नही जाता इसमे सब तरह का लॅंड आ
जाता है. ऐसे ही कुछ दिन निकले की एक दिन भैसाहब आ गये. भाभी
को पता था की भैसाहब आने वेल हैं इसलिए उस दिन हम कपड़े
पहन कर सोए. रात मे बाहिसहब आए उन्होने मुझे गोड मे उठाया
ओर ड्रॉयिंग रूम मे सोफे पर लिटा दिया. मई जाग चुका था ड्रॉयिंग
रूम की लाइट बंद थी मैने उठ कर विंडो कर्टन तोड़ा सा सरकया
ओर दूसरी तरफ देखने लगा. भैसाहब बेड पर बेते थे ओर भाभी
उनकी गोड मे वो भाभी को किस कर रहे थे उनके लिप्स ओर चिक्स पर.
भाभी भी जवाब दे रही थी. फिर उन्होने अपना हाथ भाभी की निघट्य
मे दल दिया ओर उनके बूब्स सहलाने लगे. फिर उन्होने भाभी की निघट्य
उतार दी ओर खड़े हो कर अपनी बनियान उतरने लगे भाभी ने उनके
सीने पर थोड़े किस किए. उन्होने बनियान उतार कर भाभी की ब्रा
खोल दी भाभी के बूब्स आज़ाद थे. फिर उन्होने भाभी की पेंटी भी
उतार दी. वो दोनो धीरे-धीरे कुछ बातें भी कर रहे थे. मेरा सारा
ढयन उन्ही पर था. भाभी ने अंडरवेर के उपेर से ही भैसाहब का
लॅंड सहलाना शुरू कर दिया था. बहासाहब ने अचानक उन्हे गोड मे
उठाया ओर रूम से बाहर चले गये. मई समझ गया शायद बातरूम
मे ही गये होंगे. मान तो बहुत था फिर भी मई बाहर नही निकला ओर
सोफे पर वापस लेट गया. पर नींद नही आई. थोड़ी देर के बाद मुझे
उनकी आहत फिर से सुनाई दी तो मई फिर खीरकी पर जाम गया.
भैसाहब अभी भी भाभी को गोड मे लिए थे ओर उनके लिप्स ओर नेक
पर किस कर रहे थे. इस समय वो भी नंगे थे शायद अपना
अंडरवेर बातरूम मे ही छोड़ड़ आए थे. उनका लॅंड लगभग 6' लंबा
था. उन्होने भाभी को बेड पर लिटाया उनके पेर अपने कंधो पर रख
लिए ओर फिर मुझे आयेज का धिकना बंद हो गया अब मुझे भैसाहब की
पीठ ओर चूटर नज़ा आ रहे थे ओर भाभी का चेहरा. मैने परदा
तोड़ा सा ओर सरकया तो भाभी ने एकद्ूम से आख मारी ओर आख से ही
परदा बंद करने को कहा. मैने परदा तोड़ा सा वापस सरकया पर
उदार देखते रहने का लोभ नही छोड़ड़ सका. भाभी के मूह से आहें
निकल रही थी ओर भैसाहब के चूटर ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे, थोड़ी
देर बाद उन्होने लॅंड बाहर निकाला ओर भाभी तो उल्टा करके आधा बेड
पर ओर आधा फर्श पर लटका दिया, उनकी टाँगे पकड़ी ओर उपेर उठा कर
अपनी कमर पर टीका ली ओर फिर धक्के मरने लगे. हलकी उधर
निगठलंप ही ओं था पर मुझे सब सॉफ दिख रहा था क्योंकि मेरी
साइड मे बिल्कुल अंधेरा था. थोड़ी देर तक धक्के मरने के बाद वो
भाभी के उपेर ही गिर गये. फिर कुछ देर बाद उठ कर उन्होने अपने
लॅंड पर से कांडों निकाला ओर भाभी के मूह मे रख दिया जिसे भाभी
ने थोड़ी देर चूस कर थूक दिया. अब भाभी उनका लॅंड छत कर सॉफ
कर रही थी. उन्होने एक बार फिर विंडो की ओर देख कर आख मारी
थी मई समझ नही पा रहा था की वो मुझे डेक्ज़ कैसे रही है
क्योकि निगठलंप विंडो के ठीक उपेर लगा था ओर मेरी तरफ सिर्फ़
अंधेरा ही दिख सकता था ओर कुछ नही. फिर भैसाहब ने एक बॉटल
ली ओर भाभी के बूब्स ओर छूट पर कुछ माला ओर फिर उनका दूध पीने
लगे. मई समझ गया की उन्होने शहद ही लगाया होगा. दोनो बूब्स को
काफ़ी देर तक चूसने के बाद उन्होने भाभी की छूट को चाटना शुरू
कर दिया. भाभी ने भी उसी बॉटल से शहद हाथ मे ले कर
भैसाहब का लॅंड पकड़ लिया फिर भैसाहब बेड पर लेट गये भाभी
उनके उपेर उलट कर आ गयी अब भैसाहब का लॅंड ओर भाभी का मूह
खीरकी की तरफ था पर मई भैसाहब का मूह ओर भाभी की छूट नही
देख सकता था. भाभी जल्दी-जल्दी उनका लॅंड चूस रही थी ओर बार-
बार खीरकी की ओर देख कर मुस्कुरा रही थी. बाहिसहब का लॅंड फिर
से टन चुका था ओर फिर कुछ देर के बाद उन्होने अपना हाथ अपने
लॅंड पर रख कर शायद भाभी को ओर चूसने से रोकना चाहा पर
भाभी ने उनका हाथ हटा दिया ओर चूस्टी रही. मेरा लॅंड भी ताना
हुआ था ओर मई अपने एक हाथ से उसे सहला रहा था. भाभी ने कुछ
देर ओर चूसा ओर फिर भैसाहब बड़ी ज़ोर से हीले भाभी ने खीरकी की
तरफ देख कर मूह खोला ओर अपने मूह मे भैसाहब का माल धीखाया.
ओर फिर से भैसाहब का लॅंड चाटने लगी. थोड़ी देर बाद दोनो बेड पर
लेट गये. फिर मई भी लेट कर सो गया. सुबह भाभी ने मुझे जगाया
ओर बोली बड़े मज़े आ रहे थे रात ओर अब 8 बजे तक सो रहे हो. मई
दर गया कहीं भैसाहब ना सुन ले. पर वो बोली की भैसाहब नहा
रहे हैं. तो मैने भी पूच लिया आपको कैसे पता चला की मई
देख रहा हून जो आप बार-बार आख मार रही थी. वो बोली अंदाज़ा
लगाया ओर अब तुम घर जाओ एक हफ्ते के बाद सोने के लिए आना. एक
हफ़्ता? मैने कहा. हाँ जी एक हफ़्ता वो मुस्कुरई. फिर मई घर आ
गया. बाहिसहब पुर एक हफ्ते तक रहे ओर मई अपने घर पर. अब
मुझे अपना लॅंड रगार्ने की आदत सी हो गयी थी. पर अभी तक उसमे
से कुछ नही निकला थंऐ समय मिलते ही कई-कई घंटो तक रग्रा
करता की शायद कुछ निकले पर कुछ नही आता था. खेर एक हफ़्ता
बिता भाभी-बाहिसहब घर आए बाहिसहब ने चलते समय मुझसे
कहा भाई वीनू मई जेया रहा हून आज रात से तुम्हे अपनी भाभी के
पास सोना है. मई कुछ घबराया ओर कुछ मुस्कुराया. फिर वो चले
गये.


