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Friday, November 28, 2008

सलहज की चुदाई

सलहज की चुदाई


दोस्तो ! मैं सेक्सी कहानियाँ सात महीनों से पढ़ रहा हूँ। मैं २५ साल का शादीशुदा मिडल परिवार का राजस्थान के एक छोटे से कसबे का सेक्सी लडका हूँ। मैं ८ वीँ कक्षा से औरतोँ को चोदने लगा था। मेरी शादी को दो साल हो गये है। मेरी सलहज की अभी तक चूत कुँवारी है। वो ५ सालोँ मे अभी तक माँ नहीं बन पाई।

उस समय वो २६ साल की थी. बहुत सुंदर है, उसका फिगर ३६-२६-३६, ऊंचाई ५’५", वो बहुत सेक्सी है. जब भी मैं उसके बारे मे सोचता तो उसको जमकर चोदने का मन करता लेकिन मैं कुछ नही कर पाता. वो मेरी पत्नी से सारी बातें शेयर करती थी। वो मेरी पत्नी को सेक्सी फ़िल्में और सेक्सी किताबें दिया करती थी। उसके बाद मैं इन्टरनैट पर सेक्सी कहानियाँ ढूंढने लगा, मुझे बहुत सी कहानियाँ मिली मै उन्हें प्रिन्ट करके उन्हें देने लगा। मैं बस उसको चोदना चाहता था। जब मेरी पत्नी के बच्चा हुआ, बीस दिन के बाद वो मायके गई। अब उसके मन में भी माँ बनने की चाह होने लगी।

जब मैं १५ दिनों के बाद रविवार के दिन सुबह ससुराल में गया तो वो मुझे देख कर खुश हुई। दिन में हम दोनो बातें करने लगे मैने बातों बातों में पूछा आप कि के चहरे पर वो मुस्कान नहीं दिखाई देती। उसने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही। मैंने उससे कहा - देखो मैं आपके दोस्त की तरह हूँ, आप मुझे बताओ कि क्या मैं आपकी कुछ हेल्प कर सकता हूँ। उसने कहा ऐसी कोई बात नहीँ। फ़िर दुबारा उससे पूछा तब उसने कहा कि वो मुझे डांटते रहते हैं और ठीक से प्यार भी नहीं करते। मैंने कहा मैं जानता था कि यही बात होगी। अब आप साफ साफ बताओ कि क्या वो आपको वो ख़ुशी पूरी तरह नहीं दे पाते। फ़िर वो रोने लगी और कहा कि क्या बताऊं वो ठीक तरह से नहीं कर पाते।

मैने कहा कि आज कल ऐसी बहुत सी औरतें है जिनके साथ यह प्रॉब्लम है पर वो तो ऐसे नही रोंती। तो तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं। मैने कहा मैं आपको वो प्यार दे सकता हूँ। वो चौंक गई, मैने कहा इसमें कोई बुराई नहीं है सभी ऐसे ही करती हैं। आप का कोई दोष नहीं। फ़िर मैंने कहा आप बे फ़िक्र हो जाइये किसी को कानो कान खबर नहीं होगी। उसने कहा ऐसा पोसिबल है? मैने कहा अगर आप चाहें तो मैं कोई धक्का तो नही कर रहा, मैं आपकी इज़ाज़त हो तो मैं वो प्यार दे सकता हूं जो मेरे साले ने देना था। देखो बाकी आपकी मरजी है मैं तो बस आपको खुश देखना चाहता हूं। आप चाहो तो मुझे रात को मिल सकती है। तो वो कहने लगी- अगर किसी को को पता चल गया तो?

मैने कहा हम कोई पागल थोडी ना हैं। मर्यादा में तो हमे ही रहना पडेगा। उसने मुसकरा दिया ओर रूम से बाहर आ गई। रात को मैं रूम में वेट कर रहा था। वो ११:३० बजे आई। आते ही मुझसे लिपट गई। मैं उसे बेसबरी से चूम रहा था। वो भी मुझे चूमती हुए कह रही थी इतने दिन पहले क्यों नही मिले। मैंने मेरा हाथ उसके बूब्स पर सरकाया और हलके से दबाया, उसके बूब्स एकदम कड़क थे. फ़िर गाउन के ऊपर से निपल के साथ खेलने लगा तो वो और उत्तेजित हो गई और मुझे पागलो की तरह चूमने लगी, अब मैंने उसका गाउन उपर सरका के उसके बूब्स को नंगा कर दिया। मैं उसके बूब्स को बारी बारी से चूमने और चाटने लगा उसको बहुत मजा आ रहा था, एक हाथ से मैं बूब्स को दबा रहा था तभी दूसरा हाथ मैंने उसकी चूत की ओर बढाया।

उसकी चड्डी भीग चुकी थी इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो कितनी उत्तेजित थी और मजे लूट रही थी. अब मैं उसकी कलेटरिस से खेलने लगा. मैंने उसकी पैंटी को भी हटा दिया अब वो एकदम नंगी थी, उसने मेरे सारे कपडे उतार दिये और मेरे लंड को हाथ से मसलने लगी. मैंने अपना मुहं उसकी चूत पर रख दिया, उसकी चूत से एक अजीब सी सुगंध आ रही थी. चूत टेनिस बोल की तरह फूली हुई थी जो क्लीन शेव्ड थी. मैं उसी चूत को चाटने लगा और साथ में उसके बूब्स को भी मसलने लगा। अब वो खुशी के मारे हल्के से बोल रही थी.... साम. मुझे बहुत मजा आ रहा है, चूसो मेरी चूत को......आ.आ..आआया.आआआआआअ..आआआ..उ.ऊउऊ.ऊ.ईई.ऊई..ऊई आह आआह्ह्छ .......साम ...मुझसे और इंतजार नही हो सकता प्लीज़ मुझे चोदो....प्लीज़ फक मी.

मैं भी तैयार था, उसने दोनों पैर मेरे कंधो पर रख दिए। अब मैंने अपना ८" लंबा और ३.५" लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा तो वो गिड़गिड़ाने लगी प्लीज़ मुझे चोदो ना, मत तड़पाओ..अब मैंने अपने लंड का सुपाडा उसकी रसीली चूत के द्वार पे रख कर एक जोरदार धक्का लगाया........मर गई..निकालो....निकालो..मैं रुक गया और उसके बूब्स के साथ खेलने लगा, कुछ पल में वो अपनी गांड हिलाने लगी तो मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया लगभग ६" तक मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया. उसकी चूत से खून बहने लगा. सारी दीवारें टूट गई

. ...वो जोर जोर से चिल्लाने लगी, मैंने अपने होठं उसके होठं पर रख दिए और एक धक्का मारा इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया.....वो दर्द के मारे तड़पने लगी ...मैं थोडी देर उसके बूब्स को धीरे धीरे दबाता रहा और उसे चूमता रहा। २ मिनिट बाद उसने थोडी राहत महसूस की तो अपने कुल्हे उठाने लगी। अब मैंने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर -बाहर करने लगा. अब वो अपनी स्पीड बढाती जा रही थी. करीब १० मिनिट बाद उसका शरीर तंग हो गया ...वो झड़ गई...अब पूरा कमरा फचक फचाक ..फचक की आवाज से गूंज रहता.....साथ में अमिता की सिस्कारियां आ..आया..या.य्य्य्य्य्य्य.ओह..या..या.....ऊऊऊउईईईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब मैंने भी स्पीड बढाई ....मेरा लंड चूत में इंजन के पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था......अब मेरी बारी थी सांसे एकदम तेज हो गई। दोनों पसीने से तर हो रहे थे.

हम अपनी मस्ती में सारी दुनिया भूल चुके थे। वो बहुत खुश थी। मैने जमकर ४५ मिनट तक चुदाई की। वो बोली - आज मैने असली सुहागरात मनाई है। शादी के बाद आज पहली बार सेक्स की प्यास बुझी है। चुदाई करते समय उसने बताया कि जीजाजी आपका लन्ड मेरे पति से बड़ा और मोटा भी है। अब पूरी रात में हमने ६-७ बार सेक्स किया। वो पूरी तरह तृप्त हो गई थी। उसने कहा कि मुझे सही मायनो में सेक्स का मतलब पता लगा है। फ़िर हमने इसके बाद सोमवार रात को ८-१० बार सेक्स किया। उसने कहा - आज मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इस बार प्रेगनैन्ट हो जाउंगी और ऐसा ही हुआ।

अगली सुबह मैं ससुराल से वापिस आ गया

Sunday, September 21, 2008

मस्ती भरे दिनों की कहानी

नाम राज शर्मा मेरा पहला सेक्षुयल एक्स्प 6 साल पहले अक कपल(क्प्ल) केसाथ ही हुआ था. मैं उनके घर मैं पेइंग गेस्ट था. तभी से मुझेसिर्फ़ थ्री सम यानी 2 माले 1 फीमेल मैं ही मज़ा आता है. मैं अब तक4 क्प्ल से मिल चुका हू. लेकिन कई दीनो से मेरी कोई क्प्ल से मुलाकात नहिहुई थी मैने नेट की मदद ली. मैने कई लोगो को मैल किया और कईमाला, उसका पति ओर मैं मेरा पहला सेक्षुयल एक्स्प 6 साल पहले अक कपल(क्प्ल) केसाथ ही हुआ था. मैं उनके घर मैं पेइंग गेस्ट था. तभी से मुझेसिर्फ़ थ्री सम यानी 2 माले 1 फीमेल मैं ही मज़ा आता है. मैं अब तक4 क्प्ल से मिल चुका हू. लेकिन कई दीनो से मेरी कोई क्प्ल से मुलाकात नहिहुई थी मैने नेट की मदद ली. मैने कई लोगो को मैल किया और कई सितस्पर अपना आड़ दिया. जल्दी ही मएरए पास अक क्प्ल का मैल आया. वो क्प्ल शिमलाका था. उसने मुझ से मेरा सेल नो माँगा मैने दे दिया. जल्दी ही हुसबंदका फोन आया उसका नाम अमित था. उसकी आगे 32 य्र थी और उसकी वाइफ की 30. उसकी इच्छा थी की कोई उसकी वाइफ को उसके साथ मिल कर छोड़े. वो अपनिवीफे को भी इस बात के लिए तैय्यर कर चुका था. अमित और मैं अक्सरफ़ोने पर बात करने लगे लेकिन वो शिमला मैं रहते थे और मैं देल्हीमान. अक दिन अमित काम से देल्ही आया तब मैं उस से पहली बार Mइलऽमित साथ मैं अपनी वाइफ "माला" का फोटो भी लाया था. मैने जब वॉफोटो देखा तो मैं पागल हो गया. वो ग़ज़ब की खूबसूरत लड़की थी. अमिटने बताया की माला की हिगत 5.7 है और उसका फिग है 38, 28, 38. वोआक्दूम गोरी थी. अमित भी काफ़ी स्मार्ट था. अमित से मिलने और माला काफोटो देखने के बाद मेरा इंटरेस्ट उनसे मिलने मैं और बाद गया. बास्दिक्कत ये थी की वो शिमला मैं थे और मैं देल्ही मैं, मैं बॅंक मैंकाम करता हू मुझे छुट्टी नही मिल रही थी. अमित ने अक दिन मेरी मालसे फोन पर बात करवाई. जल्दी ही हम काफ़ी खुल गये. कई बार तो हुंतीनो फोन पर ही सेक्सी बातें कर के ग्रूप सेक्स करने लगे. माला की सबसे अच्छी बात ये थी वो बहुत ओपन थी. वो खुल कर रॉ वर्ड्स यानी छूट,लॅंड और गंद बोलती थी. जब हम दोनो सेक्सी बात करते तो अमित उसेस्पेअकर फोन पर सुन कर मज़ा लेता था. मैं माला सेर मिलने को बेकरआरहो रहा था तो अमित और माला मुझसे कर हाल मैं जल्दी मिलना छाते ठेऽमित ने तय किया की वो माला को लेकर देल्ही आएगा और हम मिलेंगे. मैइनेउनके लिए देल्ही मैं अक शानदार होटेल बुक कर दिया. माला और अमित बुससे देल्ही पहुचे. मैं उन्हे लेने बस स्टॅंड पहुचा. कैसे ही मैने मललो देखा मेरे तो सिर घूम गया. वो क्या चीज़ थी. उसके आँखें ब्लू थे,बॉल कंधे तक थे और रंग गोरा. उसके होंठ थोड़े दे मोटे थे जो बहुतसेक्शय लगते है. वो टॉप और जीन्स पहनी थी. टॉप डीप नेके था उसमे सेउसके 38 साइज़ बूब्स कुछ कुछ नज़र आ रहे थे. सबसे शानदार थे उसक्िनिक्ली हुई गांद. खैर, मैं अमित और माला को अपनी कार मैं लेकर होतेल्पहुचा. रूम शानदार था. शाम के 6 बाज रहे थे. माला फ्रेश होने केलिए चली गई. अमित और मुझे इस मौके की तलाश थी, हमे प्लानिंग्कर्णी शुरू कर डी. अमित ने कहा की वो चाहता की माला को स्लट यानिरंडी की तरह हम दोनो उसे करे. उसका कहना था की ज़्यादा दारू पी केमला रंडी जैसे हो जाती है. मैं भी यही चाहता था. तभी मलबहार आ गई. उसने टाइट और तोड़ा सा लोंग स्कर्ट और टॉप पहन रखता. स्कृत की साइड मैं अक बड़ा सा कट था, जिस से उसके मक्खन की तरहचिकने पैर दिखाई दे रहे थे. अमित ने बताया था की माला और उसका किसीतीसरे के साथ यानी ग्रूप सेक्स का पहला चान्स है इसलिए बिना दरुपीए माला के लिए बहुत मुश्किल होगा. यह बात मैं भी जनता था क्िउसे खुल कर छोड़ने के लिए माला को खूब दारू पिलानी होगी. मैने रूमसेरविसे को फोन किया और अपने और अमित के लिए विस्की का ऑर्डर डीयओर माला से पूछा की वो क्या पीएगी तो उसने बियर के लिए कहा. मैनेमज़ाक मैं कहा की क्या बच्चो का ड्रिंक पीटी हो. असल मैं मैं उसे हरदड्रिंक पिलाना चाहता था जिस से उसजो अच्छा नशा हो जाए और वो रंडी कीतारह बेड पर मज़ा दे. माला मेरी बात सुन कर बोली " अच्छा वोड्का पीलूनगी"... बार बार डिस्टर्ब ना हो इसलिए मैं दारू की फुल बॉटल काओर्दर दिया. दारू आ चुकी थी और हम तीनो पीने मैं जुट गये ठेंअल और अमित अपने सेक्स के किससे बता रहे थे और मैं उन्हे अपने गरौपसेक्श के किससे सुना रहा था. 2-2 पेग हो चुके थे फिर भी सिर्फ़ अभी ताकबतें हो रही थी. मैने माला ले चिकने पैर पर अपना पैर टच करणाचाहा तो भी माला ने कोई रेस्पोंडे नही दिया. तभी माला लू ले लिएगई तो अमित बोला " साली माला रंडी को अभी तक दारू छड़ी नही है,नही तो अभी तक तो साली कुटिया नंगी हो कर हम डोड़नो के लॅंड चूसनेलगती".. अपनी पत्नी के लिए पति के मूह से ऐसी बातें सुन कर मेरा भीलंद खड़ा हो गया. अमित ने कहा की माला रंडी को बड़े-बड़े पेग बनाकर देते है. माला को दो दो लॅंड से छोड़ने का हमारा प्लान तैय्यर ठंअल आ चुकी थी. मैने और अमित ने उसको बड़े बड़े पग बना कर देशुरू कर दिए. 2 पग के बाद ही माला को दारू चाड गई. अमित माला केपास बैठा था. उसने माला को किस करना शुरू कर दिया और उसके हात्माला के बूब्स को रग़ाद रहे थे. मैने पास के सोफा पर बैठा था,मैने भी अपना हाथ माला की जाँघ पर रख दिया. अमित ने अपनी जीभमाला के मूह मैं दल दी. माला उसकी जीभ को चूसने लगी. मैं नीचेबाइठ गया और मैने उसके स्कर्ट को उपर उठा दिया. उसके चिकनी,मक्खंजाइसी जंघे देख कर मेरा लॅंड पूरी तरह खड़ा हो गया. मैने अपनिजीभ से उसकी जाँघो को चाटना शुरू कर दिया. अमित ने उसके टॉप को उत्ारदिया और उसके बूब्स पर किस करने लगा. मुझे जोश आ गया मैने मालकी स्कर्ट खिच दी साथ मैं उसकी पनटी भी सरक गई. माला अब पूरिणांगी थी. उसके 38 साइज़ बूब्स के साथ अमित लगा पड़ा था. माला ने मेरेबाल पकड़ कर मुझे भी उपर उठा लिया. अब मेरे और अमित के बीच माळबैठी थी मैने उसके रिघ्त बूब्स पर अपना हाथ रख दिया और अमित उस्केलेफ्ट बूब्स को चूसने लगा. माला ने मेरा सिर पकड़ कर अपने रिघ्त बूब्पर रख दिया. मैं उसका इशारा समझ गया और उसके बूब को चाटनेलागा. फिर जब वो सिसकारिया भरने लगी तो मैने उसका गुलाबी निप्पल अपनेमूः मैं भर लिया. माला बोली "क्या मज़ा आ रहा है सालो और ज़ोर सेचुसो" ये सुन कर मुझे और अमित को जोश आ गया हमने और बुरी तरह सेउसके मखमली बूब्स को चूसना शुरू कर दिया. अमित ने तो उसके बूब कॉकाट भी लिया. वो चिल्लई " हरजदे खा जाएगा क्या, मुझे दर्द हो रहहै" गली सुन कर मैने भी उसके बूब पर दाँत गाड़ा दिए वो फिर बोली "तू भी साले हरामी है, मेरा पति तेरे सामने मुझे नंगा कर रहा है टॉकया तू मुझे अपने बाप का माल समझ बैठा है. चाटना है तो मेरिचूत को छत" मैने तत्काल उसकी छूट पर कब्जा कर लिया वो टाँगे फैलाकर बैठ गई और मैने अपना मूह उसकी छूट पर लगा दिया. मेरी जीभ अबुस्की छूट को कुरेड रही थी. माला बोली "साले पूरी जीभ अंदर डाल देवर मज़ा आएगा" मैने कहा बाद पर चलो. अमित भी यही चाहता ठंआल उठी और लड़खड़ाती हुई बाद पर जाने लगी. उसकी गंद की थिरकनदेख कर मैं हिल गया. मैने पहली बार उसकी नंगी गांद देखी ठिऽक्दम गोरी और भारी भारी सी. वो बाद पर टाँगे फैला कर लेट गई. मैनेपहले उसकी छूट पर चाटना शुरू किया. और फिर अपनी जीभ की नोक उसकिसकी छूट मैं डाल दी. अमित उसके बूब्स चूसने मैं लगा था. वो अमित सेबोली " देख मदारचोड़ छूट ऐसे छाती जाती है, कुछ सिख इस से" अमित नेमुझे देखा तो वो भी छूट के करीब आ गया. छूट पर मेरा क़ब्ज़ा था तौसने माला को करवट दिलवा दी और उसकी गंद के छेड़ मैं मूह लगा डियंआल पागल हो गई " मेरे दोनो छेड़ो को खूब चतो, प्ल्ज़ इसे थूक से भर्डो, मेरी गंद मैं सुर सूरी हो रही है" मेरी इच्छा हुई की मैं उसकीगंद का ओरल कैसे हो रहा है देखो. मैने देखा की अमित ने दोनो हाथोसे उसकी गंद को फैला दिया है और उसके गुलाबी छेड़ मैं जीभ की नोक सेकुरेड रहा है. उसके बॉल पूरी तरह सॉफ थे. मुझे जोश आ गया ओर्मैने माला की गुदगुदी गंद पर दाँत गाड़ने लगा तो वो चिल्लई "हरम्जदे..क्य कुत्ते की तरह काट रहा है" अमित ने बोला " मदारचोड़बहुत बोल रही है इसके मूह मैं अपना लॅंड दे दे, साली कुटिया तभी चुफोगी" मैं उठा और अपना 6.5 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटे लॅंड को उसकेमूः मैं डालने लगा. माला मस्त हो गई. और ज़ोर ज़ोर से मेरा लॅंड चूसनेलागी. अमित अब उसकी छूट चाटने मैं लग गया. 5 मीं के बाद माला अपनेमूः से मेरा लॅंड निकाल के बोली " प्ल्ज़.. मुझे अब मत चतो. दो दो लंधई कोई अक तो मेरी छूट मैं डालो" अमित जैसे ही हटा वो हॉर्स पोज़ मैना गई. मैने अमित से की पहले वो छोड़े तो अमित बोला " डियर.. मैं इतनीदूर से अपनी बीवी तुम से छुड़वाने के लिए लाया हू, मैं तो इस रंडी कोरोज़ ही छोड़ता हू आज तुम छोड़ो, तुम्हारा लॅंड जाता हुया देख कर मुझेज्यदा मज़ा आएगा" माला डॉगी स्टाइल मैं थी मैं उसके पीछे आया तोअमिट ने मेरा लॅंड पकड़ कर उसकी छूट मैं लगाया तो अक झटके मैं मेरांदार चला गया. पूरी छूट मेरे और अमित की थूक से भारी उपर से मालका रस भी निकला हुआ था. मेरा लॅंड सता सात अंदर बाहर होने लगा. अमितागे पहुचा और उसने अपना लॅंड माला के मूह मैं डाल दिया. मैने मालके बॉल पकड़ लिए और उन्हे मुट्ठी मैं भर कर धक्के लगाने ळगऽइस लग रहा था की मैं हॉर्स राइडिंग कर रहा हू. मैं जैसे ही धक्कालगता अमित का पूरा लॅंड माला के हलाक मैं चला जाता. अमित को कूचनाःी करना पद रहा था. मेरे हर धाकी मैं उसे मज़ा आ रहा था. वोबोला " डियर और छोड़ साली इस रॅंड को ज़ोर से धक्के मार, साली को कुटियबाना बना के रग़ाद, साली को मैं आज पक्की रंडी बनाना चाहता हू" मैंलगातार धक्के मार रहा था. अब थोड़ी देर मैं अमित मुझ से बोला "डेआर्तुमने मेरी बीवी को बहुत छोड़ लिया प्ल्ज़ अब मुझे इसकी छूट मैं अपना लंदडालने दो" मुझे बड़ा अच्छा लगा की बीवी अमित की है और वो मुझ सेपेरमिससिओं माँग रहा है. मैं वाहा से हट गया. अमित नीचे लेता ओरमाला को उसने अपने उपर बैठा लिया. माअला उसके लॅंड पर ज़ोर ज़ोर सेउचालने लगी. अमित भी नीचे से स्ट्रोक लगा रहा था. मैने बाद परखड़ा हुआ और अपने लॅंड को माला के मूह मैं पेलने लगा. अमित ने मुझ सेपूचा " डियर मज़ा आ रहा है की नही" मैने कहा की मूह से ज़्यादा चुटके छेड़ मैं मज़ा आ रहा था. वो बोला " कोई बात नही साली के पास्दूसरा छेड़ भी है" उसने उसकी गंद को दोनो हाथो से फैला कर कहा " इस्छेद मैं मैने भी कभी लॅंड नही डाला आज तू अपना लॅंड इसकी गंद मैंडाल दे, साली को जब रंडी ही बनाना है तो पूर तरह से बनाते है"माला दर गई वो बोली " प्ल्ज़ मेरी गंद मत मारना मुझे बहुत दर्द होगा,मैं रात भर तुम जैसे कहोगे छुओौनगी लेकिन मेरी गंद मत मरो" मैंटो उसकी गंद देख कर पहले पागल हो चुका था अपने आप को रोकना मुश्कीलटा मैने उसे कहा की अगर दर्द होगा तो मैं अपना लॅंड हटा लूँगा. मैइनेसंझाया तो वो मान गई और बोली " बस अक पग वोड्का और दे दो, नशेमैन दर्द कम होगा. फिर भी तुम धीरे धीरे मेरी गंद मैं लॅंड डालना"मैने उसे पग बना के दिये. वो अमित के लॅंड पर बैठी बैठी सरगिलषस अक बार मैं खाली कर गई. माला जब दारू पी रही थी तो मैनेपास से क्रीम उठा कर ढेर सारी अपने लॅंड पर लगा ली. अमित माला कीगंद को फिर से फैला कर बोला " ऐसा भड़वा पति कही नही मिलेगा ज्ोआप्नी वाइफ की छूट के साथ गंद भी किसी और से मरवा रहा है. डाल सलिकी गांद मैं" मैने अपना लॅंड माला की गंद के छेड़ पर लगाया और सतही वाहा थूक भी दियाया. पहले ही झटके मैं मेरा सुपरा अंदर चलगाया. माला बोली " प्ल्ज़ रुक जाओ दर्द हो रहा है" मैं रुक गया लेकिनामित को तो दारू चाड चुकी थी उसे कुछ समझ नही आ रहा था. वो टोबस अपनी बीवी की गंद मरवाना चाहता था. उसने नीचे से ज़ोर से झटकड़िया मेरा आधा लॅंड माला की गंद मैं घुस गया. माला दर्द सेचिल्लाने लगी " प्ल्ज़ मुझे छोड़ दो मैं मार जौंगी" मैने उसे कहा कीचिन्ता मत करो मैं अपना लॅंड और नही डालूँगा. बस तुम साथ दो. वैिसेभी मैं और ज़्यादा उसकी गंद मैं अपना लॅंड नही डाल सकता था क्योकिसकी छूट मैं पहले से ही लॅंड था जिस से गंद का छेड़ भी टाइट होगआया था. मैं अब धक्के लगा रा था और नीचे से अमित उसकी छूट को पलराहा था. थोड़ी ही देर मैं मेरे और अमित के बीच सही को-ऑर्डिनेशन होगआया. हम डोड़नो के धक्के अक साथ पड़ने लगे. माला मस्त हुई जा रही तिउसकी छूट मैं पूरा लॅंड था तो गंद मैं आधा. वो ज़ोर से बोली " अमित इलोवे उ .. उ र थे बेस्ट हज़्बेंड इन तीस वोरला.. ओह आह.. उ गिव मे आ निसेसटूड.. क्या लॅंड ढूँढा है मेरे लिए .. अक सता दो लॅंड लेने की तमन्नाअज तुमने पूरी कर दी... और ज़ोर से छोड़ो.. मेरी छूट और गंद दोनो केछेड़ो को फाड़ दो...." 10 मीं तक मैं और अमित माला को रगड़ते ऱहेंआअल अब तक चुकी थी वो बोली " प्ल्ज़ अब मुझे और मत छोड़ो, मेरी चूटौऊर गंद चील गई है.. मैं तक गई हू दर्द हो रहा है. मेरे मूह मैंडे दो मैं चूस चूस कर तुम दोनो का निकल दूँगी... कहोगे तो स्पर्म भिपी लूँगी.. बस मेरे दोनो छेड़ो से लॅंड निकल लो" अमित बोला " भाई यरंडी तो तक गई तू क्या बोलता है? जैसा तू कहेगा वही होगा, यव रंदीहैई और तू इसका कुस्टमर" मैने कहा इसके मूह मैं देते है. हम दोनो नेलांद निकल लिए माला नीचे बैठ गई अब वो बरी बरी से हम दोनो केलंद चूसने लगी. जब वो अमित का लॅंड चुस्ती तो मेरे लॅंड को हाथ सेपकड़ कर हिलती. जल्दी मेरा लॅंड उसके मूह मैं झाड़ गया. मैने सरस्पेरं उसके मूह मैं दल दिया वो स्लट की तरह उसको पी भी गई. मेरलांद उसके मूह मैं ही था की अमित ने उसके चेहरे पर अपने लॅंड सेपिचकारी छोड़ दी. उसके हम बात लेने चले गये. फिर डिन्नर लिया. और 2बार फिर चुदाई का खेल खेला. माला ने नंगी होप कर डॅन्स भी दिखयओर खूब छूट और गंद मरवाई. सुबह वो दोनो शिमल निकल गये. अबलगभग हर दो मिहणे मैं हम मिलते है और खूब सेक्स करते है.

