Monday, September 29, 2008

ताई की चुदाई

ताई की चुदाई
दोस्तों मेरा नाम जगदीप है, उमर 20 और लम्बाई 5'9"। हमारा सारा परिवार एक ही घर में रहता है। मैं आज आपको अपने जीवन की एक बड़ी ही सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूं। इस घटना से पहले मैं भी बड़ी सेक्सी फ़िल्में देखता था पर इसके बाद से तो मेरी लाइफ़ ही एक सेक्सी फ़िल्म जैसी हो गई है। यह बात आज से करीब एक साल पहले की है जब हमारा सारा परिवार किसी की शादी में गया हुआ था और हमारे घर में कोई नहीं था। इस लिये मैं अपनी ताई जी के साथ शाम को घर वापिस आ गया। मेरी ताई की उमर 47 साल और लम्बाई 5'8" है और उनकी फ़ीगर 40-35-40 की है यानि कि वो थोड़ी मोटी है पर ऐसा होने पर भी वो बड़ी सेक्सी नज़र आती है। जब पहले भी कभी मैं और ताई घर में अकेले होते थे तो ताई बिना चुनरी लिये काम किया करती थी मैंने कई बार उनकी झुक कर काम करते समय गोरी गोरी छाती देखी थी। उनके वो बड़े बड़े बूब्स हमेशा ही मेरी आंखों के सामने घूमते रहते थे।

उस शाम को जब ताई घर का काम कर रही थी तो उन्होंने सलवार कमीज पहना हुआ था। गरमी का मौसम होने के कारण उनके कपड़े पतले थे और उसमें से उनके अंदरूनी कपड़े ब्रा और चड्ढी साफ़ नज़र आ रहे थे। मैं उस वक्त टीवी देख रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान ताई की गांड और बड़े बड़े बूब्स पर था। रात को भोजन खा के हम दोनों अपने अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझ को देर रात तक टीवी देखने की आदत है है इसि लिये मैं करीब रात 11:30 तक टीवी देखता रहा। सोने से पहले जब मैं पेशाब करने के लिये जाने लगा तो मैंने देखा कि ताई अभी तक जाग रही है। मैंने पेशाब करके वापिस आ कर ताई से पूछा कि क्या बात है उन्हें नींद क्यों नहीं आ रही तो ताई ने बताया के उसके पेट में बड़ा दर्द हो रहा है। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनकी कोई मदद कर सकता हूं तो उन्होंने कहा के मुझे सरसों का तेल थोड़ा गरम कर के ला दो। मैं तेल गरम कर लाया मैंने पूछा कि क्या मैं आप के पेट की मालिश कर दूं तो उन्होंने कहा ठीक है। मैंने उनके पेट पर से कमीज ऊपर कर दिया मैंने उनके पेट की मालिश करनी शुरु कर दी। मैं करीब 30 मिनट तक उनकी मालिश करता रहा उसके बाद उनके पेट का दर्द ठीक हो गया पर अभी भी थोड़ा सा तेल बच गया था तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी पीठ पर लगा दो। ताई की पीठ से उनका कमीज ठीक से ऊपर नहीं हो रहा था ताई बोली कि चलो मैं कमीज ही उतार देती हूं। ताई कमीज उतार कर लेट गयी और मैं उनकी लातों पर बैठ कर उनकी पीठ की मालिश करने लग गया ऐसा करते समय मैंने कई बार अपना हाथ उनके बूब्स पे लगाया पर वो कुछ न बोली। फिर मालिश करने के बाद अपने कमरे में चला गया। अभी मुझे लेटे हुए थोड़ा वक्त ही हुआ था कि ताई मेरे कमरे में आ गयी और मेरे ऊपर बैठ गयी। मुझे पता नहीं चल रहा था कि मैं क्या करूं मैंने ताई से पूछा कि आप यह क्या कर रही हो तो वो बोली कि आज तूने मेरे बूब्स को हाथ लगा कर कई सालों से मेरे अंदर की सोई हुई औरत को जगा दिया है और अब इसकी गरमी को ठंडा भी तुम्हें ही करना पड़ेगा। वो ताई जिसके साथ नंगा सोने के मैं सिर्फ़ सपने ही देखता था वो आज मेरे ऊपर बिना कमीज के बैठी हुई थी। मेरा सपना सच होने जा रहा था इस लिये मैं बहुत खुश था। फिर मैंने और ताई ने अपना काम शुरु कर दिया उसने अपने होंठ मेरे होंठों में डाल लिये और 2-3 मिनट मुझे चूमती रही। पहले मैने अपनी जीभ ताई के मुंह में डाल दी और फिर उसने मेरे। फिर ताई ने अपनी सलवार उतार दी और अब उसने सिर्फ़ ब्रा और चड्ढी ही पहनि हुई थी। फिर वो बिस्तर पर लेट गयी और मैं उसके ऊपर फिर हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूजे को चूमते रहे कभी मैं उसकी छाती को चूमता कभी उसके पेट को तो कभी लातों को। फिर ताई ने अपनी ब्रा उतार दी और मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स चूसने शुरु कर दिया उसका दूध बड़ा मीठा था मैं अब भी कई बार उसका स्वाद चखता हूं।फिर ताई ने अपनी चड्ढी भी उतार दी और मेरे साथ लेट गयी ताई की चूत बहुत बड़ी थी उसको चाटना शुरु कर दिया फिर 5-6 मिनट में ताई पहली बार झड़ गयी उसके बाद ताई ने मेरा बड़ा सा लंड अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लग गयी मैंने भी उनके मुंह में ही पिचकारी मार दी। फिर ताई ने कहा कि चलो अब असली काम करते हैं और ताई लातों को थोड़ा खोल कर सीधी लेट गयी मैंने ऊपर से अपना लंड ताई की चूत में डाल दिया वो बड़ा खुश थी क्योंकि आज बड़े वक्त बाद उसकी चूत में लंड घुसा था। मैंने लंड को आगे पीछे करना शुरु कर दिया ताई ने भी आआअ ईए ऊऊह माआ हाआ हाअ की आवाज़ें निकालनी शुरु कर दी। मैं करीब 1 घंटे तक ताई की चूत चोदता रहा इसमें ताई दो बार झड़ गयी। फिर मैंने ताई को कहा कि मैं अब उसकी गांड मारना चाहता हूं और ताई घोड़ी बन गयी मैंने लंड को गांड में घुसेड़ दिया ताई की गांड बड़ी तंग थी उसे दर्द हुआ और वो चिल्ला दी आऐईईईइईईईए माआआआआअ मैंने जोर जोर से लंड आगे पीछे करने शुरु कर दिया और 15 मिनट तक ताई को चोदता रहा। मैंने ताई जैसे गरम औरत की कभी नहीं ली थी। फिर मेरा छूट गया और मैं ताई को चूमने लग गया। फिर ताई ने बोला कि मैं एक बार फिर उनकी चूत मारूं और इस बार वो मेरे ऊपर बैठ गयी और अपने आप हिल हिल कर धक्के देने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर हम सारी रात ही नंगे सोये रहे सुबह उठ कर ताई ने फिर मुझे अपने बूब्स चुसवाये और चूमा भी। उसके बाद तो जब भी हम दोनो घर में अकेले होते हैं तो एक पति-पतनी की तरह रहते हैं।

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Saturday, September 27, 2008

चाचा की लड़की

चाचा की लड़की 

हाय , मेरा नाम राज है.ये बात उस समय की है जब मैं 28 साल का था.
मेरे चाचा की लड़की का नाम शालु है. वो उस समय 23 की थी और 2
साल पहले उसकी शादी हुई थि.लेकिन उसको बचा नहीं होने के कारण
उसकी सास ने लड़ झगड़ कर उसको मयके भेज दिया. और तलाक़ का नोटीस
भेज दिय.इस्लिये वो बहुत ही उदास रहती थि्अर समय तलाक़ की
चिंता और उधर छूट की आग. एक दिन वो हमारे घर आई .उस समय
घर पर और कोई नहीं थंऐने उसे बैठाया और छाई पिलाई. उसके
बाद जस्ट सिंप्ली पूछा 'शालु तेरी प्राब्लम क्या है. उसने कहा बचा
नहीं होने के कारण वो लोग मुझे तलाक़ दे रहे हैं. मैने पूछा
बचा क्यों नहीं हो रहा, तुम डॉक्टर को दिखाओ,तो उसने बताया मेरे
मे कोई खराबी नहीं है. और भैया बचा क्या उंगली से होगा, वो
कुछ करते ही नहीं,करना चाहते हैं तो भी नहीं होतंऐने
कहा तब तलाक़ करके दूसरी शादी कर लो.वो बोली भीया एक तो
पिताजी की मेरी दूसरी शादी करने की हैसियत नहीं है, दोसरे
मैं उनसे बदला लेना चाहती हून क्योंकि उन्होने जान बुझ कर एक
कुवारि लड़की की जिंदगी क्यों बर्बाद किंऐन बोला बात तो ठीक है
लेकिन ये तो तभी होगा जब वो तुझे ले जाएँगे. बिना बचा हुए वो ले
नहीं जाएँगे. इतना सुन कर वो बेबसी से मजबूर होकर रोने लगी.
बोली मेरी तो तकदीर ही खराब है भैया, मुझे कोई रास्ता नहीं दिख
रहा है. आख़िर मे मैं जहर खाकर जान दे दूँगी.
मैं उसे संतवाना देने के लिए अपनी बाहों मे लेकर पूछकरने लगा
और चुप करने की कोशिश करने लग.तो वो आवेश मे आकर और ज़ोर
से लिपट गई. एका एक उसे उन दीनो की बात याद गई जब हम लोग
बहुत छोटे थे और गुड्डा गुड़िया खेला करते थे. और उस खेल मे
मैं हमेशा उसका दूल्हा बनता थऽउर हम लोग खाली रगड़ा रगड़ी
करते थे, क्योंकि और कुछ आता भी नहीं था . उन लीनो को याद
करके वो बोली, भैया एक बात कहूँ, मैं बोला ' हन कहो.वो बोली
बचपन मे आप हमेशा मेरे दूल्हा बनाते थे , आज मुझे सच मे
आपकी ज़रूरत है, एक यही रास्ता मुझे दिख रहा है मेरी मुसीबत
को हाल करने का की आप मुझे एक बचा दे दोंऐन बोला बचपन की
बात अलग है ,तू पागल है ये कैसे हो सकता है, आख़िर तू मेरी
बहन लगती है.वो बोली भैया ये बात हिम्मत करके इतना खुल कर
मैने आपको कह दी,हर किसी से तो नहीं कह सकति.फिर मैं किससे
संबध करून.घर से बाहर के आदमी से करूँगी तो बहुत बदनामी
होगि.भिय तुम्हे ये कम करना ही होगा ,मेरी जिंदगी का सवाल
है ,नहीं मैं सचमुच जहर खा लून्गिऽइसे कहा कर वो और ज़ोर
से रोने लगी. मैने घबराकर कर उसे चुप करने के लिए ज़ोर से
लिपटा लिया और उसकी पीठ और बाल सहला कर माता चूमने लगा. और
यही पर ग़ज़ब हो गया. वो बुरी तरह से मेरे से लिपट गई और मुझे
पागलों की तरह मूह पर गालो पर होतो को चूमने लगि.खुब कस कर
लिपट कर मेरे सिने मे सिर छुपा लिया.
गरम गरम चुममे लेने से मेरा लंड खड़ा हो गया था ,आख़िर मैं
भी तो जवान था. उसने मेरी पीठ पर हाथ सहलाते हुए दूसरा हाथ
धीरे धीरे आयेज से लेजकर मेरा लंड पकड़ लिया और मसलने लगी.
उस समय मैं लूँगी मे था. और उसके नीचे अंडरवेर नहीं था. उसने
लूँगी के अनादर हाथ दल कर लंड को बाहर निकलंएर मोटा तगड़ा
लंड देख कर उसकी आँखो मे अजीब सी चमक गई और अचानक नीचे
झुक कर लंड चूम लिया. लंड एक दम से फंफना उठा और लोहे की
तरह कड़ा हो गया. वो मेरे कन मे बोली भैया अब मत तड़पाव, जलदी
से जाओ ,बर्दस्त नहीं हो रहा हैंऐन भी पूरा गरम हो चुका
था सो उसको बेड पर ले गय.पहले उसकी सारी उतरी फिर ब्ल्ौए. ब्रा
खोलते ही वो तोड़ा शरमाई,चूचु पर हाथ रख लिया. मैने हाथ
हटा कर चुचि को मूह मे ले लिया और धीरे ढिरे निपल को चूसने
लगा,वॉवववववववववववव क्या मस्त चुचि थि.लगत था उसके साले गन्दू
पति ने कभी छुई ही नहीं थी .30 साइज़ की संतरे की तरह कड़ी
और गुदगुदी .थोड़ी देर चुसते ही उसकी शारी शरम भाग गई और ज़ोर
ज़ोर से सिसकने लगी ही भैया जलदी कीजिए .हाईईईईईईईईईईई मैं मार
जाऊंगी. उसकी आँखे मस्ती से लाल हो गई थी. उसने मेरा हाथ पकड़
कर छूट पर रख दिया .मैने तुरंत उसके पेटीकोत का नडा खोला और
पेटीकोत निकालने लगा तो शरम से पलट गई. मैने खींच कर
पेटीकोत टॅंगो से निकल दिया और अपनी लूँगी भी खोल कर फेंक दी.
अब हम दोनो बिल्कुल नंगे थे. मैने उसके चूटर पर चुम्मा लिया तो
वो सीधी हो गई. मैने उसकी टाँगे छोड़ी करके छूट पर होंठ रख
कर उसकी छूट का टिट चूसने लगंऐने जितनी छूट छोड़ी हैं
सबको पहले छत कर तैयर करता था क्योंकि एक तो छूट चाटने से
लड़की पूरी गरम होकर साथ मे झार जाती है दूसरे उस मर्द की
दीवानी हो जाती है.