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उस दिन के बाद --पार्ट -२

उस दिन के बाद --पार्ट -२
आप सभी दोस्तों को राज शर्मा का प्यार भरा नमस्कार . दोस्तो आपने उस दिन के बाद -पार्ट -१ को काफ़ी पसंद किया
अब आप इस कहानी के दूसरे पार्ट का मज़ा लीजिए
अगले दिन भाभी की हालत खराब थी उन्हे सर्दी हो गयी थी. ओर
नहाओ बारिश मे मेने कहा ओर चला आया, मों को बता दिया की भाभी
की तबीयत खराब हो गयी है. उस रात फिर मों ही भाभी के पास
रुकी. मे घर पर पापा के पास. अगले रात को फिर मुझे ही भाभी के
पास जाना था उनका नंगा बदन बर्बर मेरी आखों के सामने कोंध
जाता था. खेर मे भाभी के घर गया खाना अपने साथ ले कर गया
जो मों ने बना कर दिया था. मेने ओर भाभी ने खाना खाया वो ठीक
लग रही थी पर बीच-बेच मे करहती जाती थी. दर्द हो रहा है
मेने पूचछा. हन वो बोली पीठ, सर ओर सीने मे काफ़ी दर्द है.
खाना खा कर हम लेट गये पर वो कराह रही थी. मेने पूचछा "डॉवा
ली?" वो बोली हन कल तुम्हारी मों ने विक्क्स लगा दी थी काफ़ी आराम
मिला था. तो आज भी लगा लो मेने कहा. वो बोली पीठ पे कैसे
लगाऊं. लाओ मे लगा देता हून-मेने कहा. उन्होने विक्क्स दी. पर वो
गौण पहने थी विक्क्स लगती कैसे. मैने पूचछा कैसे लगाऊं. वो
मुस्कुरा दी. उन्होने गौण उतार दिया. अब वो ब्लॅक ब्लाउस ओर पेंटी मे
थी. बोली ब्लाउस भी उतार देती हून वरना ब्लाउस मे ही लग जाएगी.
मेने मूह घुमा लिया. वो बोली लगा दो. मेने देखा वो उल्टी लेती थी ओर
उनकी पीठ पर अभी ब्लॅक ब्रा बाकी थी. मेने लंबी साँस ली ओर
विक्क्स लगाने लगा पीठ पर. पर हाथ बार-बार ब्रा की स्ट्रीप से उलझ
जाता था. भाभी बोली अभी स्ट्रीप खोल दो विक्क्स लगाने के बाद वापस
बाँध देना. स्ट्रीप मेने खोल दी पर उनकी पूरी नंगी पीठ देख कर
मेरा लॅंड फिर सर उठाने लगा. मेने किसी तरह उसे रोका ओर विक्क्स
लगाने लगा पर अभी मई पूरी तरह लगा भी नही पाया था की
भाभी ने अचानक करवत् ले ली. अब वो सीधी लेती थी उनकी ब्रा भी
खुली हुई थी. पर एक साइड से उनके बूब से चिपकी हुई थी. पर एक
बूब उनका सॉफ दिख रहा था.
मेने झटके से उनके चेहरे की तरफ देखा वो शायद सो गयी थी ओर
नींद मे ही उन्होने करवट ले ली थी. पर उनके बूब का मे क्या करता
बार-बार आँख उसी तरफ चली जाती थी. दिल कह रहा था वो तो
सोई हुई है फिर क्या दर्र है. पर मई जीटा मेने उनकी ब्रा उठा कर
उनके बूब पर रखी ही थी की उन्होने ऐसा मूह बनाया जैसे च्चिंक आ
रही हो पर आई नही उन्होने आँख खोली बोली - वीनू प्लीज़ सीने ओर
गले पर भी विक्क्स माल दो कहते हुए उन्होने अपनी ब्रा उठा कर साइड मे
रख दी ओर आखों पर कलाई रख ली. अफ क्या पॉज़ था. मे एकदम
देखता ही रह गया. वो फिर कराह रही थी. प्लीज़ वीनू माल दो बहुत
दर्द हो रहा है. हार कर मैने उनके गले पर विक्क्स लगाई वो बोली
सीने पे भी लगा दो. मेने उपेर उपेर से ही लगा दी तो वो बोली दोनो
के बीच मे भी लगा दो. उनकी बूब्स की दोनो चोटियाँ खड़ी हुई थी.
लेते होने पर भी ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी पर्वत की तरह से
खड़ी होंए विक्क्स लगाने लगा तो मेरा लॅंड फिर खड़ा होने लगा.
मेने भाभी के चेहरे की ओर देखा वो वैसे ही आखों पे हाथ रखे
लेती थी. मैने बनियान उपेर उठा कर अपने लॅंड को सीधा करना
चाहा पर तभी उन्होने आख पर से हाथ हटा लिया ओर बोली क्या कर
रहे हो? मई दर्र गया बोला - "कुछ नही". "कुछ तो"-वो बोली. ये क्या
कर रहे हो कहते हुए उनहोले निक्कर के उपर से ही मेरा लॅंड पकड़
लिया. अरे ये तो बहुत टाइट हो रहा है वो दबाते हुए बोली. मई
हक्का-बक्का था. होश आया बोला छोड़ो मुझे टाय्लेट जाना है ज़ोर से
आ रही है. ओह वो बोली सस्यू आ रही है, हन मैने कहा अब मेरा
लॅंड ढीला होने लगा था पर उन्होने छ्चोड़ा नही था. पकड़े हुए ही
बोली सस्यू जाना है सच मई. हन मैने कहा आप छ्चोड़ो ना इसे. वो
बोली नही तुम झूठ बोल रहे हो तुम्हे टाय्लेट नही जाना है. मेने
कहा आपको कैसे मालूम की मुझे नही जाना है. वो बोली अगर तुम्हे
टाय्लेट आ रही होती तो तुम्हारा सस्यू लूस नही होता. उन्होने अभी तक
मेरा लॅंड छ्चोड़ा नही था पकड़े ही हुए थी निक्कर के उपर से ही.
नही मैने कहा मुझे सच मे टाय्लेट जाना है. ठीक है उन्होने मेरा
लॅंड छ्चोड़ दिया. चलो तुम्हे टाय्लेट करा डून. "करा डून मतलब"
मई खुद कर आऊंगा. आप कपड़े पहन लो मेने कहा. पर वो बोली नही
कपड़े तो अब तुम्हे टाय्लेट करने के बाद ही पहनेंगे. चलो निक्कर
उतरो. नही मई कर आऊंगा. पर वो नही मानी बोली चुपचाप उतार दो
वरना मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी. पर मे कैसे मान जाता. मई
उठने लगा आप ऐसे ही करती हो मे आपसे बात नही करूँगा. पर
उन्होने मुझे फॉरन पकड़ लिया. जबरन मुझे बेड पर गिरा दिया ओर
मेरे उपेर चाड गयी बोली मुझसे झूठ बोल रहे हो. अब देखती हून
कितनी टाय्लेट आ रही है तुम्हे, निक्कर छ्चोड़ दो वरना फट जाएगा.