Monday, May 26, 2008

परिचय

1. रजस्राव चक्र/माहवारी चक्र
औरत के प्रजनन अंगों में होने वाले बदलावों के आवर्तन चक्र को माहवारी चक्र कहते हैं। यह हॉरमोन तन्त्र के नियन्त्रण में रहता है एवं प्रजनन के लिए जरूरी है। माहवारी चक्र की गिनती रूधिर स्राव के पहले दिन से की जाती है क्योंकि रजोधर्म प्रारम्भ का हॉरमोन चक्र से घनिष्ट तालमेल रहता है। माहवारी का रूधिर स्राव हर महीने में एक बार 28 से 32 दिनों के अन्तराल पर होता है। परन्तु महिलाओं को यह याद करना चाहिए कि माहवारी चक्र के किसी भी समय गर्भ होने की सम्भावना है।

2. माहवारी अवधि
जिस दौरान रूधिर स्राव होता रहता है उसे माहवारी अवधि/पीरियड कहते हैं।

3. माहवारी
दस से पन्द्रह साल की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक परिपक्व अण्डा या अण्डाणु पैदा करने लगता है। वह अण्डा डिम्बवाही थैली (फेलोपियन ट्यूब) में संचरण करता है जो कि अण्डाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है तो रक्त एवं तरल पदाथॅ से मिलकर उसका अस्तर गाढ़ा होने लगता है। यह तभी होता है जब कि अण्डा उपजाऊ हो, वह बढ़ता है, अस्तर के अन्दर विकसित होकर बच्चा बन जाता है। गाढ़ा अस्तर उतर जाता है और वह माहवारी का रूधिर स्राव बन जाता है, जो कि योनि द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है।
4. अण्डकोश
अण्डकोश औरतों में पाया जाने वाला अण्ड-उत्पादक जनन अंग है। यह जोड़ी में होता है।
5. डिम्बवाही / अण्डवाही थैली
डिम्बवाही नलियां दो बहुत ही उत्कृष्ट कोटि की नलियां होती है जो कि अण्डकोश से गर्भाशय की ओर जाती है। अण्डाणु को अण्डकोश से गर्भाशय की ओर ले जाने के लिए ये रास्ता प्रदान करती है।
6. गर्भाशय
गर्भाशय एक खोकला मांसल अवयव है जो कि औरत के बस्तिप्रदेश में मूत्रशय और मलाशय के बीच स्थित होता है। अण्डाशय में उत्पन्न अण्डवाहक नलियों से संचरण करते हैं। अण्डाशय से निकलने के बाद गर्भाशय के अस्तर के भीतर वह उपजाऊ बन सकता है और अपने को स्थापित कर सकता है। गर्भाशाय का मुख्य कार्य है जन्म से पहले पनपते हुए भ्रूण का पोषण करना।
7. ग्रीवा
गर्भाशय के निचले छोर/किनारे को ग्रीवा कहते हैं। यह योनि के ऊपर है और लगभग एक इंच लम्बा होता है। ग्रीवापरक नलिका ग्रीवा के मध्य से गुजरती है जिससे कि माहवारी चक्र और भ्रूण गर्भाशय से योनि में जाते हैं वीर्य योनि से गर्भाशय में जाता है।
8. योनि
यह एक जनाना अंग है जो कि गर्भाशय और ग्रीवा को शरीर के बाहर से जोड़ता है। यह एक मांसल ट्यूब है जिसमें श्लेष्मा झिल्ली चढ़ी रहती है। यह मूत्रमार्ग और मलद्वार के वीच खुलती है योनि से रूधिरस्राव बाहर जाता है, यौन सम्भोग किया जाता है और यही वह मार्ग है जिससे बच्चे का जन्म होता है।
9. उर्वरकता
जब पिता का वीर्य और माता के अण्डाणु परस्पर मिलते हैं तो उसे उर्वरकता कहते हैं जब अण्डाणु डिम्बवाही मिलते हैं तो उसे उर्वरकता कहते हैं। जब अण्डाणु डिम्बवाही ट्यूब के अन्दर होते हैं तभी उर्वरक बनते हैं। यह यौन सम्भोग के परिणामस्वरूप होती है। बच्चे के जन्म के लिए अण्डे और वीर्य को मिलकर एक होने की जरूरत होती है। जब ऐसा होता है तभी महिला गर्भवती होती है।
10. यौन परक सम्बन्धों से होने वाले संक्रमण रोग
यौनपरक सम्बन्धों से होने वाले संक्रमण रोग वे होते हैं जो कि एक व्यक्ति से दूसरे तक अवैध यौन सम्पर्क से पहुंचते है जैसे कि यौनपरक सम्भोग, मौखिक सेक्स और गुदा सम्बन्धी सेक्स। इन संक्रमण रोगों के लक्षण निम्नलिखित हैं (1) महिला की योनि में खुजली और/अथवा योनि से स्राव (2) पुरूष के लिंग से स्राव (3) सेक्स करते हुए या मूत्र त्याग के समय दर्द (4) जननांग क्षेत्र में बिना दर्द वाले लाल जख्म (5) गुदापरक सेक्स करने वाला के मलद्वार के भीतर और आसपास पीड़ा (6) असामान्य संक्रामक रोग, बिना कारण थकावट रात्रि में बिस्तर गीला होना और वजन घटना।


11. एच. आई. वी / एड्स
एड्स का अभिप्राय है उपार्जित असंक्रामक न्यूनता संलक्षण। संक्रमणों के विरूद्ध ढाल स्वरूप-शरीर के असंक्रामक तन्त्र पर जब मानवी असंक्रामक न्यूनता के जीवाणू (एच. आई. वी) प्रहार करते हैं तब एड्स के रोग से ग्रस्त लोग घातक संक्रामक रोगों और कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं। एच. आई. वी. से संक्रमित किसी व्यक्ति के वीर्य योनि से निःसृत शलेएमा या रक्त का जब किसी अन्य व्यक्ति से आदान-प्रदान होता है तब एच. आई. वी. फैलता है। यह यौन सम्भोग दूसरे से इंजैक्शन की सुई बांटने से होता है या एच. आई. वी. से प्रभावित जन्म के समय उसके बच्चे को संक्रमित होता है।
12. लिंग
यह मर्दाना अवयव है जो कि मूत्रत्याग तथा सम्भोग के काम आता है। यह स्पॉनजी टिशु और रक्त वाहिकाओं का बना होता है।
13. शुक्रवाहिका
शुक्रवाहिका वे नलियां है जो कि वीर्य को शुक्राशय में ले जाती है, जहां कि लिंग द्वारा बाहर निकालने से पूर्व वीर्य को संचित करके रखा जाता है।


14. अण्डकोश
अण्डकोश वह छोटी सी थैली है जिसमें अण्डग्रन्थि (मर्दाना जनन अवयव) होते हैं। यह लिंग के पीछे रहते हैं।


15. अण्डाशय-रस (इस्ट्रॅजन)
अण्डाशय रस महिला अण्डकोश से पैदा होने वाला वह हॉरमोन है जो उसमें यौनपरक विकास करता है। यौवनारम्भ में महिला के व्यक्तित्व में अप्रत्यक्ष रूप से यौनपरक प्रवृतियों की उत्पत्ति को बढ़ावा देता है, अण्डाणुओं की उत्पत्ति को प्रोत्साहित करता है और गर्भधारण के लिए गर्भाशय के अस्तर को तैयार करता है।


16. प्रोजेस्टॅरोन
स्त्रियों के अण्डकोष से उत्पन्न वह हॉरमोन है जिससे माहवारी चक्र चलता है और जिससे गर्भधारण होता है।.