छूट चाटते ही वो पूरी पागल हो गई और मेरे सिर के बाल पकड़ कर
अपने उपर खींच लिया. छूट से बहुत रस तपाक रहा था .कितना तो
मैं पी गया था. बहुत मस्त खुसबुदार छूट थी. छूट की ख़ुसाबू
लेते ही लंड और कड़ा हो गय.लुन्द का सूपड़ा उसकी छूट ऑर रखा तो
उसका सारा बदन कँपने लगा और बोली जलदी घुसा दीजिए
भैयहुत तो चाटने से और छूट के रस की वजाहा से पूरी गीली थी
फिर भी हाथ मे थूक लेकर मैने लंड पाएर और लगा लिया और छूट
के छेड़ मे सता कर धक्का मारा तो लंड फिसल कर सुपरा अंदर
चला गया. वो एकदम छिलाई आआआआहह और सरीर कड़ा कर
लिया, मैं उसके उपर लेट गया उसके होंठो को मुहा मे लेकर जीभ
उसके मूह मे दल दी वो भी मेरी जीभ चूसने लगी. 1 मिनिट बाद
मैने तोड़ा उपर होकर दूसरा तेज धक्का लगाया क्योंकि लंड इतना
कड़ा हो गया था की रूकना मुस्किल था. तेज डक्के से आधे से ज़्यादा
लंड झटके से अंदर तो गया लेकिन वो बहुत ज़ोर से छिलाई
हाईईईईईईईईई मार गई भयाअ.,धीरे अरे निकालिए मैं मार गई
माआआआअ. लेकिन मैने पैरो मे कैची दल रखी थी वो लंड तो
नहीं निकल पाई लेकिन कसमसाती रही. मैने फिर चुम्मा लेकर
पूछकरा 'क्या हुआ तोड़ा और है बस. वो बोली भैया पहली बार है
ना इसलिए तोड़ा धीरे धीरे कीजिए ना. मुझे सर्प्राइज़ हुआ .बोला क्या
मतलब तो बोली भैया मैं आज तक कुवारि हून ,उनका लंड खड़ा ही
नहीं होता था. कभी तोड़ा बहुत हुआ भी तो बाहर ही झार जाता था
अंदर जाने की नोबट ही नहीं आइंऐने चुम्मा छाती और बातों मे
उलझा कर मोका देख कर एक आख़िरी जोरा का धक्का मार दिया और मेरा
लंड उसकी कुवारि कची छूट को फादता हुआ पूरा घुस कर उसकी बचे
दानी मे लग गया.
वो बहुत तदपि लेकिन मैं सावधान था, उसको कस कर दबोच लिया था
और लंड को बाहर नहीं निकालने दिया. इतनी उमर और पूरी औरत
होने के बावजूद वो दर्द से रोने लगी थिंऐने पूरे चेहरे पर
चूमा. चुचि छूसी ,एक हाथ से उसके चूतड़ सहलाए तब उसको तोड़ा
आराम मिला .करीब 5 मिनिट बाद मैने पूछा दर्द कम हुआ वो बोली हन
तोड़ा है. मैने धीरे से लंड बाहर करके हल्के हल्के धक्के
लगाने चालू किए . धीरे धीरे उसको भी दर्द की जगह मज़ा आने
लगा तो बोली तोड़ा ज़ोर से धक्का लगाइए. मैने धीरे धीरे रफ़्तार
बढ़ा दी और लास्ट मे पूरा हुमच कर छोड़ना चालू किया तो वो टाँगे
उपर करके छुड़वाने लगी और पागलों की तरह बोल रही थी है भीया
आज पूरी रत कस कर छोड़ दो हाईईईईईईईईईईई मैं आपकी हो गैइइ आज
से मैं आपकी हून भैया मेरे पेट मे आअज ही अपना बचा दल
डूऊऊ. हाीइ और ज़ोर ज़ोर से छोड़िईईई ऐसे कहते हुए वो
झटके से लिपट गई और मुहा से आवाज़ निकली आआभाययय्याआआआययययए
क्य्ाआअमैंन्न मररररर गैिईईइईरीईईईई अहह
गरम हो गई थी की 4-5 ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने के बाद मैं भी
झार गया और उसकी छूट को अपने वीर्या से पूरा भर दिय.वो खूब कस
कर मेरे से लिपट गई और कन मे बोली भैया अभी बाहर मत
निकलना. बचा होने के लिए आपका पूरा पानी बचे दानी मे जाना
ज़रूरी है. मैं उसकी छूट मे लंड डाले उसके उपाए ही लेट गया . और
उसे चूमने लगा , एक हाथ नीचे ले जाकर छूट को टटोल कर देखा तो
मेरे हाथ मे खून लग गया. मुझे फिर सर्प्राइज़ हुआ तो वो बोली भीया
अब तो आपको बिसवास हो गया ना .मैने आपको बिना चूड़ी छूट दी हून
मैं बोला हन शालु आज से तू मेरी जान है तू मेरी रानी है क्योंकि
तूने अपना कुवरा शरीर मुझे अर्पण किया है. वो भी खुश हो
गई .15-20 मिनिट बाद उसके उपर उठा ,उसकी छूट ने सारा पानी अंदर
सोख लिया था ,फिर तोड़ा बहुत बाहर आया उसमे पूरा खून लगा था.

नीचे चददर पर भी खून लग गया था. वो थी और मेरे लंड को
साफ करके चुम्मा लिया फिर अपनी छूट साफ की. उसके बाद उस रत को
मैने उसे 5 बार छोड़ा सुबह 4 बजे हम दोनो नंगे ही लिपट कर
सोए . उसके बाद तो मैने उसे लागत्र 3 साल तक छोड़ कर 2 बचे पैदा
किए. पहली बार मे ही उसको गरभ (पेट) रह गया था. तो बहाने से
उसके पति को बुलाया एक रत के लिए. वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन
जब उसे पता चल की वो गरभवती हो गई है तो ख़ुसी से घर ले
गया. शायद उसे अपनी कमज़ोरी का पता था ,उसे ये भी अची तरह
पता था काइया ये बचा उसका नहीं है फिर भी इसीलिए चुप रहऽब
वो अपनी ससुराल मे खुश हैऽउर उसने अपना इलाज भी करा लिया है.
उसे पक्का तो नहीं मालूम लेकिन शक पूरा है की दोनो बचे मेरे हैं
कारण की दोनो की शकल मेरे से मिलताई है. अब दिक्कत ये है वो
मुझे अपने यहाँ आने नहीं देता और शालु को भी नहीं भेजता,
और एक समस्या हो गई है की मैं किसी भी लड़की को तभी कस कर
छोड़ पता हून जब वो चुड़वते समय शालु की तरह है भियाआआआ
कह कर बोले. इसलिए जो भी ज़रूरत मंद बहन मेरी स्टोरी को पढ़े
वो मुझे कॉंटॅक्ट कर सकती है. उसकी भी ज़रूरत पूरी हो जाएगी
और मुझे शालु के बदले मे छोड़ने को बहन मिल जाएगी.


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थोड़ी सी हिम्मत--1

थोड़ी सी हिम्मत--1 




मुज़ेः लगता है की मेरी कहानी मे मेरा परिचय देने की ज़रूरत है॥
फिर भी मई संजय आज उमर 40 साल।
एक बहुत ही सेक्सी आदमी. और मेरी कहानी या एक्सपीरियेन्स
से आपके लंड और चोट को एक नयी दुनिया
मे ले जाने वाला सख्स. जैसे की आप सब जानते हैं की अभी
मैं मुंबई मे रहता हूँ और एक प्राइवेट कंपनी
मी सर्विस करता हूँ. लेकिन 4 साल पहले मई इस कंपनी के देल्ही
ऑफीस मे पोस्टेड था और ऑफीस के
काम से मुझे बहुत जगह जाना पड़ता था. एक बार मूज़े ऑफीस के
कम के सिलसिले मे एक महीने के लिए
हेड ऑफीस मुंबई जाना पड़ा. वहाँ मेरी कोई पहचान नहीं थी इसलिए
मैं उस सहर से अंजान था. मेरा एक
कज़िन ब्रदर जो की डोर के किसी रिस्ते मे मेरा भाई लगता था. वो
रहता था. तो मैने उनका कॉंटॅक्ट नो लिया
और बात की तो मैने भाई को अपने मुंबई का प्रोग्राम बताया और
अपनी परेशानी भी बताई की मैं मुंबई मे
अंजान हूँ तो उसने कहा “डरो मत भाई हम लोग जो यहाँ पर रह रहे हैं,
और कहा की तुम 1 महीने तक हमारे
यहाँ ही रुकना और वो बहुत खुस हुए. अपने प्रोग्राम के अनुसार मैं
मुंबई पहुँचा. ऑटो रिक्षव लेकर उनके घर
पहुँचा. उनके घर मे केवल 3 प्राणी थे. भाई, भाभी ओरभाभी की छोटी
बहन. उनकी शादी को करीब 1 यियर्ज़
ही हुया था, सबसे पहले मैं आप लोगो तो उनका परिचय करता हूँ.


भाई: उमर 32 के करीब थी और वो नेवी मे ऑफीसर हैं और अक्सर वो
घर से बाहर ही रहते हैं. हफ्ते 2 हफ्ते
मे 2 दिन के लिए घर आते हैं फिर अपनी ड्यूटी पर चले जाते हैं.