उन्होने मेरे हाथ अपने परॉन के नीचे दबा लिए ओर ज़बरदस्ती मेरा
निक्कर उतार लिया ओर मेरा लॅंड पकड़ कर बोली अभी इतना टाइट था अब
इतना लूस है. झूठ बोल रहा है की सस्यू आ रही है. चलो अब
सस्यू करने. कह कर वो मेरे उपेर से हट गयी. पर मेरा लॅंड नही
छ्चोड़ा. बोली चलो बातरूम मे. पर मेरा लॅंड तो छ्चोड़ो मे
चिल्लाया. "ओहो तो इसे लॅंड कहते हैं". अब तो मई ओर भी घबरा
गया. भाभी प्लीज़ छ्चोड़ो नेया. पर वो नही मानी बोली अब तो तुम्हारा
लॅंड तभी छ्छूतेगा जब तुम टाय्लेट करने चलोगे. "अफ चलो" मैने
अपनी बनियान नीचे करते हुए कहा अब तो छ्चोड़ दो. वो बोली बातरूम
मे. मेरा लॅंड खिचते हुए वो उल्टी चल दी मे भी साथ-साथ चल
दिया. उसके बूब्स ताने हुए थे. क्योकि वो मेरा लॅंड पकड़े उल्टी चल
रही थी इसलिए उसके बूब्स बिल्कुल मेरे सामने थे. वो मेरे लॅंड को
हाथून मे दबाए तो थी ही साथ ही उसे सहलाती भी जेया रही थी
इसलिए मेरा लॅंड फिर से टाइट ताना गया. उन्होने मेरा लॅंड देखा ओर
बोली अभी से ये इतना बड़ा है जब तुम ओर बड़े होगे तो कितना बड़ा हो
जाएगा. मे लॅंड च्छुपाने लगा तो बोली लगता है टाय्लेट तुम्हे ज़ोर से
आ रही है जल्दी चलो. मे टाय्लेट की तरफ बढ़ा तो उन्होने मुझे
बातरूम की तरफ खीच लिया. मेने कहा भाभी टाय्लेट जाना है. वो
बोली बातरूम मे करना. मेने कहा- बातरूम मे? वाहा तो बात लेते
हैं. वो बोली टाय्लेट भी कर लेते हैं, अब चलो.ओर वो मुझे ले कर
बातरूम मे घुस गयी. मेरा निक्कर उनके हाथ मे था. बातरूम मे
अंदर ले जेया कर उन्होने मेरा लॅंड छ्चोड़ा तो मैने चैन की साँस ली.
पर इतनी देर मे उन्होने दरवाजा बंद करके चटकनी लगा दी ओर मेरा
निक्कर शवर की रोड पर लटका दिया, जहाँ मेरा हाथ नही पहुच
सकता था. मैने अपना लॅंड अपने हाथो के बीच मे च्छूपा लिया.
उन्होने मेरी तरफ देखा, मुस्कुरई ओर बोली-- अब पेशाब नही आ रही
क्या? जो अपना, क्या कहते हैं इसे? "हन लॅंड". अपना लॅंड हाथों मे
छुपाए खड़े हो. मुझे बड़ी शरम आ रही थी. मैने कहा आप जाओ
मई आता हून. पर वो मेरे ओर पास आ गयी. बोली तुम झूते हो मई
जानती हून तुम्हे सस्यू नही आ रही है. अब कर के दिखाओ कहते हुए
उन्होने अपना हाथ मेरे हिप्स के बीच मे कर दिया ओर मेरी गांद को
सहला दिया. मई जैसे काप सा गया. "भाभी" च्चिलते हुए मेने उनके
बूब्स को नोच लिया क्योंकि वो मेरे एकद्ूम सामने थे. "अया" उन्होने
सिसकारी ली ओर बोली आज तुम्हे सस्यू किए बागेर जाने नही दूँगी.
चलो सस्यू करो आ रही है नेया कहते हुए वो मेरे आयेज बेत गयी ओर
मेरे दोनो हाथ ज़बरदस्ती मेरे लॅंड पर से हटा दिए. मेरा लॅंड फुट
से बाहर आ कर टन गया. उन्होने फॉरन उसके उपेर एक चुम्मा दिया ओर
बोली करो पेशाब वरना आज तुम यही बंद रहोगे ऐसे ही. अब मे दर
ओर गया. मेने कहा आप इसे छ्चोड़ो तो सस्यू करूँ नेया. भाभी ने
हेस्ट हुए मेरा लॅंड छ्चोड़ दिया बोली करो. पर आप सामने से तो हटो
मे बोला. वो मेरे पीछे आ गयी अपने बूब्स मेरे कंधो पर टीका
दिए ओर बोली अब करो मे देखूँगी तुम्हे सू-सू आती भी है या नही .
मैने कहा आप हटो मे नली पर कर लूँगा पर वो बोली यही करो.
मैने कहा यहाँ बीच बातरूम मे? वो बोली हन यही. अफ मया, मई
साँस भर कर रह गया. उन्होने फिर से मेरा लॅंड पकड़ लिया ओर बोली
तुम बहुत देर से बहाने कर रहे हो चलो अब सस्यू करो कहते हुए
उन्होने मेरे लॅंड की खाल पीच्चे को खीच ली. अब मेरा लॅंड ओर कस
कर बाहर आ गया. वो बोली करो. मैने पूरी कोशिश की पर पेशाब
तो वाकई मे आ ही नही रही थी. 10-12 बूँद तपाक कर रह गयी.
बस इतनी ही वो बोली ओर फिर मेरे आयेज आ गयी. उन्होने मेरे लॅंड को
झटका सा दिया कुछ बूंदे उनके उपेर जा गिरी. वो बोली- "है-है"
तुम्हारी पेशाब मेरे उपर आ गयी है सॉफ करो. मेने कहा आप मेरे
आयेज आई ही क्यो? अब मई सॉफ नही करूँगा आप खुद ही करो.
उन्होने घूर कर मुझे देखा ओर फिर मुस्कुरा कर अपने बदन पर
हाथ फिराया ओर मेरी सस्यू अपने पुर बदन पर रग़ाद लिंऐ देखता
ही रह गया. अब भी उन्होने एक हाथ से मेरे लॅंड को पकड़ा हुआ था.
मेरा लॅंड फुल टाइट था ओर मस्ती से तनटना रहा था. वो बोली ये
अभी तक इतना टाइट क्यो है. पता नही मैने कहा ओर इसके साथ ही
मेरा लॅंड सिकुड़ना शुरू हो गया. वो बोली लगता है तुम्हारी सस्यू
ख़तम हो गयी पर अब मुझे सस्यू आ रही है. मैने कहा मेरा
निक्कर दे दो फिर आप सस्यू कर आना. वो बोली नही अभी नही पहले
मई भी सस्यू कर लून. चलो मेरी पेंटी उतरो. नही, मे पीछे हटने
लगा पर हट कैसे सकता था उन्होने मेरा लॅंड सख्ती से पकड़ रखा
था. बोली उतरो वरना मे तुम्हारा लॅंड नही छ्ोड़ूँगी. तुम भी देखो
सस्यू कितनी की जाती है. मैने कहा आप उतार लो मे खड़ा तो हून पर
वो नही मानी हार कर मुझे उनकी पेंटी उतरनी ही पड़ी मे उनकी पेंटी
नीचे की ओर सरका रहा था ओर वो मेरे लॅंड को पकड़े हुए खड़ी थी
बिल्कुल ऐसे की उनके बूब्स मेरे मूह से लग रहे थे. खेर मैने पेंटी
उतार दी तो वो मेरे लॅंड को पकड़े हुए वही बेत गयी ओर पेशाब
करने लगी बोली देखो ऐसे करते हैं सस्यू. मे पहली बार किसी औरत
को पेशाब करते देख रहा था. पेशाब बाहर आने का रास्ता देखते
ही मुझे फिर से शरम आई ओर मे पीच्चे हटा ही था की भाभी
मेरा लॅंड पड़के हुए खड़ी हो गयी. वो अभी भी सस्यू कर रही थी
सारी सस्यू उनके परॉन पर आ कर बहने लगी. वो बोली ये तुमने क्या
किया. मैने कहा- क्या किया मैने आप खुद खड़े हुई. वो बोली तुम
पीच्चे हुए तो मुझे खड़ा होना पड़ा. मई उनकी सस्यू देख रहा था जो
एक च्छेद से निकल कर उनके परॉन से बहती हुई नीचे गिर रही थी.