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यौवनारम्भ


1 यौवनारम्भ क्या होता है?यौवनारम्भ वह समय है जबकि शरीरपरक एवं यौनपरक लक्षण विकसमत हो जाते हैं। हॉरमोन मे बदलाव के कारण ऐसा होता है। ये बदलाव आप को प्रजनन के योग्य बनाते हैं।
2. यौवनासम्भ का समय कौन सा है?हर किसी में यह अलग समय पर शुरू होता है और अलग अवधि तक रहता है। यह जल्दी से जल्दी 9 वर्ष और अधिक से अधिक 13-14 वर्ष की आयु तक प्रारम्भ हो जाता है। यौवन विकास की यह कड़ी सामान्यतः 2 से 5 वर्ष तक की होती है। कुछ किशोरियों में दूसरी हम उमर लड़कियों में यौवन के शुरू होने से पहले यौवन विकास पूरा भी हो जाता है।
3. लड़कों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?यौवनारम्भ के समय सामान्यतः लड़के अपने में पहले की अपेक्षा बढ़ने की तीव्रगति को महसूस करते हैं, विशेषकर लम्बाई में। कन्धों की चौड़ाई भी बढ़ जाती है। 'टैस्टोस्ट्रोन' के प्रभाव से उनके शरीस में नई मांसलता और इकहरेपन की आकृति बन जाती है। उनके लिंग में वृद्धि होती है और अण्डकोष की त्वचा लाल-लाल हो जाती है एवं मुड़ जाती है। आवाज गहरी हो जाती है, हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे होती है फिर भी कोई आवाज फटने जैसा अनुभव कर सकता है। यह स्वाभाविक और प्राकृतिक है, इसमें चिन्ता की कोई बात नहीं होती। लिंग के आसपास बाल, दाड़ी और भुजाओं के नीचे बाल दिखने लगते हैं और बढ़ने लगते हैं। रात्रिकालीन निष्कासन (स्वप्नदोष या ^भीगे सपने') सामान्य बात है। त्वचा तैल प्रधान हो जाती है जिससे मुहासे हो जाते हैं।
4. लड़कियों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?शरीर की लम्बाई और नितम्बों का आकार बढ़ जाता है। जननेन्द्रिय के आसपास, बाहों के नीचे और स्तनों के आसपास बाल दिखने लगते हैं। शुरू में बाल नरम होते हैं पर बढ़ते- बढ़ते कड़े हो जाते हैं। लड़की का रजोधर्म या माहवारी शुरू हो जाती है जो कि योनि में होने वाला मासिक रक्तस्राव होता है, यह पांच दिन तक चलता है, जनन तंत्रपर हॉरमोन के प्रभाव से ऐसा होता है। त्वचा तैलीय हो जाती है जिससे मुंहासे निकल आते हैं।
5. यौवनारम्भ के दौरान स्तनों में क्या बदलाव आता है?स्तनों का विकास होता है और इस्ट्रोजन नामक स्त्री हॉरमोन के प्रभाव से बढ़ी हुई चर्बी के वहां एकत्रित हो जाने से स्तन बड़े हो जाते हैं।
6. यौवनारम्भ के परिणाम स्वरूप औरत के प्रजनन अंगों में क्या बदलाव आता है?जैसे ही लड़की के शरीर में यौवनारम्भ की प्रक्रिया शुरू होती है, ऐसे विशिष्ट हॉरमोन निकलते हैं जो कि शरीर के अन्दर के जनन अंगों में बदलाव ले आते हैं। योनि पहले की अपेक्षा गहरी हो जाती है और कभी कभी लड़कियों को अपनी जांघिया (पैन्टी) पर कुछ गीला- गीला महसूस हो सकता है जिसे कि यौनिक स्राव कहा जाता है। स्राव का रंग या तो बिना की जरूरत नहीं। गर्भाषय लम्बा हो जाता है और गर्भाषय का अस्तर घना हो जाता है। अण्डकोष बढ़ जाते हैं और उसमें अण्डे के अणु उगने शुरू हो जाते हैं और हर महीने होने वाली 'अण्डोत्सर्ग' की विशेष घटना की तैयारी में विकसित होने लगते हैं।
7. अण्डकोत्सर्ग क्या है?एक अण्डकोष से निकलने वाले अण्डे के अणु को अण्डोत्सर्ग कहते हैं। औरत के माहवारी चक्र के मध्य के आसपास महीने में लगभग एक बार यह घटना घटती है। निकलने के बाद, अण्डा अण्डवाही नली में जाता है और वहां से फिर गर्भाषय तक पहुंचने की चार-पांच दिन तक की यात्रा शुरू करता है। अण्डवाही नली लगभग पांच इंच लम्बी है और बहुत ही तंग है इसलिए यह यात्रा बहुत धीमी होती है। अण्ड का अणु प्रतिदिन लगभग एक इंच आगे बढ़ता है।
8. उर्वरण क्या है?यौन सम्भोग के परिणामस्वरूप जब पिता के वीर्य का अणु मां के अण्ड अणु से जा मिलता है तो उसे उर्वरण कहते हैं। जब वह अण्ड अणु अण्डवाही नली में होता है तभी यह उर्वरण घटित होता है। शिशु के सृजन के लिए अण्डे और वीर्य का मिलना और जुड़ना जरूरी है। जब ऐसा होता है, तब और गर्भवती हो जाती है।
9. रजोधर्म/माहवारी क्या है?10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।
10. माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।
11. मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।
12. माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।
13. सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।
14. पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)
15. पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।
16. पैड को कैसे फेंकना चाहिए?पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं।
17. मुंहासे से क्या होता है?मुंहासे - त्वचा की एक स्थिति है जो सफेद, काले और जलने वाले लाल दाग के रूप मे दिखते हैं। जब त्वचा पर के ये छोटे - छोटे छिद्र बन्द हो जाते हैं तब मुंहासे होते हैं। सामान्यतः हमारी तैलीय ग्रन्थियां त्वचा में चिकनापन बनाए रखती है और त्वचा के पुराने अणुओं को निकालने में मदद देती है। किशोरावस्था में वे ग्रन्थियां बहुत अधिक तेल पैदा करती हैं जिससे कि छिद्र बन्द हो जाते हैं, कीटाणु कचरा और गन्दगी जमा हो जाती है जिससे काले मस्से और मुंहासे पैदा होते हैं।
18. मुहांसों के प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है?मुंहासों के प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित स्व- उपचार की प्रक्रिया को अपनाये- (1) हल्के, शुष्कताविहीन साबुन से त्वचा को कोमलता से धोयें (2) सारी गन्दगी अथवा मेकअप को धो दें, ताजे पानी से दिन में एक दो बार धोयें, जिसमें व्यायाम के बाद का धोना भी शामिल है। जो भी हो, त्वाचा को बार-बार धोने या ज्यादा धोने से परहेज करें। (3) बालों को रोज शैम्पू करें, खासतौर पर अगर वे तेलीय हों। कंघी करें या चेहरे से बालों को हटाने के लिए उन्हें पीछे खीचें। बालों को कसने वाले साधनों से परहेज करें। (4) मुंहासों को दबानेर, फोड़ने या रगड़ने से बचने का प्रयास करें। (5) हाथ या अंगुलियों से चेहरो को छूने से परहेज करें। (6) स्नेहयुक्त प्रसाधनों या क्रीमों का परहेज करें। (7) अब भी अगर मुंहासे तंग करें, डाक्टर आपको और अधिक प्रभावशाली दवा दे सकता है या अन्य विकल्पों पर विचार विमर्श कर सकता है।

औरतों और पुरूषों में जनन तंत्र


1. औरतों का जनन तंत्र कैसा होता है?औरतों के जनन तंत्र में बाहरी (जननेन्द्रिय) और आन्तरिक ढाँचा होता है। बाहरी ढॉचे में मूत्राषय (वल्वा) और यौनि होती है। आन्तरिक ढांचे में गर्भाषय, अण्डाषय और ग्रीवा होती है।
2. बाहरी ढांचे के क्या मुख्य लक्षण होते हैं?बाहरी ढांचे में मूत्राषय (वल्वा) और योनि है। मूत्राषय (वल्वा) बाहर से दिखाई देने वाला अंश है जबकि योनि एक मांसल नली है जो कि गर्भाषय और ग्रीवा को शरीर के बाहरी भाग से जोड़ती है। ओनि से ही मासिक धर्म का सक्त स्राव होता है और यौनपरक सम्भोग के काम आती है, जिससे बच्चे का जन्म होता है।
3 आन्तरिक ढांचे के क्या मुख्य लक्षण हैं?आन्तरिक ढांचे में गर्भाषय, अण्डाषय और ग्रीवा है। गर्भाषय जिसे सामान्यत% कोख भी कहा जाता है, उदर के निचले भाग में स्थित खोखला मांसल अवयव है। गर्भाषय का मुख्य कार्य जन्म से पूर्व बढ़ते बच्चे का पोषण करना है। ग्रीवा गर्भाषय का निचला किनारा है। योनि के ऊपर स्थित है और लगभग एक इंच लम्बी है। ग्रीवा से रजोधर्म का रक्तस्राव होता है और जन्म के समय बच्चे के बाहर आने का यह मार्ग है। यह वीर्य के लिए योनि से अण्डाषय की ओर ऊपर जाने का रास्ता भी है। अण्डाषय वह अवयव है जिस में अण्डा उत्पन्न होता है, यह गर्भाषय की नली (जिन्हें अण्वाही नली भी कहते हैं) के अन्त में स्थित रहता है।
4 पुरूषों का जनन तंत्र कैसा होता है?पुरूषों के जनन तंत्र में बाहर दिखाई देने वाला ढांचा होता है जिसमें लिंग और पुरूषों के अण्डकोष हैं। आन्तरिक ढांचे में अण्डग्रन्थि, शुक्रवाहिका, प्रास्टेट, एपिडिडाईमस और शुक्राषय होता है।
5 बाहरी ढांचे के मुख्य लक्षण क्या हैं?लिंग मर्दाना अवयव है जिसका उपयोग मूत्रत्याग एवं यौनपरक सम्भोग के लिए किया जाता है यह लचीले टिशू और रक्तवाहिकाओं से बना है। अण्डकोष में लिंग दोनों ओर स्थित बाहरी थैलियों की जोड़ी होती है जिसमें अण्डग्रन्थि होती है।
6 आन्तरिक ढांचे के मुख्य लक्षण क्या हैं?आन्तरिक ढांचे में अण्डग्रन्थि, शुक्रवाहिका, एपिडिडाईमस और शुक्राषय होता है। अण्डग्रन्थि अण्डाषय में स्थित अण्डाकार आकृति के दो मर्दाना जननपरक अवयव है। इनसे वीर्य और टैस्टोस्ट्रोन नामक हॉरमोन उत्पन्न होते हैं। पूर्ण परिपक्वता प्राप्त करने तक वीर्य एपिडाइमस में संचित रहता है। शुक्रवाहिका वे नलियां हैं जो कि वीर्य को शुक्राषय तक ले जाती हैं जहां पर लिंग द्वार से बाहर निष्कासित करने से पहले वीर्य को संचित किया जाता है। प्रॉस्टेट पुरूषों की यौन ग्रन्थि होती है। यह लगभग एक अखरोट के माप का होता है जो कि ब्लैडर और युरेषरा के गले को घेरे रहता है- युरेथरा वह नली है जो ब्लैडर से मूत्र ले जाती है। प्रॉस्टेट ग्रन्थि से हल्का सा खारा तरल पदार्थ निकलता है जो कि शुक्रीय तरल का अंश होता है जिस तरल पदार्थ मे वीर्य / शुक्राणु रहता है।

पुरूषों में जनन स्वास्थ्य की समस्य़ाएं


हस्तमैथुन क्या होता है?यौनपरक संवेदना के लिए जब व्यक्ति स्वयं उत्तेजना जगाता है तब उसे हस्तमैथुन कहा जाता है। हस्तमैथुन शब्द के प्रयोग से सामान्यतः यही समझा जाता है कि वह स्त्री या वह पुरूष जो कामोन्माद की चरमसीमा का तीव्र आनन्द पाने के लिए अपनी जननेन्द्रियों से छेड़छाड़ करता है। चरमसीमा का अभिप्राय उस परम उत्तेजना की स्थिति से है जिसेमें जननेन्द्रिय की मांस पेशयां चरम आनन्द देने वाली अंगलीला की कड़ी में प्रवेश करती हैं।
क्या हस्तमैथुन सामान्य बात है?हां, हस्तमैथुन प्राकृतिक आत्म अन्वेषण की स्वभाविक प्रक्रिया और यौन भावाभिव्यक्ति है।
क्या यह सत्य है कि हस्तमैथुन 'सही सम्भोग' नहीं है। और केवल असफल लोग हस्तमैथुन करते हैं?नहीं, यह सत्य नहीं है। कुछ यौन विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग हस्थमैथुन करते हैं वे साथी के साथ यौन - सम्भोग करते समय बेहतर कार्य करतें हैं क्योंकि अपने शरीर को जानते हैं और उनकी कामाभिव्यक्ति सन्तुष्ट होती है।
क्या हस्तमैथुन से विकास रूक जाता है या गंजापन उम्र से पहले आ जाता है।यह सही नहीं है।
खड़पान किसे कहते हैं?खड़ेपन का अभिप्राय लिंग के बढ़ने, सख्त होने और उठने से हैं।
खड़पन क्यों होता है?स्वभावतः पुरूषों में लिंग का खड़ा होना जीवनभर चलता रहता है। किशोरावस्था में लड़कों में यह खड़ापन जल्दी होता है। शारीरिक अथवा यौनपरक उत्तेजना से खड़पना हो सकता है और उसके बिना भी हो सकता है। सामान्यतः खड़ापन सपनों से जुड़ा रहता है, किशोरों को एक ही रात में कम से कम दो और अधिक से अधिक छह बार इसकी अनुभूत हो सकती है।
क्या दिन के समया खड़ापन सामान्य माना जाता है?हां, पुरूष के शरीर का यह लिल्कुल सामान्य कार्य है, विशेषकर किशोरावस्था से गुजरने वाले लड़कों के लिए। कई बार खड़ापन यौनपरक उत्तेजना से होता है जैसे कि कोई मूवी देखना या यौनपरक कल्पना करने से। कई बार बिना किसी कारण के भी हो सकता है।

गीले सपने क्या होते हैं?सोते समय लिंग से वीर्य का अनियन्त्रित रूप से निकल जाना गीला सपना कहलाता है। इस तरल पदार्थ का रंग क्रीम जैसा या रंगविहीन होता है।
गीले सपने कैसे होते हैं?सपनों में यौन उत्तेजना होने पर या कम्बल, पलंग अथवा भरे हुए मूत्राशय से रगड़ लगने पर शारीरिक उत्तेजना से गीले सपने आते हैं।
क्या गीले सपनों का आना प्राकृतिक क्रिया है?किशोरावस्था में शरीर में होने वाले बहुत से परिवर्तनों में गीले सपने भी स्वभाविक हैं। सभी लड़कों को ये नहीं आते और तो भी ठीक ही हैं। यदि किसी को गीले सपने ने आते हों तो इसका यह अर्थ नहीं कि कुछ गलत है।
क्या लिंग के माप कुछ महत्व हैं?बहुत से लड़के लिंग के माप के औचित्य से सम्बन्धित प्रश्न पूछते हैं। यह एक स्वभाविक और सामान्य बात है विशेषकर यदि वह यौन सम्भोग न करता हो या करने की सोच रहा हो। लिंग का माप तो जिन सम्बन्धों पर आधारित रहता है जो कि माता-पिता से ग्रहण किया जाता है।
क्या लिंग के माप के सम्बन्ध में कोई कुछ कर सकता है?लिंग को घटाने या बढ़ाने के लिए कोई कुछ नहीं कर सकता - किशोरावस्था से निकलकर जैसे ही आप एक लड़के से एक पुरूष के रूप में विकसित होते हैं लिंग भी विकसित हो जाता है।
क्या लिंग का टेढ़ा होना सामान्य बात है?खड़ा होने पर पुरूष के लिंग का हल्का सा दाएं या बाएं झुककर टेढ़ा होना अन्यन्त सामान्य बात है। कुछ पुरूषों के लिंग ऊपर की ओर भी मुड़ जाते हैं। यदि लिंग में अचानक कोई लम्प आ जाये जिससे वह अप्राकृतिक रूप से मुड़ जाये तो इसे डाक्टर ही देख पाएगा।
क्या लिंग के माप का सम्भोग क्रिया पर कुछ प्रभाव पड़ता है?सम्भोग परक या फिर प्रजनन के लिए किए जाने वाले कार्यों के लिए पुरूष के लिंग का माप काफी से बेहतर होता है। पुरूष को इस बात का पूरा भरोसा रखना चाहिए कि सम्भोग सुख या क्रिया से लिंग के माप का कोई सम्बन्ध नहीं होता। क्रिया का सम्बन्ध तो पुरूष की खड़ापन पाने और बनाये रखने की क्षमता या खड़ेपन अथवा बिना खड़ेपन के अपने आपको और अपने साथी को यौन परक सम्भोग का सुख देने में है अतः क्रिया, वस्तुतः माप पर नहीं - मांसपेशियों और प्रजनन अंगों की नाड़ी एवं रक्त आपूर्ति पर निर्भर रहती है। वास्तव में, यौन सम्भोग का सुख व्यक्ति की मनःस्थिति पर निर्भर करता है, अपनी और अपने साथी की जरूरतों के प्रति सम्मान पर निर्भर करता है। सम्भोग के दौरान, योनि का छिद्र किसी भी लिंग के लिए न तो बहुत छोटा होता है और न ही बहुत बड़ा क्योंकि यह एक 'खाली जगह' है जो कि मांसल तंतुओं से घिरी रहती है और सामान्यतः सभी माप के लिंगों को ग्रहण कर सकती है।

अण्डग्रन्थि के क्षेत्र में पीड़ा के सामान्य कारण क्या हैं?पीड़ा के सामान्य कारण हो सकते हैं (1) घाव (2) अण्डग्रन्थि में ऐंठन (3) अण्डग्रन्थि में कैंसर।
अण्डग्रन्थि का ऐंठन क्या होता है?यह वह स्थित है जब कि वीर्य नली कहलाने वाली जिस सहारा देने वाली नली से अण्डग्रन्थि जुड़ी होती है उसी पर वे मुड़ जाती है जिससे कि अण्डग्रन्थि मे रक्त की आपूर्ति कट जाती है। ऐसे में अण्डकोश नीलवर्ण से बैंगनी रंग में बदल जाता है और बहुत पीड़ा देता है। यह रोग की आपातस्थिति होता है, एक दम बताना चाहिए।
अण्डग्रन्थि में कैंसर में कौन सी चीजें खतरा पैदा करती है?निम्नलिखित बातों से अण्डग्रन्थि में कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है। इनमें (1) जन्मजात समस्या जैसे कि नीचे न होने वाली अण्डग्रन्थि (2­) पारिवारिक इतिहास (3) अण्डकोश में चोट लगने का इतिहास शामिल हैं।
अण्डग्रन्थि में कैंसर के क्या सम्भावित प्रारम्भिक संकेत होते हैं?प्रारम्भिक स्थिति में हो सकता है कि कोई संकेत न मिले क्योंकि इसमें दर्द नहीं होता। कई रोगी उसे हानिविहीन भी समझ सकते हैं और अपने फिजिशियन का ध्यान उधर ले जाने में देर हो सकती है। लक्षणों में शामिल है - (1) अण्डग्रन्थि मे छोटा, दर्द विहीव लम्प, (2) अण्डग्रन्थि का बढ़ना (3) अण्डग्रन्थि में या उरूमूल में भारीपन (4) अण्डग्रन्थि में पीड़ा (5) अण्डग्रन्थि की अनुभूति में बदलाव (6) पुरूष की छातियों और निप्पलों का बढ़ जाना (7) अण्डकोश में अचानक तरल पदार्थ या रक्त का भर जाना।