भाभी: भाभी का नाम रोशनी है. नाम जैसी ही रोशन याने बहुत गोरी है.
उमर करीब 27-28 की हैं. शरीर से सुंदर
और ना ज़्यादा मोटी और ना ही ज़्यादा पतली हैं (मीडियम हेल्त). उनका
शरीर ठीक तक हैं और एक हाउस वाइफ हैं.
सच काहु तो उनका शरीर गड्राया हुआ है और किसी भी जगह ज़्यादा मोटाई
या चर्बी नही है. कसा हुआ बदन है
उनका. गोरी बहुत है उनकी चूंचियाँ काफ़ी बड़ी लेकिन तनी हुई है और आधे कटे
नारियल जैसी लगती है. उनका
फिगर 36 27 36 है. अब आप समझ लीजिए की सामने की गोलाई और
उभर और पीछे के उभर एक जैसे थे.
कमर पतली पेट एकद्ूम सपाट और नाभि बहुत गहरी. वैसे स्टार्ट मे मेरे दिल
मे उनके लिए कोई भी ऐसी वैसी भावना नही आई थी.

भाभी की बहन: नाम प्रियंका हैं. उमर करीब 20+ की हैं. औरवेरगे फिगर की
भाभी से बी सुंदर लड़की है. उसकी
अभी तक शादी नहीं हुई थी और मुंबई घूमने के लिए आई हुई थी.

मैं शनिवार को उनके घर पहुचा, उस वक़्त भाई घर आए हुए थे. उन्होने मेरा अच्छी
तरह से स्वागत किया. और
कुच्छ ही घंटो मे हम आपस मैं काफ़ी घूल मील गये थे. मैं संकोच के मारे
उनलोगो से कम बातें करता था लेकिन
भाई मुज़से काफ़ी हँसी मज़ाक करते थे. शाम को भाई ने भाभी से कहा हम
बाजार होकर आते हैं तुम खाना मत
बनाना, होटेल से मँगवा लेना क्योंकि हमारे छोटे भाई की खातिरदारी तो करनी
पड़ेगी और वैसे भी मुझे15-20 दीनो
के लिए सोमवार की फ्लाइट से चेन्नई जाना हैं. भाभी ने कहा ठीक है आप
लोग 8 बजे टके आ जाना तब तक
होटेल से खाना भी आ जाएगा. भाई और मैं मार्केट घूम कर करीब 8 बजे घर
पहुँचे. घर आकर कपड़े चेंज करके
हम लोग हॉल मे आ गये. हॉल मे भाई और भाभी सोफे पर बैठे थे.. उनके
फ्लॅट मे 2 बेड रूम, 1 हॉल और1
किचन था. 2 बेड रूम के बिच एक कामन टाय्लेट था. भाई शॉर्ट और त.शिर्त
पहने थे और भाभी निघट्य मे थी.
थोड़ी देर बाद भाई ने भाभी से कहा “यार कुछ पपद वग़ैरह तो ला दो एक आड़
पेग पी लेते हैं. भाभी उठकर पपद
और 3 ग्लास ले आई. 3 ग्लास देखते ही मैं चौका लेकिन कुच्छ नहीं कहा.
अचानक भाई ने मुज़से कहा “संजय केया तुम लायटे हो ?

मैं: तोड़ा संकोच करते हुए कहा, हन कभी कभी मैं ले लेता हूँ

भाई: कितनी लेते हो (यह सुनते ही भाभी हंस पड़ी)

मैं: अगर दूसरे दिन च्छुटी हो तो 3-4 पेग ले लेता हूँ.

भाई: फिर तो ठीक हैं कल रविवार हैं और तुमाहरी च्छुटी भी है.
खूब जमे गा रंग जब टीन यार मिल बैठेंगे
संग. ये कह कर भाई ने 2 ग्लास मे लार्ज पेग और1 ग्लास मे
स्माल पेग बना दिए. स्माल पेग भाभी
को दिया. हम तीनो धीरे धीरे पेग पीने लगे.. भाई बिच बिच मे
हमे कई किससे और जोक सुना रहे थे.
करीब 9 बजे जब भाभी की बहन प्रियंका आई हमने अपना पीने
का सिलसिला बंद कर खाना खाया और
करीब 10:30 बजे मेरा बिस्तर हॉल मे लगा कर भाभी अपने
कमरे मे सोने चली गयी और उनकी बहन
दूसरे कमरे मे सोने चली गयी. बकारडी गिन का नशा और सफ़र
की थकान के कारण मूज़े जल्दी ही नींद आ गयी.
करीब 12:30 बजे मेरी नींद खुली क्योंकि मूज़े पीसाब लगी थी.
मैं जब टाय्लेट जाने के लिए भाभी के कमरे के
पास से गुजर रहा था. मूज़े उनके कमरे से चूड़ियों की खनक
सुनाई डी. मैं जब पेशाब करके वापस आया तो
उत्सुकतावश उनके कमरे के दरवाजे के एक होल से अंदर देखा.
वा केया नज़ारा था.

भाभी बिल्कुल नंगी थी, और भाई उन्हे छोड़ रहे थे. भाभी धीमी
आवाज़ मे कह रही थी. ऊओह और ज़ोर से
छोड़ो मेरे राजा. मैं बहुत गरम हो गयी हूँ. कस कस कर अपना
लंड मेरी छूट मे छोड़ो. आज मुझे प्यासी मत
चोर देना हमेशा की तरह. बहुत दिन बाद आए हो और कल चले
जाओगे.. आज ज़ोर सी… लेकिन 4-5 धक्को
के बाद भाई झार गये और भाभी के बगल मे सो गये. भाभी बोली “
तुमने आज फिर वोही किया.. मेरी छूट को
प्यासी रख कर खुद नीडल पद गये और बड़े मर्द बनते हों. मई
माना कर रही थी, मुझे मालूम है तुम कुछ नही
कर पाओगे.. लेकिन तुमने मुझे गरम किया और अपना काम कर
के सो गये.., लगता हैं हमएसा की तरह मूज़े
अपनी उंगली से ही छूट की प्यास भुझहनी पड़ेगी . फिर भाभी
अपनी छूट मे अपनी ही उंगली से चुदाई करके सो
गयी. मूज़े उनके हालत पर तरस और दया आई और मैं भी
बिस्तर पर आकर सो गया. सुबहा करीब 7 बजे मैं
उठा और नहा धो कर फ्रेश होकर नाश्ता किया. दिन भर मेरे
पास कोई कम नहीं था इसलिए मैं बोर हो रहा था.
अचानक भाई का फोन आया भाई फोन पर बातें करने के बाद
उदास होगआय. और भाभी से बोले मूज़े आज ही
दोपहर की फ्लाइट से चेन्नई जाना होगा क्योंकि इम्मेर्गेंसी हैं.
और वे उठकर जाने की तय्यरी करने लगे.
उनकी फ्लाइट 1:20 की थी इसलिए मैं और भाभी उनेह 12:00 बजे
एरपोर्ट छ्चोड़ने गये. जब वापस घर लौटे
तो दोपहर के 3 बाज रहे थे. भाभी ने कहा संजय चलो खाना खा लेते हैं.
घर मे अब केवल हम टीन जाने ही थे.
भाभी, प्रियंका (भाभी की बहन) और मैं. खाना खाने के बाद हम
लोग सीडी पर पिक्चर देखने लगे.

जब शाम हुई तो मैने कहा भाभी मैं बेज़ार होके आता हूँ. कुछ लाना
हो तो नहीं हैं. ? भाभी बोली संजय आते
समय मेरे लिए बकारडी गिन और कबाब ले आना. मैं करीब 7 बजे
मार्केट से बकारडी गिन और कबाब ले आया.
जब घर आया तो भाभी की एक सहेली भी आई थी उसने भाभी से
कहा भाभी प्रियंका को मई आज मेरे साथ ले
जाना चाहती हून. हमारे एक को-टीचर की आज माँगनी है. क्या मैं
प्रियंका को ले जा सकती हूँ ? भाभी ने कहा
ठीक हैं, लेकिन कब तक वापस लौउटो गी आप लोग. प्रियंका ने
कहा भाभी हम लोग सुबह ही वापस लौटेंगी
क्योंकि रात भर गाने वग़ैरह होंगे. भाभी पहले तो माना करती रही
की तुमहरे जीजा जी घर पर नहीं हैं इसलिए
रात भर वहाँ रहना उचित नहीं होगा लेकिन प्रियंका और भाभी की
सहेली के जिध के आयेज भाभी की नहीं चली
और आख़िर वो बोली “अच्छा बाबा लेकिन सुबह जल्दी आ जाना”
इतना सुनते ही प्रियंका और भाभी की सहेली
चली गयी. अब घर मे हम दो लोग थे भाभी और मैं. उनके जाते
ही भाभी बोली एक कम करते हैं. हम सिर्फ़
दो ही लोग है तो होटेल से खाना माँगा लेते है. जब तक खाना
आता है तब तक हम थोड़ी बकारडी गिन पी लेते हैं.
फिर उन्होने पुचछा क्या तुम भी भाभी का साथ दोगे बकारडी
गिन पीने मे ?मैने कहा नहीं कल मूज़े कम पर
ऑडिट के लिए जाना हैं. भाभी बोली. ये तो लॅडीस ड्रिंक हैं
अगर तुम तोड़ा पी लोगे तो कुच्छ नहीं होगा और
मेरा साथ भी देते रहोगे. मैने कहा ठीक हैं. लेकिन पहले मैं
अपने कंपनी के ब्रांच मॅनेजर को फोन करके कल
का आपपॉइंटमैंट ले लेता हूँ. फिर मैं अपने मुंबई ब्रांच मॅनेजर
को फोन लगाया.उन्होने कहा की आप मंगलवार
से आकर ऑडिट कर सकते हैं क्यों की मंडे तक उनकी एंट्री
पूरी हो जाएगी इसलिए मंगलवार को सुबह 10 बजे
आकर ऑडिट कर सकते हैं और एक दिन और सफ़र की थकान मिटा सकते हैं.
ये सुनकर मैं तोड़ा नर्वस हो
गया क्योंकि एक दिन घर रहकर और बोर हो जौंगा.

भाभी किचन से 2 ग्लास और तोड़ा नमकीन लेकर आई. फिर लार्ज पेग बनाने
लगी. जब वो पेग बना रही थी
उसका पालू नीचे गिर गया जिस से उसके उभरे हुई बूब्स ब्लाउस से दिखाई देने लगे.
उनके भारी हुई चुचिया
ब्लाउस के खुले हिस्से से दिखाने लगी . दोनो चुचियों के बीच की खाई की
तरफ मेरी नज़र अटक गयी. पेग
बनाकर उसने अपना पालू ठीक किया. हम पेग पीने लगे और मुंबई के विहसे
मे बातें करने लगे. हम लोगो ने
करीब 4-4 पेग पिए. भाभी को नशा होने लगा फिर भी उसने स्माल पेग
और पिया. स्माल पेग पीते ही उसके
कदम लड़खड़ाने लगे. मैने कहा भाभी अब बॅस करो खाना खाते हैं. भाभी
बोली संजय तुम खुद हे खाना लगा लो..
मैने उनेहे किसी तरह खाना खिलाया और खुद भी खा लिया. खाना खाने के
बाद भाभी बोली संजय पहले मूज़े
टाय्लेट तक ले चलो फिर मूज़े बेड रूम मे छ्चोड़ देना. मैने भाभी की कमर
पकड़ कर उनके हाथों को मेरे खांडे
पर रख कर टाय्लेट ले गया. इस तरह ले जाते समय उनकी पतली और
चिकनी कमर का स्पर्श और उनके
लेफ्ट चुचि का दबाव मेरे सिने मे हुआ , मेरा लंड अचानक हरकत मे
आने लग.टोइलेत मे जाने के बाद भाभी
ने टाय्लेट का दरवाजा बंद किया लेकिन अंदर कुण्डी नहीं लगाई. जिस से
दरवाजा तोड़ा खुला रहा गया. मूज़े
दरवाजे से सॉफ दिखाई दे रहा था भाभी ने पहले अपनी सारी उपर की
फिर उन्होने चड्डी उतरी और पेशाब
करने लगी. उनकी बड़े बड़े गोरे चूतड़ साफ दीखाई दे रहे थे.. ये सब
देख कर मेरा लंड खड़ा होगआया (मेरे
लंड की लेंग्थ 8 इंच और मोटाई 3.5 इंच है). पेशाब करके भाभी बाहर
आई मैं उनको उनके बेडरूम मे ले गया.
बिस्तर पर लता ते ही भाभी नीडल पद गयी. और नशे मे बोली. संजय
तुम भी इशी कमरे मे सो जाना मेरे पास
और लाइट ऑफ कर देना दीं लाइट जला देना. मेरा दिल खुश हो गया.
अभी टके उन्हे छोड़ने का ख्याल नही
आया था. सिर्फ़ उनके गड्राए शरीर को चुने का ही मान था. क्यूकी
चुदाई करने मे रिस्क था, अगर वो चिल्लाई
या नाराज़ हो गयी तो?. हन नशा मे मई उनकी चूंची और चूतड़
सहलाने का मूड बना चक्का था.