फिर उन्होने सस्यू करनी बंद कर दी. अब तो छ्चोड़ दो मेरा लॅंड अब तो
आप भी सस्यू कर चुकी मेने लगभग चिल्लाते हुए कहा. उन्होने मेरा
लॅंड छ्चोड़ दिया. मई अपने निक्कर की तरफ बढ़ा पर वो उपेर लटका
undefined हुआ था मेरा हाथ नही पहुच सकता था. मेरा निक्कर दो भाभी-
मेने कहा. वो बोली देती हून पहले सू-सू तो धो लू. मैने जल्दी से
हाथ धोए ओर बोला अब लाओ निक्कर. "ओर लॅंड नही धूगे"-वो बोली.
गंदा रह जाता है ऐसे चलो यहाँ आओ. मे फिर वाश्बेसिन की ओर
बढ़ गया. जैसे ही मैने पानी के लिए वाश्बेसिन मे हाथ डाला
उन्होने फिर से मेरा लॅंड पक्कड़ लिया बोली तुम पानी डालो मे धो देती
हून. मैने कहा नही मे धो लूँगा. वो बोली सही से सॉफ नही होगा
मे धो देती हून. मेरे पास कहने को कुछ नही था जान गया था वो
वही करेंगी जो उनके मान मई है. सो पानी अपने लॅंड पर डालने लगा
ओर वो उसे धीरे-धीरे रगार्ने लगी. मेरे लॅंड मे फिर से सख्ती
आने लगी. वो बोली लगता है फिर से सस्यू आ रही है. मे शर्मा
गया बोला नही आ रही है. पर ये तो फिर से टाइट हो रहा है वो
बोली. मैने कहा पता नही क्यो टाइट हो रहा है. वो बोली मई बता
दूँगी क्यो टाइट हो रहा है. कहते हुए उन्होने मेरा लॅंड छ्चोड़ दिया
ओर बोली अब मे पानी डालती हून तुम सॉफ करो. ये सॉफ हो चुका है
भाभी मई बोला. वो बोली ये तो सॉफ हो चुका है पर अभी ये रह
गयी है. उन्होने अपनी छूट की तरफ इशारा किया. बोली चलो तुम
इसे सॉफ करो. मेरे लाख माना करने फिर भी वो नही मानी ओर मुझे
उनकी छूट सॉफ करने को तैयार होना पड़ा. उन्होने हाथ मे पानी
भर कर अपने पेट पर डाला. जो बहता हुआ उनकी छूट तक आ गया.
मैने जल्दी से उनकी छूट पर हाथ फिराया ओर बोला हो गयी सॉफ अब
चले. वो बोली अभी कहा हुई, क्या मैने ऐसे है सॉफ किया था
त ुम्हारा लॅंड? ठीक से सॉफ करो वरना निक्कर नही मिलेगा ओर आज
यही बंद रहोगे मेरे साथ. "ओफो" डालो पानी, कर रहा हून सॉफ-
कहते हुए मैने अपना हाथ फिर से उनकी गीली छूट पर रख दिया. वो
मुस्कुरई ओर पानी डालने लगी. बोली- अभी से सीख जाओगे तो अपनी बीवी
की छूट भी सही से सॉफ कर सकोगे. मैने जल्दी-जल्दी छूट पर
हाथ फिराया इसी बीच मेरी उंगली उसके छूट के च्छेद मेभी चली
गयी. हन यही पर रगर के सॉफ करो- वो बोली. अब मुझे भी मज़ा
आ रहा था. मई मज़े से अपनी उंगली उसकी गीली छूट मे घूमने लगा.
थोड़ी देर बाद मई बोला- अब बहुत हो गया भाभी, अब चलो. उसने
अपनी पेंटी वही पर छ्चोड़ दी ओर दरवाजे की तरफ चल दी. मैने कहा
भाभी मेरा निक्कर तो दे दो. उसने मेरा निक्कर उठाया, दरवाजा खोला
ओर बाहर चल दी. मैने कहा भाभी कुछ पहन तो लो ओर मेरा निक्कर
दो मई भी पहन लू. उसने कहा- मेरी पेंटी गीली हो चुकी है, अंदर
जा कर पहन लूँगी. मैने कहा मेरा निक्कर तो दे दो. उसने कहा अभी
गीले हो पहले टवल से पोंच्छ कर सूखा तो लो. नही रहने दो, मई
ऐसे ही पहन लूँगा- मई बोला. पर वो बोली- नही इस तरह से मेल
जमा हो जाता है. पहले सूखा लो. पर मुझे बातरूम से बाहर आते
हुए शरम आ रही थी. क्योकि बातरूम लॉबी के बाहर बना था. ओर
रूम तक खुले आसमान के नीचे से हो कर जाना पड़ता था. पर जब वो
मेरा निक्कर ले कर चली गयी तो मई वहाँ नंगा खड़ा हुआ क्या कर
सकता था. मेरा लॅंड मुरझाया हुआ लटका था. पर जैसे ही मे भाभी
के बूब्स ओर छूट के बारे मे सोचने लगा, फिर से तनटानने लगा.
मुझे लगा जैसे मैने कुछ मिस कर दिया मुझे भाभी की छूट को
ओर सहलाना चाहिए था ओर उनके बूब्स का दूध पीना चाहिए था. पर
अब तक तो भाभी कपड़े पहन चुकी होगी. ये सोचते हुए मई बातरूम
से बाहर निकला तभी भाभी जो की बातरूम की ड्यूवर से च्चिपी खड़ी
थी मेरे पीछे आ गयी ओर मेरे चूटरो के बीच मे हाथ फेर दिया.
मई चिहुक गया- क्या करती हो भाभी? वो बोली चलो रूम मे, सूखने
के बाद निक्कर पहन लेना. वो अभी तक नंगी ही खड़ी थी. इस बार
मैने जो नज़रें उठाई तो उनके बूब्स पर ही जूम गयी. कितने बड़े-
बड़े थे ओर आयेज निपल्स ऐसे लग रहे थे जैसे खरबूजों मे अलग
से तो लंबे मोटी लगा दिए हों. जी चाहा खीच लून उनको. पर ऐसा
कर नही पाया.