स्तन सम्बन्धी समस्याएं


स्तन सम्बन्धी समस्याएं
(क) स्तन में लम्प
स्तन सम्बन्धी अन्य समस्याएं
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स्तनों में लम्प होने के क्या कारण होते हैं?
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माहवारी के दौरान स्तनों में क्या बदलाव महसूस होता है?
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स्तन में कैंसरविहीन फोड़े के क्या कारण होते हैं?
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लड़की के स्तन कब बनने शुरू होते हैं?
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क्या किशोरियों को स्तन का कैंसर हो सकता है?
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स्तन कितने बड़े होने चाहिए?
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किशोरावस्था में स्तनों में लम्प हो जाने के सामान्य कारण क्या हैं?
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यदि आपकी मां और बहन के स्तन छोटे हों तो क्या आपके भी छोटे होंगे?
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स्तनपान न कराने वाली औरतों में स्तन पीड़ा का अति सामान्य कारण क्या है?
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क्या अलग-अलग माप के स्तनों का होना सामान्य माना जाएगा?
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किन महिलाओं में फाइब्रोकाइसटिक स्तन की स्थिति बनने की अधिक सम्भावना रहती है?
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यदि किसी के स्तन छोटे हो तो क्या करना चाहिए?
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क्या स्तनों से स्राव का होना प्राकृतिक है?
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महिला को पूरी तरह विश्वास कैसे होगा कि उसका लम्प कैंसर नहीं है?
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स्तन कैंसर की आशंका किन कारणों से होती है?
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लम्प की उपस्थिति को जल्द से जल्द जानने के लिए क्या कदम उठायें?
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अपने आप स्तन परीक्षण कैसे किया जाता है?
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मैमोग्राम क्या होता है?
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इन्फैक्शन के कारण स्तन का लम्प कैसे हो जाता है?
स्तन में लम्प
स्तनों में लम्प होने के क्या कारण होते हैं?स्तनों में लम्प हो जाने के अनेक कारण हैं। इनमें से कुछ कारण तो हानि विहीन होते हैं जबकि अन्य कुछ दर्द भरे अथवा खतरनाक भी हो सकते हैं। इसमें संक्रमण, चोट, कैंसरविहीन फोड़ा या कैंसर भी शामिल है।
स्तन में कैंसरविहीन फोड़े के क्या कारण होते हैं?स्तन में कैंसरविहीन फोड़े में (1) फाइब्राडिनोमा (2) स्तन काइसटिस (3) फाइब्रोकाइसटिक रोग शामिल हैं।
क्या किशोरियों को स्तन का कैंसर हो सकता है?हां, पर जो भी हो किशोरावस्था में यह बहुत ही कम पाया जाता है। दूसरी ओर हम कह सकते हैं कि जीवन में किसी भी समय स्तनों में लम्प हो सकते हैं।
किशोरावस्था में स्तनों में लम्प हो जाने के सामान्य कारण क्या हैं?किशोरावस्था में आमतौर पर होने वाले स्तन लम्प निम्नलिखित है- (1) काइसटिसः प्रायः माहवारी से एक दम पहले ये काइसटिस बड़े हो जाते हैं, नरम बन जाते हैं और दर्द करते हैं, हो सकता है कि वे एक ही रात में दिखने लगे (2) फाइब्रोडिनोमास- ये भरे हुए, मुलायम एवं दृढ़ सुसाध्य लम्प जो कि किशोरावस्था के अन्त में या विशांति के आरम्भ में सामान्यतः होते हैं। ये दूसरे इस प्रकार के अति सामान्य सुसाध्य लम्प हैं जो महिलाओं को होते हैं और किसी भी आयु में हो सकते हैं।
स्तनपान न कराने वाली औरतों में स्तन पीड़ा का अति सामान्य कारण क्या है?फाइब्रोकाइसटिक स्तन रोग ही स्तनपान न कराने वाली औरतों में स्तन पीड़ा का अति सामान्य कारण है। यह सुसाध्य स्थिति है जिसे कि स्तन का कैंसर मान बैठने की भूल नहीं करनी चाहिए।
किन महिलाओं में फाइब्रोकाइसटिक स्तन की स्थिति बनने की अधिक सम्भावना रहती है?फाइब्रोकाइसटिक स्तन की स्थिति सामान्यतः 30 वर्ष या उसके अधिक आयु की औरतों को प्रभावित करती है।
क्या स्तनों से स्राव का होना प्राकृतिक है?यदि स्राव में रक्त हो या पस जैसा हो तो वह संक्रमण या ट्यूमर के होने जैसी गम्भीर स्थिति का सूचक होता है। इसके लिए डाक्टर से परामर्श आवश्यक है।
महिला को पूरी तरह विश्वास कैसे होगा कि उसका लम्प कैंसर नहीं है?पक्के विश्वास के बस एक ही तरीका है कि टिशु के सैम्पल (बायोप्सी) का टैस्ट करायें। बायोप्सी करने के भी कई ढंग हैं। कई बार, एक महीने सुई से किया जाता है (एफ एच ए)। एफ एच ए रक्त की जांच जैसे होता है कि एक सुई चुभाकर रक्त बाहर निकाला जाता है। लम्प की सही जगह का निर्धारण करने के लिए या तो लम्प को महसूसर करना होता है, अगर वह महसूस न हो पाये चो अल्ट्रासाउण्ड या मैमोग्राम करते हुए एफ एल ए किया जाता है।
स्तन कैंसर की आशंका किन कारणों से होती है?आशंका वह है जब रोग लगने की सम्भावनाओं में वृद्धि होती है। अध्ययन के परिणामस्वरूप स्तन कैंसर की सम्भावना निम्नलिखित स्थितियों में बताई गई है। (1) स्तन का कैंसर बड़ी उम्र की औरतों को आमतौर पर होता है, 60 से ऊपर सम्भावना और भी बढ़ जाती है। (2) जिस महिला के एक स्तन में कैंसर हो, उसके दूसरे स्तन में भी होने की सम्भावना बढ़ जाती है। (3) यदि मां, बहन या बेटी को स्तन का कैंसर हो तो महिला को खतरा अधिक रहता है। (4) जिन औरतों का माहवारी चक्र 12 वर्ष की आयु से पहले शुरू हुआ हो उनको भी बड़ा खतरा रहता है। (5) जिन औरतों की कभी सन्तान न हुई हो (6) जिन औरतों ने जीवनभर कभी कामकाज न किया हो। (7) बहुत अधिक वजन वाली और अति गरिष्ठ भोजन करने वाली औरतों को खतरा रहता है।
लम्प की उपस्थिति को जल्द से जल्द जानने के लिए क्या कदम उठायें?उसके लिए जरूरी है कि (1) महिला नियमित रूप से स्वयं स्तनों का परीक्षण करती रहे (2) मैमोग्राम करायें।
अपने आप स्तन परीक्षण कैसे किया जाता है?अपने आप स्तन परीक्षण के पांच चरण हैं।
चरण 1 - कन्धों को सीधा करके और बाहों को नितम्बों पर रखते हुए अपने स्तनों को शीशे में देखना शुरू करें। आपको देखना है - (1) स्तन अपने सामान्य आकार, माप और रंग के हैं। (2) उनका आकार बराबर है - कहीं कोई विकास अथवा सूजन दिखाई न दे। यदि आपको निम्नलिखित कोई भी बदलाव नजर आये तो एकदम डाक्टर को बतायें। (1) त्वचा में कहीं गड्डे हो रहे हैं, सिकुड़न या फैलाव आ रहा है (2) निप्पल की जगह बदल गई है या अन्दर की ओर धस गया है (बाहर की ओर उभरे रहने की अपेक्षा) (3) लालिमा, कड़ापन, रैश या सूजन।
चरण 2 - अब अपनी बांह को ऊपर उठाकर उन्ही बदलावों को पुनः देखें।
चरण 3 - शीशे मे देखते देखते निप्पल को अंगुली और अंगुठे के बीच दबायें और निप्पल से होने वाले स्राव को परखें (वह दूध जैसा तरल पदार्थ या रक्त हो सकता है)
चरण 4 - अगले चरण में, आप लेटकर अपे स्तनों को महसूस करें, बायें सतन को जांचने के लिए बांये का और दायें स्तन को जांचने के लेए बांये हाथ को इस्तेमाल करें। हाथ की पहली कुछ अंगुलियों को सीधा रखकर और मिलाकर दृढ़ परन्तु कोमल स्पर्श का प्रयोग करें।
चरण 5 - अन्ततः खड़े होकर या बैठकर अपने स्तनों को जांचें। चौथे चरण में बताई गई प्रक्रिया से पूरे स्तन को भली भांति जांचे।
मैमोग्राम क्या होता है?मैमोग्राम एक रेडियो डॉयग्नोस्टिक विधि है जिसमें महसूस किए जाने से भी पहले स्तन के लम्प को देखा जा सकता है।
इन्फैक्शन के कारण स्तन का लम्प कैसे हो जाता है?स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन की इन्फैक्शन हो जाना विशेषकर सामान्य है। जब निप्पल की त्वाचा में घाव होता है या फट जाती है जैसा कि दूध पिलाने से हो जाता है तब उस घाव में बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप पस बन जाता है। (पास की गहरी थैली) या ऊपर की त्वचा में इन्फैक्शन होने से उसमें लालिमा आ जाती है।
उपर
स्तन सम्बन्धी अन्य समस्याएं
माहवारी के दौरान स्तनों में क्या बदलाव महसूस होता है?माहवारी से तुरन्त पहले औरतें अपने स्तनों में साइकलिकल बदलाव महसूस करती है जैसे कि सूजन दर्द, ढीलापन आदि। यह प्राकृतिक है और इस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टीरोन नामक हॉरमोन्स के प्रभाव से होता है।
लड़की के स्तन कब बनने शुरू होते हैं?यह समझ लेना महत्वपूर्ण है कि सतनों के बनने के समय में प्राकृतिक विविधता है। उदाहरण के लिए किसी के स्तन 9 वर्ष की आयु में उगते हैं तो किसी प्राकृतिक रूप से 14 वर्ष में शुरू भी नहीं होते।
स्तन कितने बड़े होने चाहिए?स्वास्थ्य की दृष्टि से कोई आदर्श माप नहीं है। हममें से कुछ लम्बे हैं तो कुछ नाटे। इसी प्रकार किसी के बड़े, मध्यम या छोटे स्तन होते हैं।
यदि आपकी मां और बहन के स्तन छोटे हों तो क्या आपके भी छोटे होंगे?स्तन के माप पर जीन सम्बन्धी कुछ प्रभाव रहता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस प्रकार विवाद करते हैं। एक ही परिवार में मां, बहन और बेटी के स्तन माप में अन्तर दिखाई देना कोई असामान्य बात नहीं हैं।
क्या अलग-अलग माप के स्तनों का होना सामान्य माना जाएगा?अलग-अलग माप के स्तनों का होना अत्यन्त सामान्य है। यौवनारम्भ में जब स्तनों का विकास होता है तो लड़कियों के स्तनों और निप्पलों का माप अलग-अलग होना अत्यन्त बात है। हर कोई अलग होता है, किन्ही दो महिलाओं के सतन एक जैसे नहीं दिख सकते। वस्तुतः मानवों में विषमता एक सामान्य बात है- कि उनके हाथ पैर आदि शारीरिक अंग अपने साथी से अलग आकार और माप के होते हैं। उन्हें एक माप का बनाने के लिए सहायक ब्रा या अन्य विशिष्ट सामग्री की मदद से उन्हें एक जैसा बनाया जा सकता है। उनसे मदद मिल सकती है।
यदि किसी के स्तन छोटे हो तो क्या करना चाहिए?स्तन ग्रन्थियों और मोट टिशुस से बनते हैं। स्तन के माप का निर्धारण चर्बी की मात्रा से होता है अतः इन्हें बड़ा करने का एक साधन तो यही है कि अपना वजन बढ़ा लो। प्रोटीन बहुल भोजन जैसे कि दालें- सोयाबीन, राजमा आदि अण्डे, दूध मांसाहार और चपाती, ब्राउन ब्रेड, चावल, मेवे आदि स्वास्थ्यवर्धक कार्बोहाइड्रेडस को अधिक मात्रा में लेने से बढ़ सकाता है। व्यायाम करने से देखने में बड़े लगने लगते हैं, चर्बी नहीं बढ़ती, स्तनों के नीचे मांसपेशियां बड़ी हो जाती हैं।

यौन सम्बन्धों द्वारा संचारित संक्रामक रोग


एच आई वी /एड्स सहित यौन सम्बन्धोंद्वारा संचरित संक्रामक रोग
यौन सम्बन्धों द्वारा संचारित संक्रामक रोग
यौनसम्बन्धों द्वारा संचारित संक्रामक रोग क्या होता है?यौन सम्बन्धों से फैलने वाले किसी भी रोग - समूह के लिए एस टी डी अर्थात यौन सम्बन्धों द्वारा संचरित रोग शब्दों का उपयोग किया जाता है।
यौन सम्बन्धों द्वारा संचरित कैसे फैलते हैं?योनि सम्भोग, मौखिक सम्भोग और गुदापरक सम्भोग जैसे अन्तरंग यौन सम्पर्क से एस टी डी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचते हैं।
एस टी डी के लक्षण क्या होते हैं?एस टी डी के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं - औरतों में योनि के आसपास खजली और /अथवा योनि से स्राव (2) पुरूषों मे लिंग से स्राव (3) सम्भोग के समय अथवा मूत्र त्याग के समय पीड़ा (4) जननेन्द्रिय के आसपास पीड़ाविहीन लाल जख्म (5) मुलायम त्वचा के रंग वाले मस्से जननेन्द्रिय के आसपास हो जाते हैं। (6) गुदा परक सम्भोग वालों को गुदा के अन्दर और आसपास पीड़ा (7) असामान्य छूत के रोग, न समझ आने वाली थकावट, रात को पसीना और वजन का घटना।
क्या यह सम्भव है कि किसी व्यक्ति को एस टी डी हो और उसे पता न हो?पुरूषों मे तो एस टी डी के लक्षण सामान्यतः दिख जाते हैं तो वे जागरूक हो जाते हैं कि उनके यौन परक अंग संक्रमित हो गए हैं। जबकि औरतों के संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं देते जबकि रोग लग चुका होता है।
क्या एस टी डी से अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्य़ाएं हो सकती हैं?हां, प्रत्येक एस टी डी से अलग प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं होती हैं - कुल मिलाकर उनसे ग्रीवा परक कैंसर और अन्य कैंसर हो सकते हैं जिगर के रोग, अन- उर्वरकता, गर्भ सम्बन्धी स्म्याएं और अन्य कष्ट हो सकते हैं। कुछ प्रकार के एस टी डी एच आई वी/एड्स की सम्भावनाओं को बढ़ा देते हैं।
एस टी डी की आशंका होने पर क्या करना चाहिए?यदि आपको आशंका हो कि आप को एस टी डी है तो मदद लेने से घबराओ या शरमाओं मत। डाक्टर के पास जाओ और एस टी डी की जांच के लिए हो या अगर आप पुरूष हैं तो त्वचा विशेषज्ञ के पास जाओ स्त्री हैं तो स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाओ। लक्षणों की उपेक्षा मत करो और न ही यह इन्तजार करो कि आप चले जाएंगे।एस टी डी रोग बहुत आम है और बहुत छूत फैलाने वाले होते हैं, अगर जल्दी पककड़ में आ जाए तो आसानी से ठीक भी हो सकते हैं।
एसटीडी की रोकथाम के क्या तरीके हैं?एस टी डी से अपने आप को बचाया जा सकता है- (1) स्वयं एक विवाह सम्बन्ध निभाना और यह सुनिश्चित करना कि साथी भी उसे निभाये (2) पुरूषों द्वारा लेटैक्स कंडोम के प्रयोग से छूत का भय कम हो जाता है अगर सही प्रयोग किया जाए। ध्यान रखें, हमेशा सम्भोग के समय उसका उपयोग करें। महिलाओं के कंडोम उतने प्रभावशाली नहीं हैं जितने पुरूषों के यदि पुरूष न उपयोग करे तो स्त्री को अवश्य करना चाहिए।

बी- एच आई वी/एड्स
एच आई वी और एड्स क्या है?एड्स का अर्थ है अर्जित रोधन अभाव संलक्षण (Acquired Immune Deficiency Syndraoure) एड्स एच आई वी (मानव की रोधनक्षमता को कमजोर करने वाला वायरस) से होता है जो कि शरीर की रोधनक्षमता पर प्रहार करताहै जिसका काम शरीर को छूत या संक्रामक रोगों से बचाना होता है। इस सुरक्षा कवच के बिना एड्स वाले लोग भयानक छूत के रोगों और कैंसर आदि से पीड़ि हो जाते हैं।
यह कैसे फैलता है?एक संक्रमित व्यक्ति से एच आई वी क छूत दूसरे व्यक्ति तक वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के देने-लेने से पहुंचती है। यह (1) यौन परक सम्भोग (2) एक इंजैक्शन की सुई का दूसरे व्यक्ति के लिए प्ररयोग करने से (3) एक संक्रमित मां से उसके बच्चे को जन्म या उसके आसपास के समय में पहुंचाता है।
क्या मौखिक सम्भोग से एच आई वी की छूत लग सकती है?हालांकि मौखिक सम्भोग से भी संक्रमण की सम्भावना रहती है परन्तु औरत या पुरूष के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध रखने से जरो खतरा होता है वह कहीं अधिक रहता है।
क्या गुदापरक असुक्षित सम्भोग से योनिपरक एवं मौखिक सम्भोग की अपेक्षा एच आई वी का खतरा अधिक रहता है?अन्य किसी प्रकार के यौन सम्भोगों की अपेक्षा असुरक्षित गुदापरक सम्भोग में निश्चय ही खतरा अधिक रहता है। मलाशय के अस्तर में योनि की अपेक्षा कम सैल होते हैं, इसलिए उसमेंचोट लग सकती है और सम्भोग के समय रक्त निकल सकता है। वहां से वह संक्रमित वीर्य या रक्त शरीर के मुख्य रक्त प्रवाह में प्रवेश पा सकता है।
एच आई वी किस प्रकार से नहीं मिल फैलता?प्रतिदिन के सामाजिक सम्पर्कों से एच आई वी दूसरे तक नहीं पहुंचता जैसे कि (1) एक ही टॉयलेट का प्रयोग (2) बर्तनों की साझ्दारी (3) सामाजिक अभिव्यक्ति हाथ मिलाना, गले मिलना आदि (4) मच्छर जैसे कीड़ों के काटने या पालतू पशुओं से (5) खांसी/छीकों से।
टैटू लगवाते हुए, शरीर मे कोई छेद कराते हुए या नाई के पास जाने में क्या अच आई वी की छूत लग सकने का कोई खतरा होता है?यदि रक्त से सने औजारों को एक ग्राहक से दूसरे ग्राहक को लगाने से पहले रोगाणुविहीन न किया जाए तो एच आई वी क छूत लगने का खतरा रहता है। एक बार प्रयोग करके फेंक दिए जाने वाले ब्लेडों का इस्तेमाल करके इससे बचा जा सकता है।
क्या चुम्बन द्वारा एच आई वी संक्रमण होता है?एच आई वी सेसंक्रमित लोगों के मुख की लार में हालांकि वाइरस हो सकता है पर लार से एच आई वी का संक्रमण नहीं होता। यदि सम्भोग के साथियों के मुंह में कुछ कटा हो या दाने हो या मसूड़ों से खून आ रहा हो तो हो सकता है कि संक्रमित खून दूसरे में चला जाये इसलिए गहन चुम्बन से परहेज करना चाहिए।
यदि मुझे एच आई वी है तो कैसे पता चलेगा?एक बहुत ही साधारण सी रक्त की जांच होती है उसे कराने से पता चलता है। इसे एच आई वी ऐन्टीबॉडी टैस्ट कहते हैं। ऐन्टीबॉडी पैदा करके आपका शरीर वाइरस की उपस्थिति के प्रति प्रतिक्रिया करता है। इन ऐन्टीबॉडी को ढूंढ निकालने वाले टैस्ट से पता चलता है कि आप संक्रमित हैं।
एच आई वी टैस्टिंग में 'विंडो पीरियड' क्या होता है?रक्त में दिखाई देने में इन ऐन्टीबॉडी को 14 सप्ताह या उसे भी अधिक समय लगता है। इस दौरान अगर टैस्ट करवाया जाये तो उसमें वे नहीं दिखेंगे जब कि वास्तव में आप वाइरस से प्रभावत हो सकते हैं।
17. एच आई वी और एड्स में क्या अन्तर है?एड्स एच आई वी संक्रमण की अत्यन्त विकसित स्थिति है।
18. संक्रमण के एकदम बाद क्या लक्षण प्रकट होते हैं?एच आई वी एड्स से संक्रमित होने पर कई लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। वाइरस के सम्पर्क मे आने के कई दिन या हफ्तों के बाद कुछ लोगों में फ्लू जैसा बीमारी के लक्षण दीखते हैं। वे बुखार, सिरदर्द, थकावच और गले की बड़ी हुई ग्रन्थियों की शिकायत करते हैं। एड्स के ये लक्षण सामान्यतः कुछ सप्ताह बाद अपने आप गायब हो जाते हैं।
रोग को पनपने में कितना समय लगता है?इसके पनपने का समय हर व्यक्ति में अलग-अलग लगता है। यह स्थिति कुछ महीनों से लेकर दस साल तक चल सकती है। इस अवधि में वाइरस सक्रिय होकर गुणीभूत होता जाता है और रोधनक्षमता के सैल्स को नष्ट कर देता है, शरीस में संक्रमणों से जूझने वाले सीडी 4+या टी 4 सैल को नष्ट कर देता है।
एच आई वी/एड्स के लक्षण क्या हैं?एक बार जब शरीर की रोधन क्षमता कमजोर हो जाती है, एच आई वी@एड्स से संक्रमित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं - (1) ऊर्जा की कमी (2) वजन घटना (3) बार-बार बुखार और पसीना (4) देर तक या बार बार होने वाली फंगल की छूत (5) देर तक रहने वाला डॉयरिया (6) कुछ समय के लिए विस्मृति (7) मुख, जननेन्द्रिय और गुदा में फोड़े (8) खांसी और श्वास फूलना।
मुझे लगता है कि हो सकता मुझे एच आई वी या एड्स हो। मुझे क्या करना चाहिए?अगर तुम्हें ऐसा लगता है या कोई लक्षण दिखता है तो डाक्टर के पास जाओ। हो सकता है आप के रक्त की जांच की जाए। सकारात्मक (पॉजीटिव) रिपोर्ट का अर्थ है कि आपको वायरस लग गया है और आप से दूसरों के पास जा सकता है।
इसका उपचार किस प्रकार किया जा सकता है?एच आई वी के संक्रमण और एड्स का कोई उपचार नहीं है, इसका वायरस शरीस में जीवन भर रहता है। उनमें से एक है एजेड टी जो किएच आई वी बढ़ने को रोक देता है पर इलाज नहीं है। जो संक्रामक रोग या कैंसर हो जाता है उनके इलाज के लिए दवाएं हैं।