मैं हॉल मे वापस आकर अपना अंडरवेर निकाला और केवल पाजामा
और बनियान मे भाभी के पास आकर सो गया.
भाभी का पालू और सदी अस्त वयस्ट थी. बिस्तर पर दीवार की तरफ
ज़्यादा जगह थी शायद मेरे सोने के लिए
भाभी ने दीवार की और की जगह छ्चोड़ी थी. मैं दीवार की तरफ आकर
सो गया. अब तक मैं भाई की बीबी को
अपनी ही सग़ी भाभी की तरह से देख रहा था. मेरे मान मे कोई ग़लत
भावना नहीं थी. पर बिस्तर पर भाभी का
पालू और सदी अस्त वयस्ट देख कर मेरे मान मे हलचल मच गयी थी.
मेरा लंड पाजामे के अंदर एकदम खड़ा था
और दिमाग़ मे भाभी का सेक्सी जिस्म घूम रहा था. कल रात वाली
घटना (भाभी अपने छूट की प्यास अपनी
उंगली से भुजने वाली) मेरे दिमाग़ मे रहा रहा कर घूम रही थी. फिर
भी मई किसी तरह यह सब गंदी बातें दिमाग़
से हटा कर सो गया. कब्रिब रात 1:30 बजे मेरी नींद खुली और मूज़े
ज़ोर से पेशाब लगी. मैं दीवार की तरफ था
और उतार ने की लिए भाभी के उपर से लाँघना पड़ता था. मैं उठा और
भाभी को लाँघने के लिए उनके पैरो पर हाथ
रखा. हाथ रखते ही मेरे सारे बदन मे करेंट सा लग गया. भाभी की
सारी घुटनो के उप्पर थी और मेरा हाथ उनकी
नंगी जाँघो पर पड़ा था लेकिन भाभी की तरफ से कोई आहत नहीं हुई.
मैं जल्दी से उठ कर पेशाब करने चला गया.
पेशाब करते वक्त मैने देखा मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा है और
पेशाब करने के बाद भी वैसा ही रहा.

पेशाब करने के बाद मेरा मान फिर भाभी की तरफ गया और लंड
फूलकर फिर खड़ा हो गया. मैने सोचा भाभी तो
सो रही है अगर मैं भी तोड़ा हाथ फेर लूँ तो उनको मालूम नहीं
पड़ेगा. और अगर वो जाग गयी तो सोचेगी मैं नींद
मे हूँ और कुच्छ नहीं कहेगी. दोबारा पलंग पर आने के पहले मैने
नाइट लॅंप ऑफ करदी जिस से कमरे मे बिल्कुल
अंधेरा हो गया और आकर भाभी की बगल मे लेट गया. लेटने के
बाद भाभी के पास सरक कर अपना हाथ उनके
पेट पर रख दिया और तोड़ा इंतेजर के बाद जब देखा भाभी अब भी
सो रहै थी. मैने अपना हाथ तोड़ा उपर सरका
कर ब्लाउस के उपर तक लेगया. उनकी एक चुचि की आधी गोलाई
मेरे उंगलिओं के नीचे आ गयी. अब धीरे धीरे
मैने उनकी चुचि दबाना सुरू किया. कुच्छ ही देर मे उनकी वो पूरी
चुचि मेरे हाथों मे थी. अफ क्या चुचि थी.
ऐसा लगा मैने किसी मखखां के गोले पर या स्पंज के बॉल पर
हाथ रखा हो. मेरी उंगली के दबाव से दबाती तो
थी लेकिन फिर वैसे ही उभर आती थी। मेरे हाथ मे ब्ल्ौसे के
उपर से उनकी ब्रा महसूस हो रही थी पर निपल
कुछ मालूम नहीं पद रहा था. भाभी अब भी बेख़ाबर सो रही थी और
मेरा लंड एकदम फाड़ फादा रहा था. सिर्फ़
ब्लाउस के उपर से उनकी चुचि दबा कर मज़ा नहीं आ रहा था.
देल्ही के बस और लोकल ट्रेन मे ना जाने
कितनी लड़कियों की चुचि दबाई थी मैने.


मैने सोचा अब असली माल को टटोला जाए और अपना
हाथ उठा कर भाभी की जाँघो पर रख दिया.
मेरा हाथ उनकी सारी पर पड़ा पर मूज़े मालूम था अगर मैं
अपना हाथ तोड़ा नीचे सरका लू तो मूज़े उनकी
जंघे खुली मिलेगी. मैने अपना हाथ नीचे सरकया तो मूज़े
उनकी नर्म नरम गड्राई जाँघो का स्पर्श हुवा.
तभी मेरा स्पर्श पाकर भाभी ने थोड़ी हलचल की फिर शांत
हो गयी. मैं वहीं थोड़ी देर रुक कर अपना हाथ
उपर सरकने लगा जिस से उनकी सारी भी उपर सरक रही थी.
भाभी फिर से कुछ हिली तोड़ा कुन्मुनाई
पर शांत हो गयी. अब मेरा मान मेरे बस मे नहीं था मैने
अपना हाथ भाभी के जाँघो के बीच लेने की
सोची पर मैने पाया की भाभी की जंघे आपस मे सती हुई थी
और मेरी उंगलियाँ उनकी छूट तक नहीं पहुँच
सकती थी. फिर भी मैने अपना हाथ उपर सरकया और साथ
मे मेरी उंगलियाँ दोनो जाँघो के बिच घुसने की
कोशिश की. भाभी फिर से हिली और नींद मे ही अपना एक
पैर घुटनो से मोड़ लिया जिस से उनकी जंघे
फैल गयी. मैने भी इस सिचुयेशन का फ़ायदा उठाया और
अपना हाथ उनकी जाँघो के बीच लेगया. अब मेरा
अंगूठा भाभी के छूट के उपरी उभर पर था और मेरी पहली
उंगली, भाभी की जाँघो के बीच उनकी पनटी के
उपर से असली हिस्से पर थी. भाभी की छूट की गर्माहट
मेरी उंगली पर महसूस हो रही थी. और कुच्छ
कुच्छ गीलापन महसूस हो रहा था. मई साँझ गया की जाने
अंजाने भाभी गरम हो रही है. मैने हल्के से
छूट पर हाथ फेरा. भाभी तोड़ा सा हिली.