फिर भाभी ओर मई बेडरूम मई गये. हम दोनो ही लगभग सूख
चुके थे. मैने फिर निक्कर की माँग की तो भाभी बोली- उपेर से
सूख चुके हैं पर अभी नामी है उसे सूखने के बाद ही पहनना.
मुझे भी अब ऐसे ही मज़ा आ रहा था. भाभी बोली बेड पर लेट जाओ
पहले मई तुम्हारा लॅंड सूखा देती हून. फिर तुम मेरी छूट को सूखा
देना. मई जनता था की मेरे कहने से कुछ नही होने वाला, सो बेड पर
सीधा लेट गया. मेरा लॅंड कुछ ताना भी था ऑफ कुछ हल्का भी हो
रहा था. भाभी ने मेरा निक्कर एक तरफ डाला ओर मेरा लॅंड अपने
हाथ मे ले लिया ओर मेरे पेट पर से नीचे की ओर फूक मरने लगी.
बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उन्होने मेरे लॅंड की खाल पकड़ी उपेर
उठाई ओर मेरे लॅंड के अंदर एक हल्की फूक मारी. "आ" मज़ा आ
गया. वो धीरे-धीरे मेरे लॅंड को सहलाते हुए उसमे फूक मारती
रही. मेरा लॅंड टाइट हो कर टन चुका था. अब उन्होने मेरे लॅंड की
टोपी के नीचे फूक मारनी शुरू कर दी, मुझे मज़े आ रहे थे.
अचानक उन्होने फूक की जगह मेरे लॅंड पर अपना थूक गिरा दिया.
मई चिल्ला पड़ा ये क्या किया भाभी. मेरे लॅंड पर थूक दिया. वो
बोली- सॉरी, अभी सॉफ कर देती हून. हन अब फिर धोऊॉगी ओर फिर
से सुखाऊगी. बस यही करते रहना. वो बोली- नही अब नही धोना.
फिर क्या अब गंदा ही रहेगा. पर उन्होने जवाब देने की जगह मेरे
लॅंड को अपने मूह मे घुसेड लिया ओर चूसने लगी. मेरे जिस्म मे जैसे
आग लग गयी. मई एकद्ूम उठ बेता-क्या करती हो भाभी "च्चि". वो
बोली नही च्चि इसी मे तो मज़ा आता है. अच्छा बताओ दूध पीना है.

नही रहने दो-मैने कहा. अरे नही पी लो. कहते हुए उन्होने मेरा
लॅंड छोड़ कर मेरे सर को अपने सीने से लगा लिया. उनके बूब्स मेरे
मूह से लग गये. अब मई समझा की वो किस दूध की बात कर रही है.
मैने जल्दी से एक निपल को मूह मई भर लिया ओर दूध खीचने
लग.पर कुछ नही आया. अब मैने दूसे निपल को मूह मे लेकर दूध
पीना चाहा. पर यहाँ भी कुछ नही. दूध तो है ही नही भाभी
मई बोला तो वो हास पड़ी, बोली- अभी से दूध थोड़े ही आता है. तो
कब आता है. बच्चा होने के बाद. बच्चा कब होगा. जब तुम्हारे
भैसाहब चाहेंगे, पर तुम उनसे पूच मत लेना. तुम थोड़ी देर रूको
मई अभी तुम्हे दूध पिलाती हून. कह कर वो उठी ओर कित्चान मे
चली गयी. मैने सोचा पीछा छ्होटा ओर जल्दी-जल्दी अपना निक्कर ओर
बनियान पहन लिया. पर वो जल्दी ही वापस आ गयी ओर खाली हाथ
ही, जबकि मई समझा था की वो दूध गिलास मे लेकर आएगी. आते ही
बोली अरे तुमने कपड़े पहन लिए क्यो? मैने कहा अब आप भी पहन लो
फिर सोते हैं. पर वो नही मानी बोली- मई तुम्हे दूध पिलाने आ
रही थी ओर तुमने कपड़े पहन लिए जल्दी से उतरो वरना मई उतारूगी
तो फट सकते हैं. मेरे काफ़ी माना करने पर भी वो नही मानी तो हार
कर मैने अपनी बनियान उतार दी. "ओर निक्कर"- वोबोली. नही भाभी अब
रहने दो मई तक गया हून सोना है. तो सो जाना पर निक्कर तो
उतरना ही पड़ेगा वरना मई आ रही हून उतरने. हार कर मैने
निक्कर भी उतार दिया. मेरा लॅंड मुरझा चुका था. वो देखते ही बोली-
है तुम्हारा लॅंड तो फिर से सो गया. अभी इसे जागते हैं. चलो
पहले दूध पियो. कहते हुए वो बेड पर बेत गयी. मैने देखा उनके
निपल्स कुछ चमक रहे थे. दूध आ गया क्या भाभी? मैने
पूछा. हन तुम पियो तो. मैने जैसे ही एक निपल को मूह मे लिए
जान गया भाभी शहद लगा कर आई थी. पर मीता निपल बड़ा
अच्छा लग रहा था तो मई चूसने लगा. अभी मई पहला निपल ही
चूस रहा था की उन्होने मेरा लॅंड फिर से पकड़ लिया. जो की अब फिर
टन चुका था. जैसे ही उन्होने मेरे लॅंड को पकड़ा मई चिहुक गया.


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Sunday, September 21, 2008

उस दिन के बाद पार्ट--१

उस दिन के बाद पार्ट--१
हेलो दोस्तो मैं यानी आपका राज शर्मा एक ओर मस्त कहानी लेकेर हाजिर हूँ
मेरी कहानीhttp://asian-beautie.blogspot.com/ पर हैं