गर्भ निरोध


सामान्य
पुरूषों के लिए क्या गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध हैं?पुरूषों के लिए गर्भ निरोधक विकल्प है - अस्थायी सुरक्षा के लिए कंडोम और स्थायी सुरक्षा के लिए नसबन्दी।
महिलाओं के लिए गर्भ निरोधक विकल्प क्या-क्या है?महिलाओं के लिए उपलब्ध गर्भ निरोधक विकल्प हैं (1) जनाना कंडोम (2) स्पर्मिसाइडस (3) मौखिक गोलियां (4) इंजैक्शन द्वारा दिए जाने वाले गर्भ निरोधक (5) इन्टरा युटरीन डिवाइज (6) ट्यूब को बन्द करना (ट्यूबक्टोमी)
जरूरत केआधार पर उपलब्ध गर्भ निरोधकों की पहुंच कहां तक है?जरूरत के आधार पर उपलब्ध गर्भनिरोधकों की पहुंच निम्न प्रकार से हैः
स्थिति
गर्भनिरोधक विकल्प
किशोर/युवा विवाहित दम्पत्ति - जिन की कोई सन्तान न हो।
स्त्री/परुष के कंडोम
संयुक्त हॉरमोन गर्भनिरोधक गोलियां
प्रोजेस्ट्रीन की गोलियां
सेन्टकरोमन (सहेली)
प्राकृतिक परिवार-नियोजन
विवाहित दम्पत्ति - /जिनके बच्चे हैं, बच्चों में अन्तराल चाहते हैं।
स्त्री/पुरूष के कंडोम
संयुक्त हारमोनल गर्भ निरोधक गोलियां
आई यू डी
विवाहित दम्पत्ति - जिनके परिवार परिपूर्ण हैं।
प्रोजेस्टीन केवल गोलियां
डैपो - प्रोवेरा

आई यू डी
स्त्री/पुरूष नसबन्दी
स्तनपान कराने वाली माताएं
स्त्री/पुरूष कंडोम
प्रोजेस्टीन की केवल गोलियां
डैपो - प्रोवेरा
आई यू डी

पुरूष कंडोम
पुरूष कंडोम क्या होता है?पुरूष कंडोम वह थैली है जो कि पुरूष के खड़े लिंग पर चढ़ाने के लिए बनाई जाती है।
यह किस चीज से बनाई जाती है?अधिकतर कंडोम लेटैक्स रबर से बनाए जाते है।
कंडोम के उपयोग के क्या लाभ होते हैं?कंडोम के उपयोग के निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं - (1) जब नियमित रूप से और सही रूप से कंडोम का इस्तेमाल किया जाता है तो वह सबसे अधिक भरोसे की विधियों में से एक है जिनसे जन्म पर नियन्त्रण बनता है। (2) इनका उपयोग उपभोक्ता के लिए सरल है। थोड़े से अभ्यास से वे इसका उपयोग करके सम्भोग के आनन्द से आत्मविश्वास पा सकते हैं। (3) कंडोम की जरूरत तभी पड़ती है जबकि आप सम्भोग करना चाहते हैं जबकि अन्य गर्भनिरोधक आपको हर समय लेने पड़ते हैं या धारण करने पड़ते हैं। (4) कंडोम एकमात्र ऐसा साधन है जो कि यौन सम्बन्धों से फैलने वाले रोगों को फैलने से रोकता है इनमें एच आई वी भी शामिल हैं जब उनका नियमित और सही इस्तेमाल हो। (5) किसी भी उम्र के पुरूष इसे धारण कर सकते हैं। (6) सरलता से उपलब्ध होते हैं और सभी जगह मिलते हैं।
एक कंडोम के उपयोग की हानियां क्या हो सकती हैं?कंडोम के उपयोग की हानियां निम्नलिखित हैं - (1) जिन लोगों को लेटैक्स से अलर्जी होती है उन्हें खुजली दे सकता है। (2) सम्भोग के समय कंडोंम के फट जाने या खिसक जाने की आशंका रह सकती है। (3) यदि वैसलीन या तेल से चिकना करके इस्तेमाल किया जाए तो कंडोम कमजोर पड़ सकता है या टूट सकता है।
गर्भ से सुरक्षा देने में कंडोम कितना प्रभावशाली है?यदि 100 महिलाओं के साथी नियमित रूप से और सही रूप से कंडोम का उपयोग शुरू करते हैं तो पहले वर्ष में 100 में से 3 गर्भधारण होते हैं। यदि उपयोग अनियमित हो या सही न हो तो 14 गर्भधारण की सम्भावना हो सकती है।
गलत या अनुचित उपयोग के क्या सम्भावित कारण हो सकते हैं?निम्नलिखित कारणों से इसका गलत या अनुचित उपयोग हो सकता है - लिंग के पूरी तरह खड़े होने से पहले ही कंडोम पहन लेने के कारण या कंडोम को पूरा ऊपर तक न पहनने के कारण आदि।
कंडोम के उपयोग को सही करने की क्या तकनीक है?कंडोम के सही उपयोग की विधि इस प्रकार है -
सुनिश्चित करें कि पैकेट और कंडोम अच्छी स्थिति में हैं, यदि उस पर समाप्ति की तारीख दी हो तो ध्यान दें कि कहीं तारीख निकल तो नहीं चुकी।
पैकेट को एक कौने से खोलें, ध्यान दें कि अपने नाखूनों, दांत से या बड़ी बरूखी से कंडोंम को साथ में न काट दें।
रोल किए हुए कंडोम को अपने खड़े लिंग के टिप पर रखें।
उसे नीचे की ओर लिंग के मूल आधार तक पूरा खोल दें, अगर कोई हवा के बब्बल आ गए हैं तो उन्हें निकालें (हवा के बबूले कंडोंम को तोड़ सकते हैं)
ऊपर कंडोम के टिप पर कम से कम आधा इंच जगह छोड़ दें ताकि विर्य उसमें एकत्रित हो सके।
यदि आपको कुछ चिकनापन चाहिए तो उसे कंडोम के बाहर लगाएं। परन्तु हमेशा जल आधारित चिकनाई का प्रयोग करें (जैसे कि 'के वाई' जैली जो कि दवा की दुकान पर आमतौर पर मिल जाती है) तेल आधारित चिकनाई जैसे वैसलीन/बेबी ऑयल। नारियल तेल का उपयोग न करें क्योंकि इससे लेटैक्स टूट सकता है।
यदि रोल किया हुआ कंडोम खुले न तो क्या करना चाहिए?कंडोम को लिंग के ऊपरी भाग पर रिम से रोल करते हुए सरलता से और कोमलता से खोलना चाहिए। यदि आपको उससे जुझना पड़े तो या कुछ सैकेन्ड से अधिक समय लगे तो सम्भवतः इसका अर्थ है कि आप उसे उल्टा चढ़ा रहे हैं। कंडोम को उतारने के लिए उसे ऊपर तक वापिस रोल नहीं करना है। रिम से उसे पकड़ो और खींच लो और फिर दूसरा नया कंडोम चढाओ।
कंडोम को कब हटाना चाहिए?लिंग के ढीले पड़ने से पहले उस खींचना है और कंडोम को लिंग के अन्त में रोको, ध्यान पूर्वक खोंचो कि वीर्य बाहर की ओर बिखरे नहीं।
कंडोम को फेंकना कैसे चाहिए?कंडोम को सही तरीके से फेंकना चाहिए - उदाहरणतः किसी कागज या टिशू में लपेट कर फेंकना चाहिए। उसे टॉयलेट मे डालना उचित नहीं - यह प्राकृतिक रूप से घुलता नहीं इसलिए सीवर को बन्द कर सकता है।
यदि सम्भोग करते हुए कंडोम फट जाए तो क्या करना चाहिए?यदि सम्भोग करते समय कंडोम फट जाए, तो जल्दी से उसे उतारें और दूसरा लगायें। सम्भोग करते हुए, समय-समय पर कंडोम को देखते रहें कि कहीं वह खिसक न जाए या फट न जाए। यदि कंडोम फट जाए या आप को लगे कि सम्भोग के दौरान वीर्य बाहर निकल गया है तो आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने पर विचार करें जैसे कि सुबह उठते ही गोली ले लेना।
क्या एक की अपेक्षा दो कंडोम अधिक प्रभावशाली रहते है?एक ही समय में दो कंडोम का उपयोग न करें, क्योंकि जब दो लेटैक्स आपस में पगड़ खायेंगे तो फट जायेंगे।
कृपया कंडोम की देखभाल से सम्बन्धित कुछ टिप्स बतायें।
सम्भव हो सके तो कंडोम को ठन्डे अंधेरे स्थान पर रखें।
कंडोम को अतिरिक्त गर्मी, रोशनी और हुमस से बचायें।
सावधानी से पकड़ें। नाखून और अंगूठी उसे हानि पहुंचा सकते हैं।
उपयोग से पहले उसे खोले नहीं, इससे वे कमजोर हो जाते हैं और खोले बिना भी चढ़ाना कठिन है।
यदि कंडोम अथवा चिकनाई से जननेन्द्रिय मे खुजली या रैश हो जाए तो क्या करना चाहिए?यदि कंडोम अथवा चिकनाई से जननेन्द्रिय में खुजली या रैश हो जाए तो निम्नलिखित उपचार करें -
पानी को चिकनाई की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास करें
खुजली और एलर्जी तो नहीं है इसके लिए डाक्टर के पास जायें।
यदि कंडोम चढाते हुए या उसका उपयोग करते समय किसी पुरूष का लिंग खड़ा नही रह पाता तो क्या करना चाहिए?ऐसी स्थिति मे निम्नलिखित करें -
स्परमिसिड के बिना वाले सूखे कंडोम का उपयोग करने का प्रयास करें।
अपनी साथी महिला साथी से उसे चढ़ाने के लिए कहें जिससे उसके प्रयोग से ज्यादा मजा आयेगा।
लिंग पर अधिक पानी जल आधारित चिकनाई जैसे कि के वाई जैली का प्रयोग करें और कंडोम चढे लिंग पर बाहर से अधिक चिकनाई लगायें।
महिला कंडोम
महिला कंडोम क्या होता है?महिला कंडोम 17 सेमी. (6.5 इंच) लम्बी पोलीउस्थ्रेन की थैली होतीहै। सम्भोग के समय पहना जाता है। यह सारी योनि को ढक देती है जिससे गर्भ धारण नहीं होता और एच आई वी सहित यौन सम्पर्क से होने वाले रोग नहीं होते।
महिला कंडोम की क्या विशेषता है?कंडोम के दोनों किनारों पर लचीला रिंग होता है। थैली के बन्द किनारे की ओर से लचीले रिंग को योनि के अन्दर डाला जाता है ताकि कंडोम अपनी जगह पर लग जाए। थैली की दूसरी ओर खुले किनारे का रिंग बल्वा के बाहर योनि द्वार पर रहता है। लिंग को अन्दर डालते समय वह रिंग एक मार्गदर्शक का काम करता है और थैली को योनि में ऊपर नीचे उछलने से रोकता है। कंडोम में पहले से ही सिलिकोन आधारित चिकनाई लगी रहती है।
महिला के उपयोग के लाभ क्या हैं?महिला कंडोम के उपयोग के लाभ इस प्रकार हैं -
कंडोम प्रयोग को अपने साथी के साथ के बांटने का अवसर महिला को मिलता है।
यदि पुरूष कंडोम प्रयोग के लिए राजी न हो तो महिला अपने लिए कर सकती है।
पौलियूरथेन से बने महिला कंडोम से पुरूष के लेटैक्स से बने कंडोम की अपेक्षा एलर्जी की सम्भावनाएं कम रहती हैं।
यदि सही इस्तेमाल किया जाए तो यह गर्भ धारण एवं एसटीडी से बचाता है।
सम्भोग के आठ घन्टे पहल से लगाया जा सकता है इसलिए इससे रतिक्रिया में बाधा नहीं पड़ती।
पौलियूथरेन पतला होता है और ऊष्मता को सह जाता है अतः यौन अनुभूत बनी रहती है।
इसे तेल आधारित चिकनाई से काम में लाया जा सकता है।
इसको रखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि पोलियूथेन पर तापमान और आर्द्रता के बदलाव का असर नहीं पड़ता। जनाना कंडोम निर्मित के पांच साल बाद तक काम में लायें जा सकते हैं।
गर्भधारण को रोकने में जनाना कंडोम कितना प्रभावशाली है?यदि इसका सही ढ़ंग से और नियमित रूप से प्रयोग किया जाए तो इसकी प्रभविष्णुता 98 प्रतिशत है अगर सही और नियमित न हो तो प्रभविष्णुता की दर घट जाती है।
जनाना कंडोम के उपयोग की सही विधि क्या है?ज कंडोम के उपयोग की सही विधि इस प्रकार है -
पैकेट को सावधानी से खोलें- अन्दर डालने के लिए सुविधाजनक स्थिति चुने-पालथी, एक टां उठाकर, बैठकर या लेटकर
कंडोम के अन्दर वाले रिंग को अन्दर दबाएं अंगूठे और मध्यमा की मदद से ताकि वह लंम्बा और तंग हो जाए और तब आन्तरिक रिंग और थैली को यानि द्वार से डालें।
तर्जनी को कंडोम के अन्दर डालें और रिंग जहां तक जाये उसमें दबा दें।
सुनिश्चत करें कि कंडोमं सीधा लगा है और योनि में जाकर मुडे नहीं। बाहरी रिंग योनि से बाहर ही रहना चाहिए।
लिंग को डालते हुए उसे कंडोम के अन्दर ले जाने का रास्ता दिखायें और ध्यान रखें कि वह कंडोम से बाहर योनि में न चला जाए।
क्या महिला कंडोम का प्रयोग सरल है?महिला कंडोम का उपयोग कठिन नहीं है परन्तु उसके उपयोग के लिए अभ्यास की जरूरत है। पहली बार सम्भोग के दौरान इसका उपयोग करने से पहले महिला को डालने और निकालने का अभ्यास कर लेना चाहिए। संस्तुति की जाती है कि इसके उपयोग में आत्मविश्वस्त होने और सुविधा महसूस करने के लिए उपयोग से पहले कम से कम तीन बार इसका अभ्यास कर लेना चाहिए।
क्या महिला कंडोम के लिए चिकनाई का प्रयोग किया जाना चाहिए, यदि हां तो कैसी चिकनाई?महिला कंडोम में पहले से ही चिकनाई होती है, उनमें सिलिकोन आधारित स्परमिसिडिल रहित चिकनाई होती है। इससे कंडोम को लगाने में आसानी होती है और संभोग की गतिविध में सुविधा रहती है। पहले हो सकता है कि चिकनाई से कंडोम फिसले। यदि बाहरी रिंग कंडोम कंडोम के अन्दर चला जाये या योनि से बाहर आ जाए तो और अधिक चिकनाई की जरूरत पड़ती है। इसके अतिरिक्त, अगर सम्भोग के समय कंडोम का शोर हो तो थोड़ी सी चिकनाई और लगायें। महिला कंडोम जल आधारित के वाई जैली और तेल आधारित वैसलीन या बेबी ऑयल दोनों प्रकार की चिकनाई से लगाये जा सकते हैं।
सम्भोग के दौरान यदि कंडोम खिसक जाए या फट जाए तो क्या करना चाहिए?यदि सम्भोग के समय कंडोम फट जाए या लिंग योनि में चला जाए तो एकदम रूकें और कंडोम को बाहर निकालें। नया कंडोम लगाएं और थैली के द्वार पर लिंग पर अतिरिक्त चिकनाई लगायें।
कंडोंम को कैसे निकालें या फैकें?कंडोम को निकालने के लिए बाहरी रिंग को हल्के से घुमायें और कंडोम को इस तरह बाहर निकालें कि वीर्य उसी में रहे। कंडोम को टिशु या पैकेट में लपेट कर फैकें। उसे टॉयलट में मत डालें।
क्या महिला कंडोम का दोबारा उपयोग हो सकता है?नहीं इसका दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए।
महिला कंडोम कंडोम से क्या हानियां हो सकती हैं?इसके उपयोग से निम्नलिखित हानियां देखने को आई हैं -
क्योंकि बाहरी रिंग योनि से बाहर रहता है तो कुछ कुछ औरतों का ध्यान उसी में रहता है।
सम्भोग के समय आवाजें कर सकता है। अधिक चिकनाई से यह सम्स्या हल हो सकती है।
कुछ महिलाओं को इसे लगाना और हटाना बड़ा कठिन लगता है।
गोली जैसे अनवरोधक की अपेक्षा इसकी असफलता दर कुछ ऊंची है।
क्या एक ही समय महिला और पुरूष किंडोम दोनो का उपयोग किया जा सकता है?
एक एक समय में दोनो प्रकार के कंडोम का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ-साथ उपयोग करने से रगड़ लगने पर कोई एक या दोनों ही फिसल सकते हैं या फट सकते हैं या बाहरी रिंग को हिलाकर योनि में डाल सकते हैं।
स्परमिसिडिस
स्परमिसिडिस क्या है?स्परमिसिडिस रासायनिक पदार्थ है जो कि सम्भोग से पूर्व महिला की योनि में डाल दिए जाते हैं ये वीर्य के जीवाणुओं को निष्क्रिय कर देते हैं या मार देते हैं ये विविध गर्भनिरोधक पदार्थों के रूप में उपलब्ध हैं, जिसमें क्रीम, फिल्म, फोम जैली और अन्य तरल एवं ठोस गोलियां हैं जो अन्दर डालने पर घुल जाती हैं।
इनकी प्रभविष्णुता क्या है?इनकी कुशलता 80 से 85 प्रतिशत के बीच रहती है। यदि इन्हें मेकैनिकल अवरोधक साधनों जैसे कि कंडोम के साथ मिलाकर उपयोग मे लाया जाये तो इनकी कुशलता बढ़ जाती है।
ये किस प्रकार काम करते हैं?ये जीवाणु को नष्ट कर देते हैं। या अचल कर देते हैं।
क्या एस टी आई और एच आई वी@एड्स से स्परमिडिस कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं?स्परमिडिस कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं पर ये सुरक्षा के लिए दी नहीं जाती। इसके विपरीत एन ओ एन ओ एक्स वाई एन ओ एल - 9 नामक स्ममिसिड का एच आई वी के खतरे वाले या गुदा परक कई बार प्रयोग करें तो टिशु उत्तेजित हो जाते हैं जिससे एच आई वी या अन्य टी डी की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं।
स्परमिसिड का प्रयोग कैसे करें?पैकेट के ऊपर सही उपयोग के लिए विस्तृत आदेश लिखे रहते हैं इस प्रकार के पदार्थ का उपयोग करने से पहले ध्यान रखें कि आप आदेश पढ़ लें और समझ लें। सामान्यतः महिला बैठकर या पालथी मारकर इन्हें अपनी योनि में धीरे- धीरे गहरे में उतारती है। गर्भ निरोधक फोम्स, क्रीम्स, जैलिस, फिल्म और डालने वाली गोलियों को सम्भोग शुरू करने से पहले कम से कम दस मिनट चाहिए होते हैं ताकि वे घुल सकें। यह साधन डाले जाने के एक घन्टा बाद तक ही प्रभावशाली रहता है। जितनी बार योनि सम्भोग दोहराया जाए उतनी बार इसे डाला जाना चाहिए।

संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां (सी ओ सीज)
संयुकत मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां क्या होती हैं?संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां जिन्हें सामान्यतः ^द पिल^ कहा जाता है, वह औइस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का सम्मिलन है - जिसे कि प्राकृतिक उर्वतकता को रोकने के लिए महिलाएं मुख से लेती है।
संयुक्त मौखिक पिल कैसे काम करता है?इस पिल का कार्य मुख्यतः इस प्रकार होता है।
शरीर मे हॉरमोन के सन्तुलन को बदल देता है जिससे कि प्राकृतिक रूप उत्पन्न शरीर में हॉरमोन वाला अण्डा उत्पन्न ही नहीं हो।
ग्रीवा से निसृत म्युकस को गाढ़ा कर देता है जो कि ग्रीवा में 'म्युकस प्लग' बना देता है जिससे कि वीर्य गर्भ में पहुंचकर अण्डे को उर्वर नहीं बना पाता।
इस पिल में गर्भाशय का अस्तर पतला हो जाता है जिससे उर्वरित अण्डे का गर्भाशय से सम्पर्क कठिन हो जाता है।
संयुक्त मौखित पिल प्रभावशाली है?इसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावशाली होता है। सही ढंग का अर्थ है एक भी गोली लेने से न चूकना और सही समय पर गोली लेना।
पिल से क्या लाभ है?पिल से लाभ निम्नलिखित हैं (1) बहुत प्रभावशाली है (2) सम्भोग में बाधा नहीं डालता (3) पीरियडस अधिकतर हल्के, कम पीड़ादायक और अधिक नियमित हो जाते है। माहवारी से पहले वाला तनाव दूर हो जाता है। (4) इससे स्तनों में होने वाले सुसाध्य रोगों से सुरक्षा प्राप्त होती है (5) अण्डकोश में कुछ प्रकार के काइस्टस के खतरे को कम करता है। (6) अण्डकोश और गर्भाशय में कैंसर विकास की आशंका को कम करता है।
क्या इस पिल से एस टी आई एवं एच आई वी@एड्स से सुरक्षा प्राप्त होती है?नहीं, इससे कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं होती।
पिल के अन्य क्या प्रभाव हो सकते हैं?पिल लेने वाली अधिकतर महिलाओं पर कोई अन्य प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि कुछ औरतों पर कुछ पड़ते भी हैं - (1) बीमार महसूस करना (2) सिर दर्द (3) स्तनों में सूजन (4) थकावट (5) सम्भोग भावना में परिवर्तन (6) त्वचा में बदलाव जैसे मुहासे और तेलीय त्वचा या त्वचा में रंजकता (पिगमैन्टेशन) (7) मूड में बदलाव (8) पीरियड के बीच रक्त स्राव या धब्बे लगना।
कुछ प्रभाव ऐसे होते हैं जिनमें तत्काल सावधानी की जरूरत होती है। इनमें शामिल है - (1) तेज सिर दर्द (2) छाती में एवं टांगों में भयंकर पीड़ा (3) टांगों में सूजन (4) श्वास लेनें में कठिनाई (5) यदि खांसी में खून आये (6) दृष्टि या वाणी में अचानक खराबी (7) भुजा या टां में कमजोरी या नमी।
किन परिस्थितियों में यह पिल नहीं दिया जाता?निम्नलिखित परिस्थितियों में पिल नहीं दिया जाना चाहिए - (1) यदि आप किसी रक्तवाहिनी से पहले थक्का (क्लॉट) आ चुका हो (2) अत्यधिक मोटापा (3) चल फिर न सकना (अर्थात व्हील चेयर के सहारे रहना) (4) काबू से बाहर मधुमेह (5) उच्च रक्तचाप (6) यदि आपके किसी नजदीकी रिश्तेदार को 45 वर्ष की आयु से पहले थरौमबोसिस, दिल का दौरा या लकवा (स्ट्रोक) हुआ हो। (7) तेज माइग्रेन (8) यदि आप 35 वर्ष से ऊपर के हैं तो धूम्रपान का इतिहास (9) स्तनपान कराने वाली माताएं (10) माइग्रेन का इतिहास होने पर।
पिल का प्रयोग कैसे होता है?यह संयुक्त पिल सामान्यतः 28 पिल्स के पैकेट में आता है। माहवारी चक्र के पांचवे दिन से पहले पिल लेना होता है (माहवारी के पहले दिन को पहला मानकर चलें)- जहां (स्टार्ट) शुरू लिखा है उस ओर से गोलियां लेनी शुरू करें।- इक्कीस दिन तक हर रोज एक ही समय पर एक पिल लेते रहें- अन्तिम सात दिनों में आयरन रहता है। इसी दौरान माहवारी का समय हो जाता है।- फिर से नया पैकेट लेकर शुरू करें।
यदि कोई पिल लेना भूल जायें तो क्या करें?- यदि कोई एक पिल लेना भूल जायें तो, यह जरूरी है याद आते ही ले लें और अगला पिल पहले से निश्चित समय पर लें।- यदि लगातार दो पिल लेना भूल जाए, ... दो दिन तक दो दो पिल लें और फिर पहले की तरह लेने लगें।- यदि कोई तीन या उसके अधिक पिल लेना भूल जाए - तो पिल लेना बन्द कर दें और अगले माहवारी चक्र के शुरू होने तक कोई अन्य जन्म निरोधक लें। यदि माहवारी चक्र समय पर शुरू न हो तो डाक्टर के पास जाना जरूरी है।
यदि पिल लेते समय मितली महसूस हो तो क्या करना चाहिए?पिल को रात के समय या खाने के साथ लें।
इसके प्रभाव स्वरूप यदि हल्का सिर दर्द हो तो उससे कैसे निपटना चाहिए?इब्रफिन, पैरासिटामोल जैसी अन्य कोई पीड़ा निवारक दवा ले लेनी चाहिए।
मौखिक गर्भनिरोधक प्रोजेस्टिन मात्र (मिनी पिल)
प्रोजेस्टन मात्र क्या होते हैं?प्रोजेस्टोजन ओनली या प्रोजेस्टिन ओनली पिल्स (पी ओ पी) ऐसा गर्भ निरोधक है जिसमें केवल सिन्थेटिक है और ओइसट्रोजन नहीं है। इन्हें मिनी पिल्स भी कहते हैं।
पी ओ पी कैसे काम करता है?इस गर्भ निरोधक में तीन चीजें होती हैं।
(1) पहले सामान्य गर्भनिरोधक की तरह, पीओपी आपके शरीर को यह एहसास देता है कि आप गर्भवती हैं और आप के अण्डकोश को अण्ड विसर्जन से रोकता है।
(2) दूसरे, ये मिनी पिल्स आपकी कोख (जहां बच्चा पनपता है) में बदलाव ले आता है। (कि यदि अण्ड विसर्जन हो भी जाए तो आपका गर्भाशय उसे गर्भ धारण नहीं करने देता)
(3) तीसरे, पी ओ पी से अण्डकोश और योनि के बीच का म्युकस गाढा हो जाता है (गर्भाशय के बाहर आने के लिए योनि एक द्वार है) गाढे म्युकस से अण्डे तक पहुंचने के लिए वीर्य को काफी कठिनाई झेलनी पड़ सकती है।
प्रो जेस्टीन ओनली पिल किन महिलाओं के लिए उचित है?प्रोजेस्टीन ओनली पिल सामान्य जन्म निरोधक गोलियों से बेहतर होती है (1) क्योंकि यदि आप स्तनपान करवा रही हैं तो यह आपके दूध बनने की प्रक्रिया को बदलता नहीं (2) यदि आप 35 वर्ष से अधिक आयु के हैं (3) जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं। (4) जिन्हें उच्च रक्तचाप रहता है (5) वजन बहुत अधिक हो (6) रक्त के थक्के बनते हों तो यह लाभदायक रहताहै।
प्रोजेस्टीन ओनली पिल किन महिलाओं को नहीं लेना चाहिए?(1) यदि आप किसी असामान्य गर्भधारण से गुजर चुकी हैं जिसमें भ्रूण गर्भाशय से बाहर था। (2) यदि आपको रक्तवाहिकाओं का कोई तीव्र रोग हो या असामान्य रूप से ऊंचाक्लोस्ट्रोल हो या अन्य रक्त परक फैट की समस्या हो (3) यदि आपको स्तन का कैंसर हो (4) यदि आपको योनि से रक्तस्राव हो रहा हो जिसका कारण पता न चल रहा हो तो डाक्टर अपने आप प्रोजेस्टीन ओनली पिल आप को देने से मना कर देगा।
प्रोजेस्टीन ओनली पिल लेने के बाद भी, क्या गर्भधारण हो सकता है?प्रोजेस्टीन ओनली पिल को सही ढंग से लगातार लेने वाली 100 महिलाओं में से दो या तीन गर्भ धारण कर जाती हैं।
क्या प्रोजेस्टीन ओनली पिल से कुछ हानियां भी हो सकती हैं?प्रोजेस्टीन ओनली पिल के निम्नलिखित सह प्रभाव हो सकते हैं (1) पीरियड्स के बीच धब्बे लगना या रक्त स्राव इसमें असुविधा तो होती है पर स्वास्थ्यपरक कोई खतरा नहीं होता। यदि लगे कि रक्त स्राव पहले से भारी है या उससे परेशान हों (2) वजन बढ़ जाए (3)स्तनों में ढीलापन लगे तो डाक्टर से परामर्श कर सकते हैं।
मिनी पिल को कैसे खाना चाहिए?प्रत्येक पैकेट में 28 पिल्स होते हैं। प्रत्येक पिल में हॉरमोन होते हैं। रक्त स्राव के पांचवे दिने से इन्हें लेना शुरू करते हैं हालांकि, अगर आप पक्की तरह जानती हैं कि आपने गर्भधारण नहीं किया तो पीरियड चक्र में किसी भी समय शुरू किया जा सकता है।
पिल शुरू करने के एकदम बाद क्या सहप्रभाव पड़ सकते हैं?जब आप पीओपी को पहले पहले शुरू करते हैं और जैसे ही शरीर को इसकी आदात पड़ती है आपके शरीर पर इसका कुछ प्रभाव दिखाई दे सकता है जैसे कि पीरियडस के बीच में ही रक्त स्राव होने लगना और सिर दर्द रहना। उनसे कोई खतरा नहीं होता और सामान्तः पहले दो महीने में ठीक भी हो जाती है। अगर ऐसे लक्षण दिखें जो कि बहुत देर तक चलने वाले हों या बहुत तीव्र हों तो डाक्टर से परामर्श करें।
यदि पिल लेना भूल जायें तो देर से लें तो क्या होता है?
यदि आप एक पीओपी लेना भूल गए हैं या तीन या उसके अधिक घन्टे की देर हो जाए तो याद आने के साथ ही उसे खा लें। उसके बाद नियमित समय पर पीओपी लेते रहें। ध्यान रखें कि अगले 48 घन्टे में अगर आप करें तो कंडोम जैसे अन्य सहायक साधन का इस्तेमाल जरूर करें।
यदि लगातार दो या अधिक पीओपी लेना भूल जायें, तो उसी समय शुरू कर दें और दो दिन तक दो पिल लेते रहें। अन्य सहायक साधनों का इस्तेमाल एकदम शुरू कर दें। यदि 4 से 6 हफ्ते में पीरियड शुरू न हो तो डाक्टर से मिलें।
यद आपने असुरक्षित सम्भोग किया है, बिना सहायक साधन के सम्भोग और पीओपी लिये नहीं या देर से लिये हैं तो 4-6 हफ्ते तक पीरियड शुरू न होने पर डाक्टर सें आपातकालीन गर्भनिरोधक देने के लिए
आपातकालीन गर्भनिरोधक
आपातकालीन गर्भनिरोधक या आपातकालीन जन्म नियंत्रण क्या होता है?जब कोई महिला बिना गर्भनिरोधक के प्रयोग के असुरक्षित यौन सम्भोग करती है तो उसे गर्भधारण से बचने के लिए आपातकालीन गर्भनिरोधक का प्रयोग किया जाता है।
किन परिस्थितियों में हमें आपातकालीन गर्भनिरोधक की जरूरत पड़ती है?जिस महिला ने असुरक्षित सम्भोग किया है और गर्भधारण नहीं करना चाहती वे निम्न परिस्थियों में आपातकालीन गर्भनिरोधक ले सकती हैं। (1) उन्हें सम्भोग की सम्भावना नहीं थी और किसी प्रकार के गर्भनिरोधक नहीं कर रहीं थी। (2) उसकी अनुमति के बिना जबरदस्ती सम्भोग किया गया। (3) कंडोम फट गया या स्लिप हो गया (4) गर्भनिरोधक समाप्त हो गए थे या लगातार दो तीन पिल्स लेना भूल गई थी।
आपातकालीन गर्भनिरोधक कैसे करते हैं?आपातकालीन गर्भनिरोधक आपको गर्भधारण से बचा सकते हैं (1) अण्डे का अण्डकोश से बाहर नहीं आने देकर (2) वीर्य को अण्डे से न मिलने देकर (3) उर्वरित अण्डे को कोख से न जुड़ने देकर।
यौनपरक सम्भोग के कितनी देर बाद तक आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल्स लिए जा सकते हैं?असुरक्षित यौनपरक सम्भोग के पहले 72 घन्टे में आपातकालीन गर्भनिरोधक उपाय किए जा सकते हैं फिर भी यही परामर्श है कि जल्दी से जल्दी ले लें।
आपातकालीन गर्भनिरोधक कितने प्रकार के होते हैं?दो प्रकार के हैं (1) आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल्स (ईसीपीस) (2) आई यू डीस
आपातकालीन पिल क्या होता है और इसका उपयोग कैसे होता है?इस पील में लीवोनर्जेस्ट्रल नामक पदार्थ होता है जो कि आपातकालीन गर्भनिरोध के लिए काम में लाया जाता है। दो पिल दो बार में लेने होते हैं (एक परन्तु और दूसरा अगले 12 घन्टे के बाद) या दोनों पिल एक साथ भी लिये जा सकते हैं।
एक आईयूडी आपातकालीन गर्भनिरोधक के रूप में कैसे काम करता है?यह आईयूडी 'टी' के आकार का प्लास्टिक से बना यन्त्र होता है जिसे कि सम्भोग के पांच दिनों के अन्दर अन्दर डाक्टर कोख में लगाता है। आई यू डी का काम होता है (1) वीर्य को अण्डे से मिलने देकर (2) अण्डे को गर्भाशय से न मिलने देने से। आपके अगले पीरिययड के बाद डाक्टर आई यू डी को बाहर निकाल सकता है अथवा दस साल तक जनन नियंत्रण के लिए लगे भी रहने दिया जा सकता है।
आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल के क्या कोई सह प्रभाव भी होते हैं?आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने पर पड़ने वाले अत्यन्त सामान्य सहप्रभाव निम्नलिखित हैं। (1) मित्तली और उल्टी (2) अनियमित योनिपरक रक्त स्राव (3) थकावट (4) सिर दर्द (5)सिर घूमना (6) स्तनों का ढीलापन।
पिल लेते समय मित्तली से कैसे निपटना चाहिए?मित्तली कम करने के लिए (1) पिल लेने से पहले कुछ खा लेने की कोशिश करें। (2) दूसरी बार पिल्स लेने से उनके प्रभाव को कम करने के लिए मित्तली न होने देने वाली दवा लीजिए। (3) पिल्स को दूध या पानी के साथ लें।
क्या आपातकालीन गर्भनिरोधक हमेशा होते हैं?हां, ये पर्याप्त प्रभावशाली हैं। यदि 100 महिलाएं आपातकालीन गर्भनिरोधक का उपयोग करें तो केवल एक गर्भवती होती है।
आपातकालीन गर्भनिरोधक लेते समय कौन से संकेत खतरे के माने जाते हैं जिनसे व्यक्ति को सावधान रहना चाहिए?आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने वाली कोई महिला यदि निम्नलिखित लक्षणों को महसूस करे तो उसे तुरन्त डाक्टर के पास जाना चाहिए। (1) पेट में तेज दर्द (2) आगे आने वाले पीरियड में सामान्य रूप से कम रक्त स्राव (3) यदि अगली माहवारी न हो।
प्रौजैस्टिन ओनली इनजैक्टेबलस
प्रोजैस्टिन ओनली इनजैक्टेबलस क्या होते हैं?इन इंजैक्शनों को प्रोजैक्ट्रोन डालकर तैयार किया जाता है। दो प्रकार के उपलब्ध है- डी एम पी ए - वे डिप्पो जो हर तीसरे महीने लगाये जाते हैं और नेट इन (नरेथिडरोन एननथेट) जो हर दूसरे महीने लगाये जाते हैं।
ये प्रौजेस्टिन ओनली इनजैक्टेबल कैसे काम करते हैं?ये इंजैक्शन (1) अण्डों के बनने को रोककर (2) ग्रीवा परक ग्युकस को गाढ़ा करते हैं ताकि वीर्य ऊपर के मार्ग में प्रवेश ने करे - इस तरह काम करते हैं।
डी एम पी ए के उपयोग के क्या लाभ हैं?लाभ निम्नलिखित हैं (1) ये बहुत प्रभावशाली हैं। (2) लम्बे समय तक गर्भधारण से सुरक्षा देता है और इसे बदला जा सकता है। (3) उपयोग में सरल प्रतिदिन पिल्स लेने के झमेले को दूर करता है। (4) यह इंजैक्शन के सह प्रभावों से मुक्त है जैसे कि धमनियों में रक्त के थक्के बनना। (5) इक्टोपिक गर्भ से बचाता है (गर्भाशय के बाहर का गर्भ) और अण्डकोश के कैंसर से बचाता है।
डी एम पी ए के क्या कोई सह प्रभाव होते हैं?डी एम पी ए का प्रयोग करते हुए कुछ महिलाओँ के माहवारी पीरियड्स में कुछ बदलाव आ जाता है - (1) अनियमित और असंभावित रक्त स्राव या धब्बे लगना। (2)माहवारी रक्त स्राव में बढ़ाव या घटाव या बिल्कुल बन्द। अन्य सम्भावित सह प्रभाव है -वजन बढना, सिर दर्द, घबराहट, पेट में खराबी, चक्कर आना, कमजोरी या थकावट।पीरियडस न होने में कोई नुकसान नहीं है और सामान्यतः पीरियडस डेपो प्रोवेश के बन्द करने पर पुनः स्वाभाविक हो जाते हैं यद असामान्य रूप से भारी या लगातार रक्त स्राव हो तो डाक्टर से मिलें।
डी एम पी ए कितना प्रभावशाली है?डी एम पी ए उतना ही प्रभावशाली है जितना कि अपनी ट्यूबों को बंधवाना और गर्भनिरोध के कई अन्य साधनों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है जसमें गर्भनिरोधक गोलिआं, कंडोंम और डॉयफ्राग्मस शामिल हैं पर यह एड्स या एसटीडी से सुरक्षा प्रदान नहीं करता।
क्या डी एम पी ए का प्रभाव स्थायी है?नहीं, डी एप पी ए का प्रभाव लगभग तीन महीने तक रहता है। गर्भ से बचने के लिए इसे तीन महीने के बाद दोहराना जरूरी है। डी एम पी ए के प्रयोग को छोड़ते ही अण्डाशय अपने प्राकृतिक कार्यों को जल्द ही करने लगता है। अन्तिम बार लेने के बाद औसतान 9से 10 महीने के बाद गर्भ धारण किया जा सकता है।
डी एम पी ए किस प्रकार दिया जाता है?डीएम पी ए का इंजैक्शन नितम्बों में या भुजबली में हर तीसरे महीने दिया जाता दै।
डी एम पी ए कब शुरू करना चाहिए?
परिस्थिति
कब शुरू करें।
माहवारी चक्र नियमित है।
माहवारी के बाद पहले सात दिनों में कभी भी
बच्चे के जन्म के बाद यदि स्तन पान करा रही है।a
बच्चे के जन्म के छह सप्ताह के बाद
बच्चे के जन्म के बाद, यदि स्तनपान नहीं करा रही
तुरन्त या बच्चे के जन्म के पहले छह हफ्तों के दैरान कभी भी।
गर्भपात या गर्भ गिरवाने पर
पहले या दूसरे करवाए गए गर्भपात या गर्भधारण न करने के पहले सात दिन के अन्दर
डी एम पी ए के उपयोग के लिए कौन उपयुक्त है?इसका उपयोग उन महिलाओं के लिए सुरक्षित है जो (1) स्तनपान करवा रही हैं (2) सिगरेट पीती हैं। (3) कोई बच्चा नहीं है। (4) किशोरावस्था से लेकर 40 वर्ष की आयु तक कभी भी (5) स्तनों में सुसाध्य रोग (6) हल्के से माध्यम स्तर तक का उच्चरक्तचाप।
डी एम पी ए का उपयोग किन्हें नहीं करना चाहिए?जिन औरतों को निम्नलिखित कोई समस्या हो उन्हें डी एम पी ए का उपयोग नहीं करना चाहिए - पीलिया रह चुका हो, रक्त के थक्के, अनजाने कारण से योनिपरक रक्त स्राव स्तनों का कैंसर य प्रजननन अंगों का कैंसर, गर्भधारण अथवा आशंका या डेपो-प्रोवेश की दवाओं से एलर्जी।