Wednesday, September 24, 2008

उस दिन के बाद से पार्ट--३

उस दिन के बाद से पार्ट--३
दोस्तो अब आपकी सेवा मैं यानी आपका राज शर्मा उस दिन के बाद से पार्ट--३ लेकर हाज़िर हूँ ये इस कहानी का अंतिम पार्ट है
मुझे भाभी का हाथ कुछ चिपचपा लगा. ओर मई समझ गया की
उनके हाथ मे भी शहद लगा है जौंहोने मेरे लॅंड पर लगा दिया
है. हाथ तो धो आती भाभी. मैने कहा. क्यो? उन्होने पूछा. मेरे
लॅंड पर शहद लग गया. मैने ही लगाया है. तुम मेरा दूध पी
रहे हो, मई भी तो कुछ पियूंगी. "च्चि" तो क्या आप मेरा पेशाब
पियोगी? अरे नही,मई तुम्हारा दूध पियूंगी. मेरा दूध,मेरा दूध
कहाँ से आएगा. उन्होने मेरे छ्होटे-छ्होटे निपल्स कोपाकड़ कर कहा
आदमियों का दूध यहाँ से नही उनके लॅंड से आता है. "लॅंड से?"
मेरा तो कभी नही आया सिर्फ़ सस्यू आती है. तो दूध आज आएगा,
देखना तुम? कहते हुए उन्होने मेरी गर्दन उपेर की ओर मेरे निपल
चाटने लगी. जिन पर उनके हाथ का शहद लग गया था. मेरे निपल
छत कर बोली अब तुम बाद मे दूध पीना पहले मेरी छूट को भी तो
फूक मार दो. कहते हुए वो मेरे उपेर घोड़ी बन गयी. उनकी छूट के
चीड़ मेरे मूह के एकद्ूम सामने थे ओर वहाँ से मीठी सी खुश्बू
रही थी शायद उन्होने कोई पर्फ्यूम लगाया था. मैने फूक मारनी
शुरू की ओर उधर उन्होने मेरा लॅंड अपने मूह मे ले लिया ओर चूसने
लगी. मई फिर से घबरा गया उन्होने मेरा लॅंड मूह से बाहर किया ओर
बोली फूक मरते रहो मई शहद छत रही हून, फूक मारनी बंद की
तो लॅंड काट लूँगी तुम्हारा. कह कर उन्होने मेरे लॅंड पर दाँ
घड़ाए. मई फिर से फूक मरने लगा. वो काफ़ी देर तक मेरे लॅंड को
चुस्ती रही. मेरा लॅंड रोड की तरह सकत हो रखा था. उसने पूछा-
क्या कभी मलाई नही निकली इसमे से? मैने कहा- कॉआन सी मलाई? इसमे
से तो सिर्फ़ सू-सू आती है ओर ये गंदा होता है आप इसे मो मे ले
रही हो. उसने कहा अच्छा रहने दो चलो सोते हैं. मई निक्कर उठाने
चला तो उन्होने माना कर दिया, बोली- इतनी गर्मी मे कपड़े नही
पहनते. ऐसे ही सोएंगे ओर तुम्हे अभी मेरा दूध भी तो पीना है.
फिर मई उनसे चिपक गया ओर रात को उनका दूध पीते-पीते ही सो
गया. वो मेरा लॅंड अपने हाथों मे पकड़े सहलाती रही. सुबह जब मेरी
आख खुली तो मैने देखा भाभी अभी तक सो ही रही थी उनका मूह
मेरे परों की साइड मे था ओर पेर मेरी तराफ़, शायद वो मेरा लॅं
चूस्ते हुए ही सो गयी थी. मेरा लॅंड अभी तक सकत ओर गरम था ओर
उसमे से अभी तक कुछ नही निकला था. मैने भाभी की ओर देखा उनके
बूब्स साइड मे लटक रहे थे रात की तरह ताने हुए नही थे. फिर
मैने उनकी छूट की तरफ देखा, छूट ऐसी लग रही थी जैसे कोई
लड़की तोड़ा सा मूह खोले हुए हो. दो होंठ भी दिख रहे थे. मैने
उंगली से उन होंठो को टच किया ओर भाभी की तरफ देखा. वो वैसे
ही सो रही थी. मैने उंगलियो से दोनो होंठो को हल्के से पकड़ा तो
छूट का मूह खुल गया. मुझे रात बातरूम की याद आई जब मैने
उसमे उंगली दल कर सॉफ की थी. मैने उस मूह मे फिर से उंगली दल
दी. तभी भाभी ने अपने पेर सिकोड लिए ओर मेरा हाथ उनके परॉन के
बीच मे डब गया. वो आखें खोल कर मुसकुरी ओर बोली- क्या कर रहे
हो वीनू जी? कल तक तो बहुत शर्मा रहे थे आज उंगीयाँ बहुत चल
रही हैं. तुम्हारी मों से कह डून की तुम्हारे लिए अब लड़की ढूँ
ले. मई शर्मा कर रह गया. उन्होने अपने पेर खोले ओर अपनी छूट को
सहलाते हुए बोली- इसमे उंगली नही लॅंड डालते हैं. उंगलियाँ तो मेरे
पास भी हैं, मई खुद भी दल सकती हून, फिर तुम्हारे लॅंड की क्या
ज़रूरात है. "इसमे लॅंड डालते हैं, कैसे भाभी, ये तो मेरे सा
जुड़ा हुआ है, कैसे दल सकेंगे इसमे?" मैने पूचछा. बता दूँगी
कुछ रात के लिए भी रहने दो अब कपड़े पहन कर घर जाओ वरना
तुम्हारी मों आवाज़ देंगी या यही आ जाएँगी. जा रहा हून, मैने बुरा
सा मूह बनाया ओर बोला पर भाभी ये किसी ओर को मत कहना वरना मेरी
मार लग जाएगी. तुम भी किसी से मत कहना, अपने दोस्तों से भी नही-
वो बोली. मैने कहा- नही कहूँगा मारना थोड़े ही है, पर एक बार
दूध ओर पीला दो ना. नही अब रत को, अब जाओ. मान मार कर मैने कपड़े
पहने ओर घर आ गया. पर मेरा मान किसी काम मे नही लग रहा था.
बार-बार भाभी का शरीर आखों के सामने आ रहा था. मान कर रहा
था की भाभी के पास वापस चला जाओं. पार वो घर पर नही थी.
अपनी किसी सहेली के घर गयी हुई थी. पूरा दिन उनके इंतेज़ार मई ही
कटा. सुबह को ही मैने मों से कह दिया था था की भाभी की तबीयत
क्योंकि अभी पूरी तरह से ठीक नही है इसलिए आज भी उनका खाना
यही बना लेना मई ले जाऊँगा. डोफेर का खाना उन्हे अपनी सहेली के
घर खाना ही था. शाम को मैने जल्दी-जल्दी कह कर खाना पॅक
करवाया ओर 7.30 बजे से ही खाना ले कार उनके घर पहुच गया. वो
बोली अरे तुम इतनी जल्दी आ गये मई तो तुम्हारे घर ही आ रही थी.
मेरे घर, क्यो? मई फिर घबरा गया कहीं भाभी मेरी शिकायत ना
कर दे. वो हसी बोली अरे डरो मत मई तो वैसे ही आ रही थी. थोड़ी
देर तुम्हारे यहाँ टाइम-पास किया जाए. चलो खाना बाद मे खाएँगे
अभी भूक भी नही है तुम्हारे घर चल कर ग़मे खेलते हैं. ओर
आप मुझे कुछ बताने वाली थी- मैने कहा. क्या? वो बोली. मई
शरमाया- मेरा आपकी उसमे कैसे जाएगा? वो हसी, बोली सबर करो वो
सब रत को, दिन मे भूल जया करो चलो तुम्हारे घर चलते हैं.
अब मई क्या कह सकता था. उन्होने कपड़े बदलने के लिए अपनी मेक्शी
उतरी, नीचे वो ब्लाउस ओर पेटीकोत पहने हुए थी. मई समझा वो भी
उतरेंगी. पर उन्होने मुस्कुराते हुए एक सारी लपेटनी शुरू कर दी.
फिर हम लोग मेरे घर गये. वहाँ वो मों से बातें करती रही ओर मई
आसपास इसलिए लगा रहा की कहीं वो मेरी शिकायत ना कर दे, कितना
भोला था मई. पर फिर भी एक बार तो मेरी हवा खराब हो ही गयी
जब मों बोली- "रूपी" तुमने तो हुमारे लड़के पर जादू सा कर दिया
है, जब देखो भाभी-भाभी ही करता रहता है. मई दर गया पर
भाभी मुस्कुरई ओर मेरे गाल पकड़ कर खिचते हुए बोली- ये है ही
इतना प्यारा, मेरा तो इसके बागेर समय ही नही करता. मों को हेस्
देख मुझे कुछ सुकून मिला. फिर हम रात को 9.00 बजे करीब घर
वापस आए. मैं डोर बंद करते हुए उन्होने पूचछा- कैसी रही?
क्या?-मई बोला. पर वो जवाब ना दे कर मुस्कुराते हुए रूम की तरफ
चल दी. मई भी पीछे-पीछे आ गया. वो सारी उतरते हुए बोली तुम
खाना लगाओ मई आती हून. मई उन्हे देखना चाह रहा था पर मान
मार कर कित्चान की ओर बढ़ गया. तिफ्फ़ान बॉक्स खोल कर खाना लगा ही
रहा था की भाभी की तरफ नज़र गयी. वो सिर्फ़ ब्रा ओर पेंटी मई
थी, उन्होने भी मेरी तरफ देखा ओर मुझे अपनी ओर देखता पा कर
मुस्कुरई ओर निघट्य पहन ली. मेरा लॅंड टाइट हो चुका था. फिर हम
दोनो खाना खाने डाइनिंग-तबले पर बैठे तो मैने जैसे ही तली
उनकी ओर बधाई, उन्होने नीचे हाथ करके मेरे निक्कर के उपेर से मेरा
लॅंड पकड़ लिया ओर बोली इसे संभलो जहाँ-तहाँ खड़ा हो जाता है.
ना-नही तो-मई बोला. वो बोली मैने देखा था कित्चान मे तुम इसे दबा
रहे थे. चलो खाना खाओ. उन्होने मेरा लॅंड छोड़ दिया ओर हम दोनो
ने जल्दी से खाना ख़तम किया. उन्होने बर्तन वॉशबेसिन मे डाले ओर
बेडरूम मे आ गयी. मई बेड पर बेता था. बोली आज क्या कपड़े पहन
कर ही सोने का इरादा है. मैने जल्दी से शर्ट ओर बनियान उतरी ओर
लेट गया, निक्कर उतरने मे मुझे आज फिर शरम आ रही थी. भाभी
कुछ नही बोली लाइट ऑफ की निगठलंप ओं किया, निघट्य का बंद खोला
ओर उसे पहने हुए ही मेरे पास आ कर लेट गयी. मई सोचता रह की अब
शायद वो मेरा निक्कर उतार देंगी. पर उन्होने ऐसा कुछ नही कहा,
बोली तक गयी हों नींद आ रही है, तुम भी सो जाओ. मई मान ही मान
कूड़ता हुआ जाने कब सो गया. रात मे आख खुली तो देखा भाभी गहरी
नींद मे सो रही थी, उनकी निघट्य खुली हुई साइड मे पड़ी थी ओर
वाइट ब्रा ओर पेंटी उनके उपेर चमक रही थी. मेरी नींद गायब हो
गयी. मैने उन्हे हिला कर देख लिया वो वाकई मे गहरी नींद मे ही सो
रही थी. मैने धीरे से उनकी ब्रा की दोनो स्ट्रीप उनके कंधे से
नीचे कर दी पर पीठ पर से वो कसी हुई थी. मैने बूब्स का
ख़याल छ्चोड़ा ओर पेंटी की तरफ देखने लगा. दर तो लग रहा था
फिर याद आया भाभी भी तो मेरे निक्कर मे हाथ दल देती है.
साहस करके मैने उनकी पेंटी को पकड़ के तोड़ा खीचा ओर हाथ दल
दिया पर हाथ उनकी छूट तक नही पहुच सका. अब मुझे जोश आ
चुका था मेरा लॅंड भी ताना हुआ था मे देखना चाहता था की ये
छूट मे जाएगा कैसे. भाभी अभी भी सोई हुई थी, शायद डॉवा का
असर था जो उन्होने सोने से पहले खाई थी. मैने धीरे-धीरे उनकी
पेंटी को नीचे करना शुरू कर दिया ओर देखता रहा की कहीं वो जा
ना जाए. उनके फेले हुए पेर सीधे करके मैने पूरी पेंटी उतार दी.
अब उनकी छूट दिख रही थी. पर लॅंड इसमे कैसे जाएगा मई इस
परेशानी मे था. मैने उंगली च्छेद मे सर्काय, अंदर तोड़ा गरम ओर
गीलापन था. मैने उंगली बाहर निकल ली. अपना निक्कर उतरा ओर तरह-
तरह से पोज़िशन ले कर सोचने लगा की लॅंड इसमे जाएगा कैसे.
मुझे लगा जा सकता है अगर भाभी अपनी एक तंग के बीच मे मेरी एक
तंग ले-ले तो लॅंड शायद इस च्छेद मे चला जाए. मई धीरे से
भाभी के उपेर आया इस तरह की उनसे टच ना हो सकूँ ओर अपने लॅं
को उनकी छूट पर सेट करने लगा. पर ऐसा कुछ नही हो पाया. तो
मैने अपना लॅंड उनके हाथ मे पकड़ा दिया ओर उनके पास लेट गया ओर
अपना हाथ उनकी छूट पर रख दिया. मैने सोचा थोड़ी देर के बाद
निक्कर पहन लूँगा ओर भाभी को भी पेंटी पहना दूँगा, उन्हे कुछ
पता ही नही चलेगा पर पता नही कब मुझे नींद आ गयी. सुबह
भाभी ने मुझे उठाया बोली मेरी पेंटी तुमने उतरी. मई भी नंगा
था ओर मेरा लॅंड भी ताना हुआ था. मैने उल्टा कह दिया आप ही करती
हो सब आपने ही मेरा निक्कर भी उतारा है. भाभी समझ गयी की
मैने ही सब किया है बोली तुम बहुत नॉटी हो रहे हो मैने कहा
मई तो बस ये देख रहा था की मेरा लॅंड आपकी छूट मई जाएगा
कैसे. पर जेया नही पाया. आज रात को मई तुम्हे बताऊंगी. उन्होने
कहा. फिर मई रोजाना की तरह घर चला गया. घर पहुच कर पता
चला की मों & दाद बाहर जेया रहे हैं ओर शाम तक वापस आएँगे.
मों ने पूचछा यही रुकोगे या तुम्हे बुआजी के पास छोड़ड़ दे. मैने
कहा यही रुक जाऊँगा. तो मों बोली फिर कपड़े ले कर अपनी भाभी के
घर ही चलो. मई यहाँ की कीस उन्ही को दे दूँगी. मेरी तो मान की
मुराद पूरी हो रही थी. मैने जल्दी से कपड़े उठाए ओर हम वापस
भाभी के घर पहुच गये. मों ने भाभी से कहा हम काम से बाहर
जेया रहे हैं, वापसी मे शाम हो जाएगी, तुम्हे कहीं जाना ना हो तो
वोनू को यही छोड़ड़ दे या फिर बुआजी के घर पर छोड़ड़ देंगे. भाभी
मुझे देख कर मुस्कुरई, बोली नही मुझे आज कही नही जाना आप इसे
यही छोड़ड़ दो. मों-दाद के जाने के बाद भाभी ने पूछा कपड़े क्यो
लाए हो मैने कहा नहाने के बाद पहनने के लिए. बोली तो चलो
फिर नहा लो. मैने कपड़े उतरे ओर टवल लपेट कर बातरूम मे चला
गया ओर डोर ऐसे ही बंद कर लिया क्योंकि उसकी कुण्डी मेरी पहुच से
बाहर थी. मई शावर के नीचे खड़ा हुआ ही था की दरवाजा खुला
मैने देखा तो भाभी आ रही थी वो उस समय भी निघट्य ही पहने
थी. बोली- मुझे भी नहाना है चलो साथ मे ही नहाते हैं. उन्होने
अपनी निघट्य उतार कर कील पर तंग दी, बात-टब मे शॅमपू डाला ओर
उसे भरने के लिए टंकी चालू करके खुद भी शावर के नीच आ कर
खड़ी हो गयी. पानी उनके सर से बहता हुआ उनकी ब्रा ओर पेंटी पर आ