एक दिन जब मई स्कूल से घर वापस आया तो देखा की दो अजनबी
लोग हुमारे घर मे बेते थे. पता चला की ये लोग हस-वाइफ हैं ओर
सामने वेल घर मे हुमारे नये नेबर बन कर आए हैं. जल्दी ही
वो लोग हुंसे घुल-मिल गये. बाद मे पता चला की उन्होने लोवे-
मर्रिगे की थी जिसके बाद उनकी घरवालों से नही बनी इसलिए उन्हे
घर छोड़ कर किराए पे रहना पड़ा. भाभी ग़ज़ब की सुंदर थी.
भैसाहब को एक मार्केटिंग फर्म मे सर्विस मिली थी. जिसकी वजह से
उन्हे ज़्यादातर बाहर ही रहना पड़ता था. कोई ठिकाना था नही सो अपने
ही शहर मे घर किराए पर ले कर रहने लगे. जल्दी ही वो फिर
अपनी ड्यूटी पर वापस चले गये.
अब भाभी का ज़्यादातर समय हुमारे साथ ही गुज़रने लगा. 3-4 दिन ही
निकले होंगे की एक रात को अचानक शोर मच गया "चोर-चोर". पता
लगा की भाभी की च्चत पर से कोई कूद कर भगा है. भाभी से
पूचछा गया तो वो दर कर रोने लगी की उनके घर मे कोई चोर घुस
आया था. मेरी मों उन्हे समझा कर घर ले आई पर सवाल वोही था
की अगर कोई चोर फिर आ गया तो. तय हुआ की आज से भैसाहब के
आने तक मे उनके घर पर सोया करूँगा. फिर मे भाभी के साथ
उनके घर पर चला गया. रात भर भाभी मेरे साथ चिपक कर
सोई.
उस दिन के बाद से हुमारी ओर अचहचही निभने लगी. मई रात को तो सोता
ही था भाभी के पास अब दिन मे भी मेरा समय उनके साथ बीतने
लगा. मे उनके घर के छोटे-मोटे काम कर दिया करता था ओर वो
पढ़ाई मे मेरी हेल्प करने के अलावा मेरे साथ गेम्स भी खेलती थी.
14त मे मई अचहचे नुंबरों के साथ पास हुआ. इसका क्रेडिट मेने
भाभी को दिया. सबने उनकी तारीफ़ की. अब मेरी वाकेशन्स स्टार्ट हो
चुकी थी मे भाभी के साथ ज़्यादा समय बिता सकता था. भाभी के
घर मे दो रूम थे एक ड्रॉयिंग रूम ओर दूसरा बेडरूम.
एक रात को मेरी नींद अचानक खुल गयी. ड्रॉयिंग रूम मे से किसी के
करहने की सी आवाज़ आ रही थी. मई दर गया. बेड पर भाभी भी
नही थी. दोनो कमरों के बीच मे एक विंडो थी जिस पर मोटा परदा
पढ़ा था. डरते-डरते मेने उसके पास जा कर हल्का सा परदा हटा कर
देखा. कोई नही दिखा क्योंकि उधर अंधेरा था ओर इस तरफ निगठलंप
जल रहा था. जब कुछ नही दिखा तो मेने भाभी को आवाज़ दी. तुरंत
उधर से आवाज़ आनी बंद हो गयी. दूसरी तरफ से दरवाजा खुला ओर
भाभी इधर आ गयी. बोली क्या हुआ वीनू. मेने कहा कुछ नही उधर
आप क्या कर रही थी. वो दर सी गयी बोली कुछ नही. तुमने क्या
देखा? मेने कहा कुछ नही उधर अंधेरा था आपके रोने की सी आवाज़
आ रही थी. वो बोली मुझे तुम्हारे भैसाहब को याद करके रोना आ
रहा था तुम जाग नेया जाओ इसलिए मई उधर रूम मे चली गयी. मुझे
तसल्ली हो गयी. ओर मई सो गया.

पर दूसरे दिन भाभी सुबह को ही मुझसे फिर पूच्छने लगी तुमने
क्या देखा था रात को. मेरे कई बार कहने पर उन्हे यकीन आया की
मेने कुछ नही देखा. खेर फिर मे घर चला गया. डोफेर मे भाभी
ने फिर आवाज़ दी वीनू - "साबुन ला दो". मे उनके घर चला गया. वो
कित्चान मे थी ओर आता मढ़ रही थी. बोली तुमने किसी को बताया तो
नही. मई बोला-- क्या बताया ? वोही रात वाली बात ? नही बताई ?
क्या है भाभी आप भी बस बोर कर रही हो. अब पूचछा तो ज़रूर
किसी को बता दूँगा. अरे नही मई तो बस ऐसे ही पूच रही थी.
मेरे लिए साबुन ला दोगे मुझे नहाना है. ला दूँगा मेने कहा पैसे
दो. वो बोली मेरे दोनो हाथ मे आता लगा है तुम खुद ले लो. ठीक
है मेने कहा- पर पेसे हैं कहाँ. वो बोली थोड़ी उँची जगह पर
हैं, निकल लोगे? हन मेने कहा अगर हाथ पहुच गया तो ज़रूर
निकल लूँगा. तो निकल लो उन्होने कहा ओर नीचे बेत गयी. अब मेरी
समझ मे आया की वो क्या कह रही हैं. मई दर गया नही भाभी आप
हाथ धो कर दे दो. नही वो बोली तुमने कहा था की तुम निकल लोगे
अब निकालो. मेने बहुत माना किया पर वो नही मानी. आख़िर मुझे उनके
ब्लाउस मे हाथ डालना ही पड़ा. पहली बार किसी लेडी के बूब्स मैने
टच किए थे. मुझे कुछ दर तो लग रहा था पर अभी तक इसका
मतलब नही पता था. मुझे सेक्स के बारे मे अभी तक कोई जानकारी नही
थी पर उनके बूब्स टच करते हुए कुछ अजीब लग रहा था. मेने
बीच मे हाथ डाला पर पेसे नही मिले. वो बोली बीच मे नही साइड
मे हैं. मेने पूचछा- किस साइड मे? पता नही वो बोली देख लो. बीच
मे से गिर जाते हैं इसलिए साइड मे रखे थे, किस साइड मे याद नही
देख लो. मैने जैसे तैसे पेसे निकले ओर जल्दी से सोप लेने चला
गया.
बहुत अजीब सा लग रहा था. खेर सोप ले के आया तो भाभी कही
दिखाई नही दी मेने आवाज़ दी तो उनकी आवाज़ बातरूम से आई वीनू
सोप यहाँ दे दो. मे सोप ले कर बातरूम के बाहर पहुचा. दरवाजा
खुला था वो सिर्फ़ अंडरवेर ओर ब्रा मे थी. मेने नज़र झुका ली. वो
बोली वीनू रेपर उतार दो. मेने रेपर उतार कर सोप उन्हे दिया ओर कहा
घर जेया रहा हून. पर वो बोली मई नहा रही हून दरवाजा खुला
पड़ा है. प्ल्स मेरे नहाने तक रुक जाओ. मैने बाहर का दरवाजा बंद
किया ओर लॉबी मे बेत गया. पर ज़रा देर मे ही भाभी ने फिर पुकारा
वीनू मेरी पीठ पर साबुन लगा दोगे प्ल्स. "अफ" मेने कहा आता हून
भाभी. मई बातरूम मे गया वो बात्ट्च्ब मे लेती थी मे पहुचा तो
बेत गयी. मई पीछे बेत कर उनकी पीठ पर साबुन सागने लगा. पर
वो ओर उचक कर बेत गयी ओर हाथ उपर कर लिए की बगलो मे भी
लगा डून उन्होने ब्रा भी नही पहनी थी. मैने सोप उनके हाथ मे दे
दिया ओर बाहर चला आया वो आवाज़ देती ही रही. थोड़ी देर मे वो गौण
पहन कर बाहर आई ओर मुस्कुराते हुए बोली कितना शरमाता है.
शादी हो जाएगी तो क्या करेगा. नही करूँगा शादी मैने कहा ओर
चला आया.