इन्ट्रा युटरीन डिवाइज
इन्ट्रा युटरीनडिवाइज जिसे कि छोटे में आई यू डी कहते हैं, टी की आकृति में छोटा सा, प्लास्टिक का यन्त्र है जिसके अन्त में धागा लगा रहता है। गर्भ रोकने के लिए आईयूडी को गर्भाशय के अन्दर लगाया जाता है। इसे डाक्टर के क्लीनिक में लगवाया जा सकता है। एक बार ठीक जगह लग जाने पर यह तब तक गर्भाशय में रहता है जब तक कि डाक्टर उसे निकाल न दे।
यह कैसे काम करता है?आई यू डी वीर्य को अण्डे से मिलने से रोकती है। ऐसा करने के लिए यह अण्डे को वीर्य तक जाने में असमर्थ बनाकर और गर्भाशय के अस्तर को बदल कर करती है।
आई यु डी किस प्रकार की होती है?आ यु डी के अलग-अलग प्रकार हैं - (1) कॉपर लगी आई यू डी - इसमें एक प्लास्टिक की ट्यब के अन्दर कॉपर की तार लगी रहती है। (2) नई प्रकार के आई यु डी में हॉरमोन छोड़ने वाला आई यु डी है - जो कि प्लास्टिक से बना होता है और उसमें प्रोजेस्ट्रोन हॉरमोन छोटी मात्रा में भरा रहता है।
कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई यु डी के क्या लाभ हैं?हॉहमोन वाले युडी (1) कॉपर वाले आई यु डी से अधिक प्रभावशाली हैं (2) माहवारी को हल्का बनाते हैं।
कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई डी यु की क्या हानियां हैं?हॉरमोन वाले आई यु डी (1) कापर वाले की अपेक्षा महंगे हैं (2)उपयोग के पहले छह महीनों में अनियमित रक्तस्राव या धब्बे लगने की समस्या हो सकती है।
आई यु डी के क्या लाभ हैं?आई यु डी के बहुत से लाभ हैं - (1) यह गर्भनिरोध के लिए अत्यन्त प्रभावशाली है। (2) सुविधाजनक है - पिल लेने का कोई झंझट नहीं है। (3) मंहगा नहीं है। (4) डाक्टर किसी समय भी निकाल सकते हैं। (5) तुरन्त काम शुरू कर देता है। (6) सहप्रभावों को आशंका कम रहती है। (7) आई यू डू का उपयोग करने वाली माताएं सुरक्षा पूर्वक स्तनपान करवा सकती हैं।
गर्भनिरोधक में आई यू डी कितनी प्रभावशाली है?यह गर्भनिरोध का सबसे प्रभावशाली साधन है। इसे यदि सही ढंग से लगाया जाए तो यह 99 प्रतिशत प्रभावशाली है।
आई यू डी कितनी देर तक प्रभावशाली रहता है?निर्भर करता है कि आपका डाक्टर आपको कौन सा आई यू डी लगवाने को कहता है। कॉपर आई यू डीः टी यू 380 ए जो कि अब राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत उपलब्ध है, वह दस वर्ष के लम्बे समय तक आपके शरीर में रह सकता है। हॉरमोन वाले आई यू डी को हर पांचवे वर्ष में बदलने की जरूरत पड़ती है। इनमें से किसी को भी आपका डाक्टर हटा सकता है। यदि आप गर्भधारण करना चाहें या प्रयोग न करना चाहें तो।
इसकी हानियां क्या हैं?हानियां निम्नलिखित हैं (1) गर्भाशय मे आई यू डी लगाने के पहले कुछ घन्टों में आपको सिरदर्द और पेट दर्द हो सकता है। (2) कुछ औरतों को यह लगवाने के बाद कुछ हफ्तों तक रक्त स्राव होता रहता है और उसके बाद भारी माहवारी होती है। (3) बहुत कम पर कभी, आई यू डी अन्दर डालते समय गर्भाशय में घाव हो सकता है। (4) यह आपको एड्स या एस टी डी से सुरक्षा प्रदान नहीं करता। वस्तुतः ऐसे संक्रामक रोग आई यू डी वाली औरतों के लिए संघात्मक हो सकते हैं। इसके अलावा, अधिक लोगों के साथ सम्भोग करने पर संक्रमण की आशंकाएं बढ़ सकती हैं।
आई यू डी को गर्भनिरोधक के रूप में काम में लाने के लिए कौन उपयुक्त है?किसी भी परिस्थित में वे औरतें आई यू डी का उपयोग कर सकती हैं जो (1) स्तनपान करा रहीं हों (2) सिगरेट पीती हों (3) उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, जिगर या गालब्लैडर के रोग, मधुमेह या मिरगी का उपचार करा रही हों।
आई यू डी लगवाने वाले का उचित समय कौन सा है?आई यू डी लगवाने का उचित समय निम्न है - (1) माहवासी चक्र के रहते - माहवारी चक्र के दौरान किसी भी समय - माहवारी रक्तस्राव के आरम्भ होने के बाद के पहले 12 दिनों में लगवाएं। (2) बच्चे के जन्म@गर्भपात- बच्चे के जन्म के 24 घन्टे के अन्दर अन्छर लगवायें।
आई यू डी कैसे लगाई जाती है?सामान्यतः एक पीरियड की समाप्ति या उसके तुरन्त बाद लगाया जाता है। हालांकि इसे किसी भी समय लगवाया जा सकता है यदि आपको भरोसा हो कि आप गर्भवती नहीं हैं। आपको योनि परीक्षण करवाना होगा। डाक्टर या नर्स गर्भाशय का माप और स्थिति देखने के लिए एक छोटा सा यन्त्र उसमें डालेंगे। तब आई यू डी लगाया जाएगा। आपको सिखाया जाएगा कि उसके धागे को कैसे महसूस किया जाता है ताकि आप उशे ठीक जगह रख सकें सर्वश्रेष्ठ है कि आप उसे नियमित रूप से चक्र करते रहें, हर महीने के पीरियड के बाद कर लेना उत्तम है।
आई यू डी अपनी ठीक जगह पर हैं या नहीं, यह कब चैक करने का परामर्श दिया जाता है?परामर्श है कि महिला (1) आई यू डी लगवानें के एक महीने के बाद सप्ताह में एक बार उसे चैक करें (2) असामान्य लक्षण दिखने पर चैक करें। (3) माहवारी के बाद चैक करें।
आई यू डी अपनी सही जगह पर है यह चैक करने के लिए महिला को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?आई यू डी चैक करने के लिए महिला को चाहिए कि (1) अपने हाथ धोये (2) पालथी मार कर बैठे (3) योनि में अपनी अक या दो अंगुली डालें और जब तक धागे को छू न ले अन्दर तक ले जायेय़ (4) फिर हाथ से धोये।
आई यू डी लगवाये हुए महिला को कब डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए?तब डाक्टर से मिलना चाहिए जब (1) उसके साथी को सम्भोग के दौरान वह धागा छूता हो और उससे वह परेशान हो। (2) भारी और लम्बी अवधि तक होने वाले रक्त स्राव से होने वाली परेशानी (3) पेट के निचले भाग में तेज और बढ़ता हुआ दर्द विशेषकर अगर साथ में बुखार भी हो (4) एक बार माहवारी न होना (5) योनि से दुर्गन्ध भरा स्राव (6) परिवार नियोजन की कोई और विधि अपनाना चाहें या आई यू डी निकलवाना चाहें तब।

सेंट्चरोमन
सेंट्चरोमन क्या है?सेंट्चरोमन एक नया, स्टीरॉयड विहीन, सप्ताह में एक बार लिया जाने वाला मौखिक गर्भनिरोधक है जिसका हॉरमोनल मौखिक गर्भनिरोधक से कोई सम्भन्ध नहीं। यह उर्वारत अण्डे को गर्भाशय के अस्तर से जुड़ने से रोककर गर्भधारण से बचाता है।
सेंट्चरोमन के उपयोग के क्या लाभ हैं?यह सुरक्षित है और घबराहट, वजन बढने, तरल पदार्थों के अवरोधन, उच्च रक्तचाप आदि जैसे हॉरमोनल उपाय से होने वाले सहप्रभावों से मुक्त है।
सेट्चरोमन का प्रयोग कब नहीं करना चाहिए?निम्नलिखित परिस्थितियों में सेंट्चरोमन लगाये जाने की संस्तुति नहीं की जाती (1) पीलिया या लीवर के रोग के हाल ही मे हुए उपचार के कारण (2) अण्डकोश के रोग (3) तपेदिक (4) गुर्दे का रोग।
ये पिल्स कैसे लेने चाहिए?इसका कोर्स 30 मिलीग्राम की एक गोली सप्ताह में दो बार तीन महीने के लिए देकर शुरू करना चाहिए, बाद में जब तक गर्भ निरोधक की जरूरत महसूस हो तब तक सप्ताह में एक गोली देनी चाहिए। माहवारी चक्र के पहले दिन पहली गोली ली जानी चाहिए। गोली निश्चित दिन और निश्चित समय पर ली जानी चाहिए। बाद में होने वाले माहवारी चक्र की ओर ध्यान दिए बिना डोस नियमित रूप से चलता रहना चाहिए।
इसके सहप्रभाव क्या हो सकते हैं?कुछ सहप्रभाव हैं - (1) माहवारी चक्र का लम्बा हो जाना (2) माहवारी में विलम्ब - पन्द्रह दिन से अधिक विलम्ब होने पर डाक्टर से परामर्श करें कि कहीं गर्भधारण तो नहीं हो गया।
महिला बन्ध्यीकरण - ट्यूब बंधी
ट्यूबबंधी क्या होती है?ट्यूब बंधी जिसे सामान्यतः अपनी ट्यूब बंधवाने के रूप में जाना जाता है, महिलाओं के बन्ध्यीकरण की यह शल्यक्रिय है। इस प्रक्रिय से अण्डवाही ट्यूबों को बन्द कर दिया जाता है जिससे कि अण्डा गर्भाशय तक पहुंच नहीं पाता। यह वीर्य को भी अण्डवाही ट्यूब तक पहुंचाकर अण्डे को उर्वरित होने से रोकता है।
जनाना बन्ध्यीकरण कितना भरोसे के लायक है?जो औरतें और बच्चे नहीं चाहती उनके लिए यह स्थायी गर्भनिरोधक है। यह 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावशाली है। इस बन्ध्यीकरण से 200 में से कोई एक महिला गर्भवती होती है। क्योंकि कटने या बन्द होने के बाद कभी कभार ही वे ट्यूबें वापिस जुड़ जाती हैं।
यह कैसे किया जाता है?लोकल या रीढ़ की हड्डी में एनसथीशिया देकर ट्यूब बंधी करने की दो विधियां हैं - (1) एक मिनिलापरोटोमी के अन्तर्गत पेट में एक छोटा सा कट लगाया जाता है जिसके द्वारा ट्यूब को ढूंढकर काटा जाता है और बबन्द कर दिया जाता है। (2)लैपरोस्कोपिक ट्यूब बंधी के अन्तर्गत कार्बन डॉयोक्साईड या निटरोअस आक्साइड गैस से पेट को फुलाया जाता है, पेट की दीवार में छोट सा छन्द किया जाता है जिससे फाईब्रोप्टिक लाईट और बिजली के करंट से ट्यूबों को ठोस बना देने वाला एक यन्त्र डाला जाता है या हर ट्यूब के अन्त में प्लास्टिक का बैन्ड या क्लिप लगा दिया जाता है।
जनाना बन्ध्यीकरण के क्या लाभ हैं?यह स्थायी है फिर आपको दोबारा गर्भनिरोध के बारे में सोचना नहीं पड़ता।
जनाना बन्ध्यीकरण की हानियां क्या हैं?क्योंकि यह स्थायी है इसलिए आगे आने वाले वर्षों में हो सकता है कि आपको पछतावा हो विशेषकर अगर परिस्थितियां बदल जायें तो। मर्दाना नसबन्दी की अपेक्षा इस स्थिति को पुनः बदलना कठिन है।
इसका प्रभाव कितनी जल्दी पड़ता है?अगली माहवारी होने तक आपको गर्भनिरोध के अन्य किसी साधन का उपयोग करते रहना चाहिए।
क्या बन्ध्यीकरण से महिला की माहवारी में कोई बदलाव आयेगा या रक्त स्राव बन्द हो जाएगा?नही बन्ध्यीकरण का महिला की माहवारी पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं पड़ता।
क्या इससे मेरी सम्भोग (सैक्स) की इच्छा में कमी आ जाएगी?नहीं, बल्कि हो सकता है कि उसमें पहले से अधिक आनन्द मिले क्योंकि अन्य गर्भनिरोधक साधनों से होने वाली असुविधा इसमें नहीं है।
पुरूष बन्ध्यीकरण - नसबन्दी
नसबन्दी क्या होती है?यह एक ऐसा ऑपरेशन है जिससे कि फिर पुरूष जीवनभर किसी महिला को गर्भवती नहीं बना सकता। इसमें शुक्रवाहिका नामक दो ट्यूबों को काट दिया जाता है ताकि शुक्राणु वीर्य तक पहुँच ही न पायें।
नसबन्दी कैसे की जाती है?सामान्यतः बहिरंग रोगी प्रक्रिया के अन्तर्गत ही यह आनऑपरेशन किया जाता है। इस में लगभग आधा घन्टा लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान आप जागृत रहते हैं। आप के अण्डकोश को सुन्न करने के लिए आप को लोकल एनसथमीशिया देगा। इसके बाद वह आप के अण्डकोश की ओर छोटा सा छेद करेगा और उससे शुक्रवाहिका को उस ओर खींच लेगा। आप को थोड़ी चुभन और थोड़ा खिंचाव महसूस होगा। शुक्र वाहिका का एक छोटा सा अंश निकाल दिया जाता है। शुक्रवाहिका के किनारों को सिलकर या सेक देकर जोड़ा जाता है अथवा अन्य किसी भी माध्यम से बन्द कर दिया जाता है। यही प्रक्रिया डॉक्टर दूसरी ओर भी करेगा। अण्डकोश के दोनों द्वारों को सिल कर बन्द कर दिया जाएगा।
बिना चाकू के नसबन्दी क्या होती है?इसके अन्तर्गत अण्डकोश में कट लगाने की अपेक्षा एक छोटा सा छेद किया जाता है। वह छेद इतना छोटा सा होता है कि बिना टांकों के ही भर जाता है।
गर्भनिरोध करने में नसबन्दी कितनी प्रभावशाली होती हैइसे जन्म नियन्त्रण का सबसे सुरक्षित साधन माना जा सकता है। नसबन्दी करने के एक साल में 10,000 दम्पतियों में से केवल 15 के गर्भधारण होता है।
क्या कोई ऐसा कारण भी है जिसके कारण नसबन्दी नहीं करवानी चाहिए?जब तक आप का निश्चय पक्का न हो कि भविष्य में आप को सन्तान नहीं चाहिए तब तक नसबन्दी न करायें। यदि आप के जननांगों में या उसके आसपास कुछ संक्रमण हो रहा हो तो नसबन्दी करने में विलम्ब हो सकता है अथवा रक्त स्राव का कोई विकार हो तो भी विलम्ब हो सकता है।
क्या नसबन्दी को वापिस पलटा जा सकता है?कुछ नसबन्दियों को पलटा जा सकता है या नका