गया ओर उनमे से सब कुछ दिखने लगा. मई उनके आयेज दीवार से ही
लगा खड़ा था ओर पानी मुझ पर भी गिर रहा था. अचानक वो नीचे
झुकी ओर जब तक मई कुछ समझ पता उन्होने मेरा अंडरवेर नीचे
खिच दिया. अब मई एकदम नंगा खड़ा था. मैने अपना अंडरवेर उपेर
करना चाहा पर उन्होने मुझे अपने ओर दीवार के बीच मे दबा लिया.
उनके बूब्स मेरे मूह एक एकदम सामने थे ओर वो अपने हाथ से मेरा लॅंड
पकड़ रही थी. अचानक मैने उंकीक बूब पर काट लिया. वो सिसकारी
ले कर ज़रा सा पीछे हटी ओर जब तक वो कुछ बोलती मैने उनकी पेंटी
पकड़ कर नीचे खिचनी शुरू कर दी. उन्होने मुझे रोका ओर खुद ही
पेंटी उतार दी ओर ब्रा की स्ट्रीप खोलने लगी उनके हाथ पीछे पीठ पर
थे ओर ब्रा मे उनके बूब्स ताने हुए थे मैने फॉरन हाथ मे उनके बूब्स
पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए. "अया"- वो बोली तुम तो एक ही दिन मे
मर्द हो गये. उन्होने ब्रा उतार कर वही दल दी ओर बोली चलो टब मे
आ जाओ. फिर हम दोनो टब मे जेया कर बेत गये. मैने कहा अब बताओ
मेरा लॅंड आपकी छूट मे कैसे जाएगा. वो बोली- बताऊगी सबर करो.
वो बहुत देर तक मेरे लॅंड को अपने हाथों मे ले कर सहलाती रही ओर
मई उनके बूब्स पर हाथ फेरता रहा. फिर वो उठी ओर टब से बाहर
निकल गयी मैने देखा तो मुझे भी बाहर आने का इशारा किया. मई
भी उठ कर बाहर आ गया. वो झुक कर टब की साइड को पकड़ने लगी,
मैने पूचछा भाभी क्या कर रही हो. वो बोली मेरे पीछे आओ. मई
पीछे आ गया. वो बहुत झुक गयी थी. उनके चूटर मेरे लॅंड के अब
सामने ही थे. बोली- अब तुम दल सकते हो. पीछे से उनकी गांद भी
दिख रही थी. सॉफ ओर चिकनी. उनके पुर शरीर पर कोई बॉल नही
था ओर मेरे तो उस समय बॉल होने का सवाल ही नही उठता था. मई
उनके पीछे आ गया ओर पूचछा भाभी कॉआन से छेड़द मे डालना है. वो
बोली नीचे वाले मे. वही उनकी छूट का छेड़ था. अब मैने ध्यान से
देखा उनकी छूट मे 2 छेड़ दिख रहे थे मैने हाथ से उनकी छूट को
छुआ ओर बोला भाभी यहाँ तो 2 छेड़ हैं. एक नन्हा सा ओर एक बड़ा सा.
उन्होने अपना हाथ अपनी छूट पर रखा ओर छेड़ दिखाते हुए बोली इसमे
डालो. मैने पीछे से अपना ताना हुआ लॅंड पकड़ कर उसमे डालने की
कोशिश की पर लॅंड था की जा ही नही रहा था. एक-दो बार गया भी
पर फॉरन ही बाहर भी आ गया. भाभी बोली यहाँ नही हो पाएगा
चलो कमरे मे चलते हैं. ओर हम नंगे भीगे हुए ही रूम मे
गये. वहाँ भाभी बोली पहले तुम्हारे लॅंड से माल निकलना होगा तब
ये जेया पाएगा. कह कर उन्होने मुझे चेर पर बिताया ओर खुद नीचे
बात कर मेरे लॅंड को मुट्ठी मे ले कर उपेर-नीचे करते हुए रगार्ने
लगी. बहुत देर तक वो रगर्ति रही मेरे लॅंड मे जलन होने लगी
मैने उन्हे रोका भाभी जलन हो रही है अब रहने दो. पर वो बोली
माल तो निकलना ही पड़ेगा. उन्होने मेरे लॅंड पर 4-5 ठंडी फ़ूके
मारी ओर मेरे लॅंड को मूह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया. वो मेरे
सामने नंगी बती थी पर मई चाह कर भी उन्हे चू नही पा रहा
था क्योकि मई चेर पर था ओर वो नीचे. पर वो मेरा लॅंड चूस रही
थी तो मज़ा बहुत आ रहा था. मेरा लॅंड बुरी तरह से ताना हुआ था
ओर गर्मी से जल रहा था. उनकी पूरी कोशिश के बाद भी जब मेरे
लॅंड से कुछ नही निकला तो वो मुझे बेड पर लेटने को कह कर आल्मिराह
की ओर बढ़ गयी, उन्होने कोई क्रीम निकली ओर मेरे पास आ कर मेरे
लॅंड पर रगार्ने लगी. ये क्या है भाभी मैने पूचछा तो बोली मई
तुम्हारे लिए कुछ ओर लाई थी पर जब तुम्हारे लॅंड से कुछ निकल ही
नही रहा है तो इस क्रीम से ही काम चल जाएगा. क्रीम लगाने के
बाद वो बेड पर बेत गयी ओर अपने पेर फेला कर मेरे पेर अपने पेर से
फसा लिए इस तरह से मई सरक कर उनके पास हो गया ओर मेरा लॅंड
उनकी छूट के दरवाजे पर पहुच गया ओर मेरे मूह के सामने उनके
बूब्स आ गये. उन्होने मेरा लॅंड पकड़ कर अपनी छूट मे घुसेड लिया
ओर मुझे वैसे ही रोक कर अपने चूटर धीरे-धीरे हिलने लगी. अब
मेरा लॅंड उनकी छूट मे अंदर बाहर हो रहा था. काफ़ी देर तक वो
ऐसे ही करती रही ओर फिर उनकी छूट से जैसे ज्वालामुखी फूट कर
बाहर आ गया. वो बोली ऐसे निकलता है माल. पर मेरा तो नही निकला
आप तो कह रही थी की तुम्हारा माल निकलेगा. उन्होने कहा तुम अभी
छोटे हो शायद इसलिए अभी तुम्हारा माल नही निकल रहा है. कुछ
दिन बाद निकालने लगेगा. फिर हमने पुर दिन ऐसे ही मज़ा लिया
भाभी ओर मई पुर दिन नंगे ही रहे. ओर दिन मे कम से कम 7-8 बार
भाभी का माल निकल गया. हुँने शहद लगा कर एक-दूसरे को चटा.
भाभी ने मुझे कांडों भी दिया जो वो मेरे लिए लाई थी. उसे देख
कर मई समझा की वो बूब्स पर पहनते हैं. पर भाभी ने बताया की
इसे आदमी अपने लॅंड पर पहनते हैं जिससे औरतों के बच्चा नही
होता. फिर मैने उससे बहुत मज़ा किया, जब भाभी कित्चान मे खाना
बना रही थी मैने उसका एक सिरा उंगली दल कर भाभी की छूट मे
घुसेड दिया वो कहती ही रह गयी ये क्या कर्रहे हो ओर मैने उसके
दूसरे सिरे से फूक मार कर उसे उनकी छूट के अंदर ही फूला दिया.
भाभी को भी बहुत मज़ा आया. फिर खाना खाने के बाद भाभी बेड
पर लेट गयी ओर मई उनके उपेर उल्टा लेट गया वो मेरे लॅंड मे शहद
लगा कर चूस रही थी ओर मई बार बार कांडों को उंगली से उनकी
छूट मे दल कर हवा भरता ओर फिर उसे बाहर निकलता. भाभी
खुशी से सिसकारी भर रही थी ओर मेरे लॅंड को ज़ोर-ज़ोर से चूज़
रही थी पर मेरे लॅंड से कुछ निकल ही नही रहा था. उनकी छूट से
कई बार माल निकल चुका था. उस दिन से हम लोग बहुत मज़े करने
लगे हम साथ-साथ नंगे ही सोने लगे. साथ मे ही सू-सू करने जाते
भाभी मेरा लॅंड पकड़ कर ही मुझे पेशाब करती ओर धार को इधर
उधर उछालती रहती. मई भी जब वो पेशाब कर रही होती उनकी छूट
मे कभी उंगली घुसेड देता ओर कभी पूरा हाथ लगा कर बंद कर
देता. फिर उनकी सस्यू एक साथ नीचे गिरती. उसके बाद हम एक दूसरे को
पानी से सॉफ करते ओर फिर बेड पर फूक मार कर सुखाते. एक रत
भाभी मे मेरा लॅंड का माप लिया बोली लगभग 4' का हो गया है ओर
अभी तो तुम 13 साल के हो जब तुम 20 साल के होगे ये 7-8 इंच का हो
जाएगा तब बहुत मज़ा आएगा. मैने भी एक बार जब वो सो रही थी
एक सीक उनकी छूट मे दल दो वो अचानक जाग गयी बोली ऐसा नही
करते चोट लग जाती है अंदर. मैने कहा मई तो गहराई माप रहा
था. वो हास पड़ी बोली इसमे मापा नही जाता इसमे सब तरह का लॅंड आ
जाता है. ऐसे ही कुछ दिन निकले की एक दिन भैसाहब आ गये. भाभी
को पता था की भैसाहब आने वेल हैं इसलिए उस दिन हम कपड़े
पहन कर सोए. रात मे बाहिसहब आए उन्होने मुझे गोड मे उठाया
ओर ड्रॉयिंग रूम मे सोफे पर लिटा दिया. मई जाग चुका था ड्रॉयिंग
रूम की लाइट बंद थी मैने उठ कर विंडो कर्टन तोड़ा सा सरकया
ओर दूसरी तरफ देखने लगा. भैसाहब बेड पर बेते थे ओर भाभी
उनकी गोड मे वो भाभी को किस कर रहे थे उनके लिप्स ओर चिक्स पर.
भाभी भी जवाब दे रही थी. फिर उन्होने अपना हाथ भाभी की निघट्य
मे दल दिया ओर उनके बूब्स सहलाने लगे. फिर उन्होने भाभी की निघट्य
उतार दी ओर खड़े हो कर अपनी बनियान उतरने लगे भाभी ने उनके
सीने पर थोड़े किस किए. उन्होने बनियान उतार कर भाभी की ब्रा
खोल दी भाभी के बूब्स आज़ाद थे. फिर उन्होने भाभी की पेंटी भी
उतार दी. वो दोनो धीरे-धीरे कुछ बातें भी कर रहे थे. मेरा सारा
ढयन उन्ही पर था. भाभी ने अंडरवेर के उपेर से ही भैसाहब का
लॅंड सहलाना शुरू कर दिया था. बहासाहब ने अचानक उन्हे गोड मे
उठाया ओर रूम से बाहर चले गये. मई समझ गया शायद बातरू
मे ही गये होंगे. मान तो बहुत था फिर भी मई बाहर नही निकला ओर
सोफे पर वापस लेट गया. पर नींद नही आई. थोड़ी देर के बाद मुझे
उनकी आहत फिर से सुनाई दी तो मई फिर खीरकी पर जाम गया.
भैसाहब अभी भी भाभी को गोड मे लिए थे ओर उनके लिप्स ओर नेक
पर किस कर रहे थे. इस समय वो भी नंगे थे शायद अपना
अंडरवेर बातरूम मे ही छोड़ड़ आए थे. उनका लॅंड लगभग 6' लंबा
था. उन्होने भाभी को बेड पर लिटाया उनके पेर अपने कंधो पर रख
लिए ओर फिर मुझे आयेज का धिकना बंद हो गया अब मुझे भैसाहब की
पीठ ओर चूटर नज़ा आ रहे थे ओर भाभी का चेहरा. मैने परदा
तोड़ा सा ओर सरकया तो भाभी ने एकद्ूम से आख मारी ओर आख से ही
परदा बंद करने को कहा. मैने परदा तोड़ा सा वापस सरकया पर
उदार देखते रहने का लोभ नही छोड़ड़ सका. भाभी के मूह से आहें
निकल रही थी ओर भैसाहब के चूटर ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे, थोड़ी
देर बाद उन्होने लॅंड बाहर निकाला ओर भाभी तो उल्टा करके आधा बेड
पर ओर आधा फर्श पर लटका दिया, उनकी टाँगे पकड़ी ओर उपेर उठा कर
अपनी कमर पर टीका ली ओर फिर धक्के मरने लगे. हलकी उधर
निगठलंप ही ओं था पर मुझे सब सॉफ दिख रहा था क्योंकि मेरी
साइड मे बिल्कुल अंधेरा था. थोड़ी देर तक धक्के मरने के बाद वो
भाभी के उपेर ही गिर गये. फिर कुछ देर बाद उठ कर उन्होने अपने
लॅंड पर से कांडों निकाला ओर भाभी के मूह मे रख दिया जिसे भाभी
ने थोड़ी देर चूस कर थूक दिया. अब भाभी उनका लॅंड छत कर सॉफ
कर रही थी. उन्होने एक बार फिर विंडो की ओर देख कर आख मारी
थी मई समझ नही पा रहा था की वो मुझे डेक्ज़ कैसे रही है
क्योकि निगठलंप विंडो के ठीक उपेर लगा था ओर मेरी तरफ सिर्फ़
अंधेरा ही दिख सकता था ओर कुछ नही. फिर भैसाहब ने एक बॉटल
ली ओर भाभी के बूब्स ओर छूट पर कुछ माला ओर फिर उनका दूध पीने
लगे. मई समझ गया की उन्होने शहद ही लगाया होगा. दोनो बूब्स को
काफ़ी देर तक चूसने के बाद उन्होने भाभी की छूट को चाटना शुरू
कर दिया. भाभी ने भी उसी बॉटल से शहद हाथ मे ले कर
भैसाहब का लॅंड पकड़ लिया फिर भैसाहब बेड पर लेट गये भाभी
उनके उपेर उलट कर आ गयी अब भैसाहब का लॅंड ओर भाभी का मूह
खीरकी की तरफ था पर मई भैसाहब का मूह ओर भाभी की छूट नही
देख सकता था. भाभी जल्दी-जल्दी उनका लॅंड चूस रही थी ओर बार-
बार खीरकी की ओर देख कर मुस्कुरा रही थी. बाहिसहब का लॅंड फिर
से टन चुका था ओर फिर कुछ देर के बाद उन्होने अपना हाथ अपने
लॅंड पर रख कर शायद भाभी को ओर चूसने से रोकना चाहा पर
भाभी ने उनका हाथ हटा दिया ओर चूस्टी रही. मेरा लॅंड भी ताना
हुआ था ओर मई अपने एक हाथ से उसे सहला रहा था. भाभी ने कुछ
देर ओर चूसा ओर फिर भैसाहब बड़ी ज़ोर से हीले भाभी ने खीरकी की
तरफ देख कर मूह खोला ओर अपने मूह मे भैसाहब का माल धीखाया.
ओर फिर से भैसाहब का लॅंड चाटने लगी. थोड़ी देर बाद दोनो बेड पर
लेट गये. फिर मई भी लेट कर सो गया. सुबह भाभी ने मुझे जगाया
ओर बोली बड़े मज़े आ रहे थे रात ओर अब 8 बजे तक सो रहे हो. मई
दर गया कहीं भैसाहब ना सुन ले. पर वो बोली की भैसाहब नहा
रहे हैं. तो मैने भी पूच लिया आपको कैसे पता चला की मई
देख रहा हून जो आप बार-बार आख मार रही थी. वो बोली अंदाज़ा
लगाया ओर अब तुम घर जाओ एक हफ्ते के बाद सोने के लिए आना. एक
हफ़्ता? मैने कहा. हाँ जी एक हफ़्ता वो मुस्कुरई. फिर मई घर आ
गया. बाहिसहब पुर एक हफ्ते तक रहे ओर मई अपने घर पर. अब
मुझे अपना लॅंड रगार्ने की आदत सी हो गयी थी. पर अभी तक उसमे
से कुछ नही निकला थंऐ समय मिलते ही कई-कई घंटो तक रग्रा
करता की शायद कुछ निकले पर कुछ नही आता था. खेर एक हफ़्ता
बिता भाभी-बाहिसहब घर आए बाहिसहब ने चलते समय मुझसे
कहा भाई वीनू मई जेया रहा हून आज रात से तुम्हे अपनी भाभी के
पास सोना है. मई कुछ घबराया ओर कुछ मुस्कुराया. फिर वो चले
गये.