पर शाम को ही उन्होने मुझे बुलाया ओर बोली आइस्क्रीम खाने का मान हो
रहा है ले आओ दोनो खाएँगे. मे खुश हो गया क्योकि आइस्क्रीम मुझे
भी अचहचही लगती थी. पर पेसे की बात फिर वही आ गयी. बोली
निकल लो पेसे. पर आज तो आपके हाथ खाली हैं. तो क्या हुआ वो बोली
कल भी तो निकले थे. आज भी निकल लो. नही मेने कहा आप दे दो.
तो फिर रहने दो आइस्क्रीम वो बोली मे चलने लगा तो बोली मई औंती
से कह दूँगी के कल इसने मेरे ब्लाउस मे हाथ दल कर पेसे निकले
थे. अब मई दर गया. मों से शिकायत मतलब पिटाई. क्या मुसीबत है
मेने उनके ब्लाउस मे हाथ डाला ओर पेसे निकल लिए. अब तो ये लगभग
रोज़ ही होने लगा उन्हे जब भी कुछ मगाना होता मेने सामने बेत
जाती. ओर मे पेसे निकल लेता. मेरी 7त की पढ़ाई चल रही थी.
भाभी मुझे अक्सर पढ़ती भी रहती थी. पर अब वो मसखरी कुछ
ज़्यादा ही करने लगी थी.

भैसाहब बीच-बीच मे आते रहते थे. एक बार वो रात को आए. मे
सोया था पर मुझे नींद मे लगा की कोई है. पता नही वो कब आ
गये थे. मुझे गोड मे लिए हुए थे, भाभी कह रही थी ड्रॉयिंग
रूम मे लिटा दो रात मे बेचारा केसे घर तक जाएगा. ओर भैसाहब
ने मुझे ड्रॉयिंग रूम मे सोफे पर लिटा कर दरवाजा बंद किया ओर
वापस आ गये. फॉरन ही मेरी नींद खुल गयी. अंधेरे मे मुझे दर
लगने लगा. पर दर के मारे उठ नही पाया ओर ना ही भाभी को आवाज़
दे पाया. उनके बेडरूम से लाइट ओर उनके हासणे की आवाज़ें आ रही थी.
मेने उठ कर विंडो से परदा हल्का सा हटाया लाइट के लिए ओर अपनी
आखें बंद करके लेट गया. पर चैन नही आया फिर थोड़ी देर मे
उठा ओर उधर देखने लगा. भैसाहब सिर्फ़ अंडरवेर मे थे ओर भाभी
ने कुछ भी नही पहना था. भैसाहब भाभी का दूध पी रहे थे
मतलब भाभी के बूब्स चूस रहे थे ओर भाभी हास रही थी. मई
फिर लेट गया. फिर थोड़ी देर बाद देखा तो भैसाहब भाभी के उपर
लेट कर कूद रहे थे. ये सब नया अनुभव था मेरे लिए,बड़ी देर मे
नींद आई. अगले दिन भैसाहब ने ही उठाया बड़े प्यार से बातें
करते रहे. मई जवाब देता रहा पर दिमाग़ मे रात की ही बातें
घूम रही थी. फिर मे घर चला गया. पर वाहा भी ओर स्कूल मे
भी मुझे रात वाली बात याद आती रही. मई सोच रहा था की जब
भैसाहब जाएँगे तो भाभी से पुच्हूंगा. वो ही बताएँगी इस बारे
मे. पर भैसाहब भी पुर 5 दिन के बाद वापस गये. तब तक मे
घर पर ही सोया. 5वे दिन जब मे स्कूल से आया तो पता चला
बाहिसहब चले गये हैं ओर भाभी ने मुझे बुलाया है. मे सीधे
वही चल पड़ा मों ने खाने को कहा तो मेने कहा भाभी के साथ ही
खा लूँगा. मों कुछ बोलती रही ओर मे भाभी के गहर पहुच भी
गया. उनके साथ ही खाना खाया.

मुझे फिर वोही बात याद आने लगी मेने हिम्मत करके पूच लिया
भाभी छोटे बच्चे तो अपनी मों का दूध पीते हैं क्या बड़े लोग
भी पीते हैं. नही तो उन्होने कहा. फिर उस दिन भैसाहब आपका
दूध क्यो पी रहे थे. अब वो चोणकी बोली तुम्हे कैसे पता? मेने
देखा था. कब ?उन्होने पूचछा. तब मेने बताया फिर उन्होने मुझसे
सारी बातें पूच्ची की मेने क्या-क्या देखा. मेने सूब बता दिया. वो
पूच्छने लगी की मेने किसी को बताया तो नही. मेरे माना करने पर वो
कहने लगी ये बातें किसी को बताई नही जाती लोग बड़े हो कर समझ
जाते हैं. इसलिए किसी से इस बारे मे बात नही करना. ठीक है मेने
कहा. पर उसके बाद भी मुझे चैन नही आ रहा था वोही सब कुछ
याद आता रहता था.

खेर किसी तरह कुछ दिन बीते होंगे एक रात को अचानक मेरी नींद
खुल गयी. कुछ अजीब सा लग रहा था. देखा भाभी का हाथ मेरे
अंडरवेर के अंदर था ओर मेरे पेनिस को सहला रहा था. मे चोंक कर
उठ गया. ये क्या कर रही हो भाभी. वो भी अचानक हार्बारा गयी,
बोली देख रही थी की तुम्हे टाय्लेट तो नही जाना. ओफफो ये कॉआन सा
स्टाइल होता है टाय्लेट देखने कॅया. मुझे जगा लिया होता मेने कहा तो
वो बोली तुम्हराई नींद खराब हो जाती मेने सोचा मे देख लून अगर
तुम्हे टाय्लेट आ रही होगी तो जगा दूँगी. पर आपको कैसे पता
चलता की मुझे टाय्लेट जाना है मेने पूचछा. भाभी बोली अगर तुम्हे
टाय्लेट आ रही होती तो तुम्हारा ये सू-सू टाइट हो जाता. मेने गौर
किया वो सही कह रही थी. फिर भी अब तक उनका हाथ मेरे अंडरवेर
के अंदर ही था मेने कहा अब तो अपना हाथ निकालो मे जाग चुका हून.
ओर आयेज से मुझे जगा लिया करना इस तरह मत करना. पर 3-4 दिन ही
बीते होंगे की एक रात को फिर वैसे ही मेरी आँख खुली आज भी
भाभी का हाथ मेरे अंडरवेर मे था. मेने उस दिन उन्हे बहुत
झिरका. आपको ऐसा नही करना चाहिए मुझे जगा लिया करो. उन्होने
सॉरी कहा तब मे सोया पर वो अपनी हरकतों से बाज आने वाली नही
थी. एक हफ़्ता गुजर गया. उन्होने रात को मुझे परेशान नही किया
पर फिर एक दिन मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लॅंड को सहला रही
थी ओर आज तो मेरा लॅंड भी टाइट होने लगा था. मई काफ़ी देर तक
ऐसे ही पड़ा रहा मुझे भी मज़ा आ रहा था. पर थोड़ी देर बाद
मुझसे सहना मुश्किल हो गया तो मे फिर उठ बेता, उन्हे झिरका तो वो
मासूमियत से बोली मेने हाथ अंदर कहाँ डाला मे तो उपर से ही देख
रही थी. मुझे हसी आ गयी कितनी देर से देख रही थी आप. मई
मों से शिकायत कर दूँगा. फिर उन्होने मेरे लॅंड को टच करना
बंद कर दिया.
पर वो मुझे च्छेदने से बाज़ नही आती थी. कभी अपने ब्लाउस मे से
पेसे निकलवाने के बहाने से हाथ ब्लाउस मे डलवती ओर जब मेरा
हाथ अंदर होता तो मेरा निक्कर नीचे खीच देती ऑफ कभी बेते से
उठ कर खड़ी हो जाती मेरा हाथ ब्लाउस मे फस कर ही रह जाता इस
सब मे 1-2 बार उनके ब्लाउस के बटन भी टूट गये ओर उनके बूब्स
काफ़ी दिख भी जाते थे पर मे फॉरन नज़र घुमा लेता था, कभी
बातरूम मे बुला कर पीठ पे साबुन लगाने के बहाने मुझे अपने
हाथ-पावं उपर तक दिखा देती थी. पर मे इग्नोर करता रहता था.
लकिन अब मुझे भी मज़ा आने लगा था. स्कूल मे दोस्तो के साथ भी
ऐसी ही बातें होती रहती थी. पर मेने उन्हे कभी भाभी के बारे मे
नही बताया. हाँ अब मे लॅंड-छूट का फ़र्क समझने लगा था पर मे
इनका उसे नही जनता था. बस सेक्स की नालेज आती जेया रही थी.
मेरा लॅंड अब अक्सर टाइट हो जाता था. ओर मे इसका मतलब समझ नही
पता था. पर भाभी जैसे कुछ समझने को तैयार ही नही थी. मे
समझ नही पा रहा था की आख़िर वो चाहती क्या हैं.