रजोनिवृत्ति


1. रजोनिवृत्ति क्या होती है?इसका अर्थ है 12 महीने तक माहवारी का न होना। रजोनिवृति औरत के जीवन का वह समय है जाब कि अण्डकोश की गतिविधियां समाप्त हो जाती है।
2. सामान्यतः किस उम्र में औरतें इस स्थिति तक पहुंचती है?अधिकतर औरतें 45 और 55 की आयु में रजोनिवृत्ति होती हैं परन्तु यह 10 या 40 की उम्र में भी हो सकता है और हो सकता है कि 60 तक भी न हो।
3. रजोनिवृत्ति के चिन्ह और लक्षण क्या हैं?यह याद रखना जरूरी है कि हर महिला का अनुभव नितान्त निजी होता है। कुछ औरतों को थोड़े और कुछ को बिल्कुल भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जब कि अन्य किसी को शारीरिक और मानसिक विविध लक्षण पनप सकते हैं। लक्षणों की परिसीमा और तीव्रता औरतों में महत्वपूर्ण रूप से अलग-अलग है। कुछ चिन्ह और लक्षण निम्नलिखित हैं :
योनि से अनियमित रक्तस्राव - माहवारी समाप्त होने से पहले हो सकते हैं कि पीरियड जल्दी जल्डी होने लगे। (अर्थात उनकी अवधि कम हो जाए) या फिर बहुत दूर दूर हो जाए (चक्र की अवधि लम्बी हो जाए)
गरमाहट लगना या पसीना आना - हॉट फ्लैश में बहुत गर्म लगता है और वह गरमाहट सारे शरीर में फैल जाती है, ज्यादातर सिर और छाती में बहुत अधिक महसूस होती है। कभी कभी गरमाहट के बाद व्यक्ति को लगता है कि वेजान सा हो रहा है या बार बार पसीना आता है। यह गरमाहट 30 सैकण्ड से लेकर कई मिनट तक रह सकती है।
योनि की दीवारों का रूखापन
मूत्र निष्कासन के समय जलन
नींद में व्यवधान
वज़न बढ़ना
मूड में बदलाव आना, झुंझलाहट, थकावाट, स्मरण शक्ति का घटना
हड्डियों का कमजोर होना।
4. रजोनिवृत्ति के लक्षणों के उपचार में हॉरमोन पुनर्स्थापन थैरेपी क्या होती है?हॉरमोन थैरेपी (एच टी) जिसे कि हॉरमोन पुनर्स्थापन थैरेपी (एच आर टी) या रजोनिवृत्ति उपरान्त हॉरमोन्स थैरेपी (पी एच टी) भी कहा जाता है, उस में इस्ट्रोजन या इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का मिश्रण होता है।

5. एच आर टी से कौन कौन से खतरे हो सकते हैं?अध्ययन से पता चलता है कि जिनस महिलाओं को इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के मिश्रण अध्ययन से पता चलता है कि जिन महिलाओं को इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के मिश्रण के हॉरमोन्स थैरेपी दी जाती है और जिन महिलाओं को नहीं दी जाती उनकी तुलना में इन्हें हृदयघात, स्ट्रोक और स्तनपरक कैंसर का अधिक बढ़ा हुआ खतरा रहता है। बाद में एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि जिन्हें केवल इस्ट्रोजन थैरेपी दी जाती है उन्हें स्ट्रोक (लकवा) और गर्भाशय का अधिक खतरा होता है न कि हृदयाघात या स्तन परक कैंसर का।
6. एच आर टी देने का निर्णय डॉक्टर कैसे लेते हैं?हॉरमोन थैरेपी करवाले का निर्णय नितान्त निजी होता है जिसमें रोगी और डॉक्टर को सम्बधित खतरों और लोगों के साथ-साथ महिला के चिकित्सापरक इतिवृत का भी ध्यान रखकर निर्णय करना चाहिए।
7. रजोनिवृति के उपचार के अन्य विकल्प क्या हैं?अन्य विकल्पों में शामिल है (1) मौखिक गर्भनिरोधक पिल्स (2) लगाने के लिए योनि की क्रीम (एन्टी डिप्रैसेंट - अवसाद से मुक्त करने वाली दवाएं।
8. क्या रजोनिवृति के बाद हृदय रोग की आशंकायें बढ़ जाती हैं?इस्ट्रोजन का स्तर शरीर में घट जाने के कारण हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
9. रजोनिवृत्ति के उपरान्त औरतों में हड्डी टूटने की आशंका क्यों बनी रहती है?हड्डियों के कमजोर पड़ जाने पर ओस्ट्रोपोरोसिस नामक स्थिति हो जाती है तो रजोनिवृत्ति के बाद औरतों में हड्डी टूटने की आशंका बढ़ जाती है। अतः डॉक्टर के परामर्श के अनुसार अपने आहार में कैल्शियम को बढ़ाने की जरूरत रहती है।
10. इन लक्षणों को कम करने के लिए हम घर पर क्या उपचार कर सकते हैं?इन लक्षणों को कम करने के लिए आप घर पर निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं?
गरमाहट के झोंके - हल्के कपड़े पहनें, गर्म पेय न लें।
ओनिपरक रूखापन - के बाई जैली जैसे योनिपरक लुब्रिकेन्टस का उपयोग

कम से कम आठ घन्टे की नींद और विश्राम
आहार में फलों, सब्जियों और साबुत अनाजों का विविधता का उपयोग करें।
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट के लिए हल्का व्यायाम करें।
11. कुछ औरतों की रिपोर्ट है कि हल्के गरमाहट के झोंको से विटामिन ई युक्त दवाएं राहत दिला सकती हैं?वाज्ञानिक अध्यन रजोनिवृत्ति के लक्षणों से राहत दिलाने में विटामिन ई की प्रभविष्णुता को प्रमाणित नहीं कर पा रहे हैं। विटामिन ई का 400 इंटरनेशनल युनिटस (आई यू) से बड़ा डोस लेना हो सकता है सुरक्षित न हो, क्योंकि कुछ अध्ययनों से पता चला है कि बड़ा डोस हृदयरोग के खतरे से जड़ सकता है।

गर्भपात

1. गर्भपात किसे कहते हैं?जब बीस सप्ताह से कम समय में योनि कि भ्रूण के स्वयं पनप पाने तक के विकास से पहले यदि किसी नैसर्गिक अथवा प्रयत्नपरक साधन से गर्भ समाप्त हो जाता है तो उसे गर्भपात कहते हैं।
2. नैसर्गिक गर्भपात क्या होता है?नैसर्गिक गर्भपात प्राकृतिक कारणों से होता है जैसे कि भ्रूण में दोष या गर्भाशय की दीवारों में कई कमी होना।
3. उत्प्रेरित गर्भपात करवाने में कानूनी दिक्कते क्या होती हैं?गर्भपात करवाने की कानूनी दिक्कतों का निर्धारण गर्भ का चिकित्सा परक पतन एक्ट के (एन टी पी) साथ किया गया है। भारत में गैर कानूनी गर्भपात की समस्या को रोकने के उद्देश्य से इस एक्ट की संरचना की गई थी।
4. एम टी पी एक्ट के अनुसार, किन किन कारणों से महिला गर्भपात करवा सकती है?एम टी पी एक्ट के अन्तर्गत जिन कारणों से महिला गर्भपात करवा सकती है वे निम्नलिखित हैं
जहां महिला को कोई गम्भीर रोग हो और गर्भ रखने से उसको जान का खतरा हो, जैसे- हृदय रोग- उच्च रक्तचाप में अत्यधिक वृद्धि- गर्भ के दौरान अनियन्त्रित उल्टियां- ग्रीवापरक/स्तन कैंसर- मेल्लिटस मधुमेह के साथ आँखों का रोग (रैटिनोपैथी)- मिरगी-मनोवैज्ञानिक बीमारी
जहां गर्भ को धारण किए रहने से नवजात को भारी खतरा हो जिस से उस में गम्भीर शारीरिक, मानसिक अपंगता की आशंका रहे जैसे -- दीर्घकालिक बीमारियां- पहले तीन महीनों में मां को रूबेला बॉयरल इन्फैक्शन (जर्मन मीसलस)- यदि पहले बच्चों को कोई जन्मजात अप्राकृतिक विकृति हो।- आर एच इसो - इम्यूनाइसेशन- भ्रूण का प्रकाश में उदघाटन
बलात्कार के परिणामस्वरूप गर्भ धारण
वे सामाजिक आर्थिक परिस्थितियां जो मां के स्वस्थ्य गर्भ विकास और स्वस्थ बच्चे के जन्म में बाधक हो।
गर्भनिरोधक की असफलता - चाहे जिस भी माध्यम का उपयोग किया गया हो (प्राकृतिक विधि, अवरोधक विधि/हॉरमोनल विधि) यह परिस्थिति भारतीय कानून की विलक्षण विशेषता है। इन स्थितियों में सभी प्रकार के गर्भों का पतन कराया जा सकता है।

5. एम टी पी करवाने के लिए क्या औरत को अपने पति से लिखित अनुमति की जरूरत रहती है?यदि औरत अठारह वर्ष से ऊपर है तो स्वयं अनुमति दे सकती है उसे पति से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
6. यदि वह अठारह वर्ष से कम उम्र की हो तो किस की अनुमति की जरूरत रहती है?ऐसी स्थिति में उसे अपने संरक्षक की लिखित अनुमति की जरूरत रहती है।
7. एम टी पी करने वाली कौन सी सरकार द्वारा प्राधिकृत संस्थाएं होती है जिन्हें इसे करने की अनुमति रहती है?जिस किसी संस्था के पास सरकार का लाइसेन्स हो उसे एम टी पी करने का अधिकार रहता है।
8. पहले ट्रिमस्टर में गर्भपात की क्या विधियां है?पहले ट्रिमस्टर में किए जा सकने वाले गर्भपात की विधियों में शामिल है।
ग्रीवा को ढीला करके गर्भाशया को खाली करना। क्युरेटैज/सॅक्शन इवैक्युरेशन/वैक्युम एसपिरेशन/डिलेटेशन और खाली करना
माहवारी एसपिरेशन (एम आर)
चिकित्सकीय विधियां
9. ग्रीवा को ढीला करके खाली करना क्या होता है?गर्भ की प्रारम्भावस्था में की जाने वाले यह एक प्रकार की शल्यक्रिया है, यह 12 सप्ताह से पहले होती है, पहले ग्रीवा को ढीला किया जाता है इसके लिए एक अन्दर से खाली रॉड डाली जाती है जो कि ग्रीवा को विस्तृत कर देती है, फिर मशीन द्वारा गर्भाशय के अन्दर के पदार्थ को खरोंचकर या चूसकर या दोनों तरीके से बाहर निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 15 मिनट लगते हैं।
10. ग्रीवा को विस्तृत करने और खाली करने के क्या लाभ हैं?लाभ हैं- एक बार की प्रक्रिया- सुरक्षित- नसबन्दी या इन्टरा युटरीन डिवाइज़ डालने की सम्भावना रहती है- उसी दिन घर वापिस जा सकते हैं।- दूसरे दिन काम पर वापिस लौट सकते हैं।
11. ग्रीवा परक विस्तार और खाली करने की विधि के साथ क्या खतरे जुड़े रहते हैं?खरतों में शामिल है :- एनसथिशीया के लिए प्रयुक्त दवाओं की प्रतिक्रिया- रक्त स्राव- गर्भाशय और अण्डवाही ट्यूब में इन्फैक्शन- गर्भाशय के छेदन की दुर्घटना- भावात्मक कष्ट
12. माहवारी का नियमन या एसपिरेशन क्या है? ekgokjh dk fu;eu ;k ,lfijs'ku D;k gS\महवारी नियमन को मिनिसक्शन, मिनिएबोरशन, वैक्युम एसपिरेशन, लंच टाइम एबोरशन भी कहते हैं जो कि माहवारी न होने के 1 से 3 सप्ताह के भीतर किया जाता है। यह प्रक्रिया बाह्य रोगी के रूप में ही की जाती है। गर्भाशय में प्लास्टिक की एक पतली सी ट्यूब डाली जाती है और सरिंज में नैगेटिव प्रेशर बनाकर अन्दर के पदार्थ को बाहर खींच लिया जाता है। इस प्रक्रिया को करने में दस मिनट का समय लगता है।
13. माहवारी नियमन के लाभ क्या है?लाभों में शामिल हैं :- अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं।- एनस्थीशिया के बिना किया जाता है।- शल्यक्रिया के खतरे कम होते हैं- व्यक्ति घर जा सकता है और अपने दैनिक कामकाज कर सकता है।
14. माहवारी नियमन के साथ कौन से खतरे जुड़े हैं?सम्बन्धित खतरों में शामिल है -- प्रक्रिया की असफलता- रक्त स्राव- इन्फैक्शन
15. पहले ट्रिमस्टर के गर्भ का पतन करने के लिए क्या चिकित्सकीय विधियां हैं?इसमें मुख्यतः प्रोस्टाग्लेन्डिन नामक ड्रग समूह की दवाओं का प्रयोग किया जाता है जिसमें मुख्यतः प्रोस्टाग्लेन्डिन नामक ड्रग समूह की दवाओं का प्रयोग किया जाता है जिसका अनेक मार्गों से उपयोग किया जा सकता है जैसे कि मुख (जिन्हें एबोरशन पिल कहते हैं), इन्टरामस्कुलर, इन्टराबीनस या योनि में इन्जैक्शन द्वारा। इन दवाओं का अकेले अकेले अथवा कुछ दवाओं को मिलाकर दिया जाता है।
(1) मैथोट्रक्सेंट - मिसोप्रोस्टल विधि - महिला को मैथोट्रक्सेट का इन्जैक्शन दिया जाता है। पांच से सात दिन के बाद वह वापिस आती है और उसे योनि में डालने के लिए मिसोप्रोस्टल की गोलियां दी जाती है। एक दो दिन के बाद घर पर ही गर्भ समाप्त हो जाता है। गर्भ के दौरान जो भ्रूण एवं अन्य टिशु पैदा हुए थे वे योनि द्वार से बाहर निकल जाते हैं।

(2) मिफेप्रिस्टोन - मिसोप्रोस्टल विधि - मिफेप्रिस्टोन को आर यू - 486 भी कहते है, यह एन्टीप्रोजेस्ट्रोन होता है। महिला मिफेप्रिस्टोन का एक डोस खाती है पांच से सात दिन में लौटकर अपनी योनि में मिसोप्रोस्टल की गोलियां डालती है। चार घन्टे के अन्दर घर पर ही गर्भ समाप्त हो जाता है। गर्भ के दौरान जो भ्रूण या अन्य टिशु पैदा हुए थे वे योनि द्वार से बाहर निकल जाते हैं।
16. क्या एबोरशन पिल हमेशा डॉक्टर की देखरेख में ही लेना चाहिए?हां, एबोरशन पिल हमेशा डॉक्टर की देखरेख में ही लिया जाना जाहिए।
17. एबौरशन की चिकित्सापरक विधियों से जुड़े खतरे कोन से हैं?चिकित्सापरक विधियों से सम्बन्धित खतरों में शामिल है।
मिफेप्रिस्टोन, मैथोट्रक्सेट और मिसोप्रोस्टाले से चक्कर आते हैं और उल्टी या डायरिया होता है।
यदि गर्भपात पूरी तरह न हो तो भ्रूण को शल्यक्रिया द्वारा निकालना पड़ेगा।
भारी रक्त स्राव हो सकता है जो कि सात दिनों तक चल सकता है
ये ड्रग आसानी से मिलते नहीं और महंगे होते हैं
18. दूसरे ट्रिमस्टर में एम टी पी के लिए कौन कौन सी विधियां काम में ली जाती हैं?उन में चिकित्सापर और शल्यक्रिया परक विधियां शामिल हैं।
19. दूसरे ट्रिमस्टर में गर्भ का पतन करने के लिए किन चिकित्सापरक विधियों का उपयोग किया जाता है?चिकित्सापरक विधि में प्रोस्टाग्लेन्डिन सम्बन्धी ड्रग्स का प्रयोग किया जाता है जो कि मुख से या इन्टरावेजनली दिया जाता है या सीधे गर्भशय के छिद्र में इंजैक्शन द्वारा पहुंचाया जातै है।
20. चिकित्सापरक विधियों से कौन से खतरे जुड़े रहते हैं?
खतरों में शामिल हैं
रोगी को अस्पताल में तीन दिन तक रहना पड़ता है
इन्फैक्शन (संक्रमण)
बढ़ा हुआ रक्त स्रावपदार्थों का बच रहना जिन्हें निकालने के लिए शल्य क्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
21. दूसरे ट्रिमस्टर के गर्भ का पतन करने के लिए शल्य क्रिया परक किन विधियों की जरूरत होती है?शल्य चिकित्सापरक विधियों में शामिल हैं।
एसपिरोटमी - यह विस्तृत करके निकाले जाने के सामान है।
हिस्टरोटोमी : गर्भाशय खोलकर भ्रूण को हटा देना।
हिस्टरोक्टोमी : पूरे गर्भाशय को हटा देना।
22. गर्भपात के दीर्घकालिक प्रभाव क्या होते हैं?गर्भपात कराने वाली औरतों को चिन्ता हो जाती है कि इस का भविष्य में गर्भधारण करने या बच्चे को जन्मने की उनकी सामर्थ्य में कमी आ जायेगी। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता होगी कि अब सामान्यतः यह माना जाता है कि 12 हफ्ते के गर्भ में अगर एक गर्भ का पतन कराया जाए तो भविष्य में गर्भ धारम कर पाने की योग्यता में कोई कमी नहीं होती। हाल ही में वर्ल्ड हैल्थ आरगनाइजेशन द्वारा कराये गए एक अध्ययन से पता चला है कि जिन औरतों के दो-तीन गर्भपात कराये जाते हैं उनके प्राकृतिक गर्भ पतन की अपरिपक्व प्रसव या जन्म के समय बच्चे के कम वजन की आशंकाएं दो तीन गुना बढ़ जाती हैं।

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