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उस दिन के बाद --पार्ट -२

उस दिन के बाद --पार्ट -२
आप सभी दोस्तों को राज शर्मा का प्यार भरा नमस्कार . दोस्तो आपने उस दिन के बाद -पार्ट -१ को काफ़ी पसंद किया
अब आप इस कहानी के दूसरे पार्ट का मज़ा लीजिए
अगले दिन भाभी की हालत खराब थी उन्हे सर्दी हो गयी थी. ओर
नहाओ बारिश मे मेने कहा ओर चला आया, मों को बता दिया की भाभी
की तबीयत खराब हो गयी है. उस रात फिर मों ही भाभी के पास
रुकी. मे घर पर पापा के पास. अगले रात को फिर मुझे ही भाभी के
पास जाना था उनका नंगा बदन बर्बर मेरी आखों के सामने कोंध
जाता था. खेर मे भाभी के घर गया खाना अपने साथ ले कर गया
जो मों ने बना कर दिया था. मेने ओर भाभी ने खाना खाया वो ठीक
लग रही थी पर बीच-बेच मे करहती जाती थी. दर्द हो रहा है
मेने पूचछा. हन वो बोली पीठ, सर ओर सीने मे काफ़ी दर्द है.
खाना खा कर हम लेट गये पर वो कराह रही थी. मेने पूचछा "डॉवा
ली?" वो बोली हन कल तुम्हारी मों ने विक्क्स लगा दी थी काफ़ी आराम
मिला था. तो आज भी लगा लो मेने कहा. वो बोली पीठ पे कैसे
लगाऊं. लाओ मे लगा देता हून-मेने कहा. उन्होने विक्क्स दी. पर वो
गौण पहने थी विक्क्स लगती कैसे. मैने पूचछा कैसे लगाऊं. वो
मुस्कुरा दी. उन्होने गौण उतार दिया. अब वो ब्लॅक ब्लाउस ओर पेंटी मे
थी. बोली ब्लाउस भी उतार देती हून वरना ब्लाउस मे ही लग जाएगी.
मेने मूह घुमा लिया. वो बोली लगा दो. मेने देखा वो उल्टी लेती थी ओर
उनकी पीठ पर अभी ब्लॅक ब्रा बाकी थी. मेने लंबी साँस ली ओर
विक्क्स लगाने लगा पीठ पर. पर हाथ बार-बार ब्रा की स्ट्रीप से उलझ
जाता था. भाभी बोली अभी स्ट्रीप खोल दो विक्क्स लगाने के बाद वापस
बाँध देना. स्ट्रीप मेने खोल दी पर उनकी पूरी नंगी पीठ देख कर
मेरा लॅंड फिर सर उठाने लगा. मेने किसी तरह उसे रोका ओर विक्क्स
लगाने लगा पर अभी मई पूरी तरह लगा भी नही पाया था की
भाभी ने अचानक करवत् ले ली. अब वो सीधी लेती थी उनकी ब्रा भी
खुली हुई थी. पर एक साइड से उनके बूब से चिपकी हुई थी. पर एक
बूब उनका सॉफ दिख रहा था.
मेने झटके से उनके चेहरे की तरफ देखा वो शायद सो गयी थी ओर
नींद मे ही उन्होने करवट ले ली थी. पर उनके बूब का मे क्या करता
बार-बार आँख उसी तरफ चली जाती थी. दिल कह रहा था वो तो
सोई हुई है फिर क्या दर्र है. पर मई जीटा मेने उनकी ब्रा उठा कर
उनके बूब पर रखी ही थी की उन्होने ऐसा मूह बनाया जैसे च्चिंक आ
रही हो पर आई नही उन्होने आँख खोली बोली - वीनू प्लीज़ सीने ओर
गले पर भी विक्क्स माल दो कहते हुए उन्होने अपनी ब्रा उठा कर साइड मे
रख दी ओर आखों पर कलाई रख ली. अफ क्या पॉज़ था. मे एकदम
देखता ही रह गया. वो फिर कराह रही थी. प्लीज़ वीनू माल दो बहुत
दर्द हो रहा है. हार कर मैने उनके गले पर विक्क्स लगाई वो बोली
सीने पे भी लगा दो. मेने उपेर उपेर से ही लगा दी तो वो बोली दोनो
के बीच मे भी लगा दो. उनकी बूब्स की दोनो चोटियाँ खड़ी हुई थी.
लेते होने पर भी ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी पर्वत की तरह से
खड़ी होंए विक्क्स लगाने लगा तो मेरा लॅंड फिर खड़ा होने लगा.
मेने भाभी के चेहरे की ओर देखा वो वैसे ही आखों पे हाथ रखे
लेती थी. मैने बनियान उपेर उठा कर अपने लॅंड को सीधा करना
चाहा पर तभी उन्होने आख पर से हाथ हटा लिया ओर बोली क्या कर
रहे हो? मई दर्र गया बोला - "कुछ नही". "कुछ तो"-वो बोली. ये क्या
कर रहे हो कहते हुए उनहोले निक्कर के उपर से ही मेरा लॅंड पकड़
लिया. अरे ये तो बहुत टाइट हो रहा है वो दबाते हुए बोली. मई
हक्का-बक्का था. होश आया बोला छोड़ो मुझे टाय्लेट जाना है ज़ोर से
आ रही है. ओह वो बोली सस्यू आ रही है, हन मैने कहा अब मेरा
लॅंड ढीला होने लगा था पर उन्होने छ्चोड़ा नही था. पकड़े हुए ही
बोली सस्यू जाना है सच मई. हन मैने कहा आप छ्चोड़ो ना इसे. वो
बोली नही तुम झूठ बोल रहे हो तुम्हे टाय्लेट नही जाना है. मेने
कहा आपको कैसे मालूम की मुझे नही जाना है. वो बोली अगर तुम्हे
टाय्लेट आ रही होती तो तुम्हारा सस्यू लूस नही होता. उन्होने अभी तक
मेरा लॅंड छ्चोड़ा नही था पकड़े ही हुए थी निक्कर के उपर से ही.
नही मैने कहा मुझे सच मे टाय्लेट जाना है. ठीक है उन्होने मेरा
लॅंड छ्चोड़ दिया. चलो तुम्हे टाय्लेट करा डून. "करा डून मतलब"
मई खुद कर आऊंगा. आप कपड़े पहन लो मेने कहा. पर वो बोली नही
कपड़े तो अब तुम्हे टाय्लेट करने के बाद ही पहनेंगे. चलो निक्कर
उतरो. नही मई कर आऊंगा. पर वो नही मानी बोली चुपचाप उतार दो
वरना मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी. पर मे कैसे मान जाता. मई
उठने लगा आप ऐसे ही करती हो मे आपसे बात नही करूँगा. पर
उन्होने मुझे फॉरन पकड़ लिया. जबरन मुझे बेड पर गिरा दिया ओर
मेरे उपेर चाड गयी बोली मुझसे झूठ बोल रहे हो. अब देखती हून
कितनी टाय्लेट आ रही है तुम्हे, निक्कर छ्चोड़ दो वरना फट जाएगा.