उन दीनो गर्मी के दिन थे. सबकी हालत गर्मी से खराब थी. भाभी
रात को कम से कम कप्रों मे सोया करती थी. मेरी आख रात को खुल
जाती तो मे आखें फाड़-फाड़ कर उनका जिस्म देखता रहता था. 1-2 बार
उनकी नींद भी खुल गयी उन्होने देखा तो मे फॉरन ऐसे टाय्लेट की
तरफ चल देता जैसे अभी उठा हौं. उस दिन काफ़ी गर्मी के बाद
शाम से बारिश होनी शुरू हो गयी थी. मों ने मुझे जल्दी ही
भाभी के घर भेज दिया ताकि बारिश तेज़ होने से मे भीग नेया जाऊं.
मे भाभी के घर पहुचा तो वो बोली मई तुम्हारा ही वेट कर रही
थी की तुम आ जाओ तो मे नहा लून वरना दरवाजा कॉआन खोलता. मेने
कहा मई आ गया हून आप नहा लो. उन्होने अपनी मेक्शी वहीं उतार दी.
मई एकद्ूम चोंक गया मेने कहा ये आप क्या कर रही हो वो बोली मे
नहाने जेया रही हून. मेने कहा कपड़े यहाँ क्यो उतार रही हो. वो अब
अपना ब्लाउस उतार रही थी. मेरा लॅंड टाइट हो रहा था. वो तो अच्छा
था की मे लंबी त-शर्ट पहना था. उन्होने ब्लाउस भी उतार दिया. अब
वो ब्रा ओर पेटीकोत मे थी. मे फॉरन उठ कर लॉबी मे आ गया बाहर
बारिश हो रही थी. तभी भाभी भी आ गयी वो ब्रा ओर पेंटी मे
थी. अफ मे बेचैन हो रहा था. वो मुस्कुरई- बोली मे बारिश मे
नहाने जा रही हून, तुम नहाऊगे? मेने माना किया तो वो ज़बरदस्ती
मुझे बारिश मे खीचने लगी. मे समझ गया नहाना ही पड़ेगा. फिर
भी मेने बहाना किया मेरे पास कपड़े ओर नही हैं ये भीग जाएँगे
तो क्या पहनूंगा. वो बोली मेरी पेंटी पहन कर नहा लो फिर अपना
निक्कर पहन लेना. नही मेने माना कर दिया. पर वो मानी नही बोली तो
ऐसे ही नहा लो बाद मे देखेंगे क्या पहनना है. नही मेने विरोध
किया तो उन्होने टवल दे दी बोली ये पहन लो नहाने के बाद अपने
कपड़े वापस पहन लेना. उनकी ज़िद से हार कर मेने अंदर रूम मे जा
कर कपड़े उतरे ओर टवल लपेट कर बाहर आ गया. भाभी रूम के
बाहर ही खड़ी थी बोली चलो बाहर चले. वो ओर मे दालान मे आ गये
जहाँ बारिश काफ़ी तेज़ हो रही थी. काफ़ी देर तक हम नहाते रहे वो
बर्बर मेरे बदन पर अपना हाथ रग़ाद देती थी. ओर कभी मुझसे
बिल्कुल चिपक जाती थी. मुझे अजीब सा फील हो रहा था. अचानक
उन्होने मेरा टवल खीच लिया. मे बिल्कुल नंगा हो गया. "भाभी" मई
चीख पड़ा. पर वो हास दी. मई दोनो हाथ से अपना लॅंड पकड़े खड़ा
था झुका हुआ. वो बोली ले लो टवल. मेने कहा वापस दो वरना मे बात
करूँगा. वो पास आई मई समझा टवल वापस करने आई है.
उन्होने पास आ कर मेरी चूटर के बीच मे अपना हाथ फिरा दिया.
से मे लाल हो गया. भाभी टवल वापस दो नेया. कितना शरमाता
. ये ले टवल. उन्होने टवल वापस मेरी तरफ फेक दिया. मे जल्दी
टवल की ओर भगा. जब तक टवल उठा कर लपेटी, देखा भाभी ने
ब्रा उतार दी थी ओर दालान मे ही लेट गयी थी. उनके बूब्स उपेर
उठे हुए थे ओर पानी उन पर गिर रहा था. कुछ देर मे देखता रह
गया अचानक उन्होने मेरी तरफ देखा तो जैसे अकल आई ओर मई
की तरफ भाग गया ओर रूम बंद कर लिया भाभी कहती रह
गयी की रूम भीग जाएगा. पर मे अंदर घुस कर डोर बंद कर
चुका था. कपड़े पहन कर मे बाहर आया भाभी अभी भी दालान मे
नहा ही रही थी. बोली तुम तो इतनी जल्दी भाग गये. मेने कहा आपने
मजबूर किया. वो बोली मेने क्या किया नहाना है तो कपड़े पहन कर
कॉआन नहाता है. वो बहुत देर तक नहाती रही फिर बारिश कम हो
अंधेरा भी होने लगा था बोली अच्छा टवल तो दे दो अब मे नहा
चुकी हून. मेने बाहर जेया कर टवल दिया तो मुझे लगा की वो कुछ
भी नही पहनी हैं. बिल्कुल नंगी हैं. उन्होने टवल पकड़ने के लिए
कदम बढ़ाया तो सॉफ लगा वो कुछ नही पहनी थी. मेने जल्दी से
टवल उनके उपेर फेका ओर अंदर आ गया. "शर्मिला टागॉर का भाई"
भाभी की आवाज़ आई. मई बेडरूम से कित्चान मे चला गया ओर
भाभी बातरूम मे. मेने खाना लगाया ओर लॉबी मे तबले पर आ गया
जल्दी ही वो भी आ गयी उन्होने मेक्शी पहनी हुई थी. मुझे कुछ
तसल्ली हुई. हुँने खाना खाया ओर सो गये.


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