उन्होने मेरे हाथ अपने परॉन के नीचे दबा लिए ओर ज़बरदस्ती मेरा
निक्कर उतार लिया ओर मेरा लॅंड पकड़ कर बोली अभी इतना टाइट था अब
इतना लूस है. झूठ बोल रहा है की सस्यू आ रही है. चलो अब
सस्यू करने. कह कर वो मेरे उपेर से हट गयी. पर मेरा लॅंड नही
छ्चोड़ा. बोली चलो बातरूम मे. पर मेरा लॅंड तो छ्चोड़ो मे
चिल्लाया. "ओहो तो इसे लॅंड कहते हैं". अब तो मई ओर भी घबरा
गया. भाभी प्लीज़ छ्चोड़ो नेया. पर वो नही मानी बोली अब तो तुम्हारा
लॅंड तभी छ्छूतेगा जब तुम टाय्लेट करने चलोगे. "अफ चलो" मैने
अपनी बनियान नीचे करते हुए कहा अब तो छ्चोड़ दो. वो बोली बातरूम
मे. मेरा लॅंड खिचते हुए वो उल्टी चल दी मे भी साथ-साथ चल
दिया. उसके बूब्स ताने हुए थे. क्योकि वो मेरा लॅंड पकड़े उल्टी चल
रही थी इसलिए उसके बूब्स बिल्कुल मेरे सामने थे. वो मेरे लॅंड को
हाथून मे दबाए तो थी ही साथ ही उसे सहलाती भी जेया रही थी
इसलिए मेरा लॅंड फिर से टाइट ताना गया. उन्होने मेरा लॅंड देखा ओर
बोली अभी से ये इतना बड़ा है जब तुम ओर बड़े होगे तो कितना बड़ा हो
जाएगा. मे लॅंड च्छुपाने लगा तो बोली लगता है टाय्लेट तुम्हे ज़ोर से
आ रही है जल्दी चलो. मे टाय्लेट की तरफ बढ़ा तो उन्होने मुझे
बातरूम की तरफ खीच लिया. मेने कहा भाभी टाय्लेट जाना है. वो
बोली बातरूम मे करना. मेने कहा- बातरूम मे? वाहा तो बात लेते
हैं. वो बोली टाय्लेट भी कर लेते हैं, अब चलो.ओर वो मुझे ले कर
बातरूम मे घुस गयी. मेरा निक्कर उनके हाथ मे था. बातरूम मे
अंदर ले जेया कर उन्होने मेरा लॅंड छ्चोड़ा तो मैने चैन की साँस ली.
पर इतनी देर मे उन्होने दरवाजा बंद करके चटकनी लगा दी ओर मेरा
निक्कर शवर की रोड पर लटका दिया, जहाँ मेरा हाथ नही पहुच
सकता था. मैने अपना लॅंड अपने हाथो के बीच मे च्छूपा लिया.
उन्होने मेरी तरफ देखा, मुस्कुरई ओर बोली-- अब पेशाब नही आ रही
क्या? जो अपना, क्या कहते हैं इसे? "हन लॅंड". अपना लॅंड हाथों मे
छुपाए खड़े हो. मुझे बड़ी शरम आ रही थी. मैने कहा आप जाओ
मई आता हून. पर वो मेरे ओर पास आ गयी. बोली तुम झूते हो मई
जानती हून तुम्हे सस्यू नही आ रही है. अब कर के दिखाओ कहते हुए
उन्होने अपना हाथ मेरे हिप्स के बीच मे कर दिया ओर मेरी गांद को
सहला दिया. मई जैसे काप सा गया. "भाभी" च्चिलते हुए मेने उनके
बूब्स को नोच लिया क्योंकि वो मेरे एकद्ूम सामने थे. "अया" उन्होने
सिसकारी ली ओर बोली आज तुम्हे सस्यू किए बागेर जाने नही दूँगी.
चलो सस्यू करो आ रही है नेया कहते हुए वो मेरे आयेज बेत गयी ओर
मेरे दोनो हाथ ज़बरदस्ती मेरे लॅंड पर से हटा दिए. मेरा लॅंड फुट
से बाहर आ कर टन गया. उन्होने फॉरन उसके उपेर एक चुम्मा दिया ओर
बोली करो पेशाब वरना आज तुम यही बंद रहोगे ऐसे ही. अब मे दर
ओर गया. मेने कहा आप इसे छ्चोड़ो तो सस्यू करूँ नेया. भाभी ने
हेस्ट हुए मेरा लॅंड छ्चोड़ दिया बोली करो. पर आप सामने से तो हटो
मे बोला. वो मेरे पीछे आ गयी अपने बूब्स मेरे कंधो पर टीका
दिए ओर बोली अब करो मे देखूँगी तुम्हे सू-सू आती भी है या नही .
मैने कहा आप हटो मे नली पर कर लूँगा पर वो बोली यही करो.
मैने कहा यहाँ बीच बातरूम मे? वो बोली हन यही. अफ मया, मई
साँस भर कर रह गया. उन्होने फिर से मेरा लॅंड पकड़ लिया ओर बोली
तुम बहुत देर से बहाने कर रहे हो चलो अब सस्यू करो कहते हुए
उन्होने मेरे लॅंड की खाल पीच्चे को खीच ली. अब मेरा लॅंड ओर कस
कर बाहर आ गया. वो बोली करो. मैने पूरी कोशिश की पर पेशाब
तो वाकई मे आ ही नही रही थी. 10-12 बूँद तपाक कर रह गयी.
बस इतनी ही वो बोली ओर फिर मेरे आयेज आ गयी. उन्होने मेरे लॅंड को
झटका सा दिया कुछ बूंदे उनके उपेर जा गिरी. वो बोली- "है-है"
तुम्हारी पेशाब मेरे उपर आ गयी है सॉफ करो. मेने कहा आप मेरे
आयेज आई ही क्यो? अब मई सॉफ नही करूँगा आप खुद ही करो.
उन्होने घूर कर मुझे देखा ओर फिर मुस्कुरा कर अपने बदन पर
हाथ फिराया ओर मेरी सस्यू अपने पुर बदन पर रग़ाद लिंऐ देखता
ही रह गया. अब भी उन्होने एक हाथ से मेरे लॅंड को पकड़ा हुआ था.
मेरा लॅंड फुल टाइट था ओर मस्ती से तनटना रहा था. वो बोली ये
अभी तक इतना टाइट क्यो है. पता नही मैने कहा ओर इसके साथ ही
मेरा लॅंड सिकुड़ना शुरू हो गया. वो बोली लगता है तुम्हारी सस्यू
ख़तम हो गयी पर अब मुझे सस्यू आ रही है. मैने कहा मेरा
निक्कर दे दो फिर आप सस्यू कर आना. वो बोली नही अभी नही पहले
मई भी सस्यू कर लून. चलो मेरी पेंटी उतरो. नही, मे पीछे हटने
लगा पर हट कैसे सकता था उन्होने मेरा लॅंड सख्ती से पकड़ रखा
था. बोली उतरो वरना मे तुम्हारा लॅंड नही छ्ोड़ूँगी. तुम भी देखो
सस्यू कितनी की जाती है. मैने कहा आप उतार लो मे खड़ा तो हून पर
वो नही मानी हार कर मुझे उनकी पेंटी उतरनी ही पड़ी मे उनकी पेंटी
नीचे की ओर सरका रहा था ओर वो मेरे लॅंड को पकड़े हुए खड़ी थी
बिल्कुल ऐसे की उनके बूब्स मेरे मूह से लग रहे थे. खेर मैने पेंटी
उतार दी तो वो मेरे लॅंड को पकड़े हुए वही बेत गयी ओर पेशाब
करने लगी बोली देखो ऐसे करते हैं सस्यू. मे पहली बार किसी औरत
को पेशाब करते देख रहा था. पेशाब बाहर आने का रास्ता देखते
ही मुझे फिर से शरम आई ओर मे पीच्चे हटा ही था की भाभी
मेरा लॅंड पड़के हुए खड़ी हो गयी. वो अभी भी सस्यू कर रही थी
सारी सस्यू उनके परॉन पर आ कर बहने लगी. वो बोली ये तुमने क्या
किया. मैने कहा- क्या किया मैने आप खुद खड़े हुई. वो बोली तुम
पीच्चे हुए तो मुझे खड़ा होना पड़ा. मई उनकी सस्यू देख रहा था जो
एक च्छेद से निकल कर उनके परॉन से बहती हुई नीचे गिर रही थी.

फिर उन्होने सस्यू करनी बंद कर दी. अब तो छ्चोड़ दो मेरा लॅंड अब तो
आप भी सस्यू कर चुकी मेने लगभग चिल्लाते हुए कहा. उन्होने मेरा
लॅंड छ्चोड़ दिया. मई अपने निक्कर की तरफ बढ़ा पर वो उपेर लटका
undefined हुआ था मेरा हाथ नही पहुच सकता था. मेरा निक्कर दो भाभी-
मेने कहा. वो बोली देती हून पहले सू-सू तो धो लू. मैने जल्दी से
हाथ धोए ओर बोला अब लाओ निक्कर. "ओर लॅंड नही धूगे"-वो बोली.
गंदा रह जाता है ऐसे चलो यहाँ आओ. मे फिर वाश्बेसिन की ओर
बढ़ गया. जैसे ही मैने पानी के लिए वाश्बेसिन मे हाथ डाला
उन्होने फिर से मेरा लॅंड पक्कड़ लिया बोली तुम पानी डालो मे धो देती
हून. मैने कहा नही मे धो लूँगा. वो बोली सही से सॉफ नही होगा
मे धो देती हून. मेरे पास कहने को कुछ नही था जान गया था वो
वही करेंगी जो उनके मान मई है. सो पानी अपने लॅंड पर डालने लगा
ओर वो उसे धीरे-धीरे रगार्ने लगी. मेरे लॅंड मे फिर से सख्ती
आने लगी. वो बोली लगता है फिर से सस्यू आ रही है. मे शर्मा
गया बोला नही आ रही है. पर ये तो फिर से टाइट हो रहा है वो
बोली. मैने कहा पता नही क्यो टाइट हो रहा है. वो बोली मई बता
दूँगी क्यो टाइट हो रहा है. कहते हुए उन्होने मेरा लॅंड छ्चोड़ दिया
ओर बोली अब मे पानी डालती हून तुम सॉफ करो. ये सॉफ हो चुका है
भाभी मई बोला. वो बोली ये तो सॉफ हो चुका है पर अभी ये रह
गयी है. उन्होने अपनी छूट की तरफ इशारा किया. बोली चलो तुम
इसे सॉफ करो. मेरे लाख माना करने फिर भी वो नही मानी ओर मुझे
उनकी छूट सॉफ करने को तैयार होना पड़ा. उन्होने हाथ मे पानी
भर कर अपने पेट पर डाला. जो बहता हुआ उनकी छूट तक आ गया.
मैने जल्दी से उनकी छूट पर हाथ फिराया ओर बोला हो गयी सॉफ अब
चले. वो बोली अभी कहा हुई, क्या मैने ऐसे है सॉफ किया था
त ुम्हारा लॅंड? ठीक से सॉफ करो वरना निक्कर नही मिलेगा ओर आज
यही बंद रहोगे मेरे साथ. "ओफो" डालो पानी, कर रहा हून सॉफ-
कहते हुए मैने अपना हाथ फिर से उनकी गीली छूट पर रख दिया. वो
मुस्कुरई ओर पानी डालने लगी. बोली- अभी से सीख जाओगे तो अपनी बीवी
की छूट भी सही से सॉफ कर सकोगे. मैने जल्दी-जल्दी छूट पर
हाथ फिराया इसी बीच मेरी उंगली उसके छूट के च्छेद मेभी चली
गयी. हन यही पर रगर के सॉफ करो- वो बोली. अब मुझे भी मज़ा
आ रहा था. मई मज़े से अपनी उंगली उसकी गीली छूट मे घूमने लगा.
थोड़ी देर बाद मई बोला- अब बहुत हो गया भाभी, अब चलो. उसने
अपनी पेंटी वही पर छ्चोड़ दी ओर दरवाजे की तरफ चल दी. मैने कहा
भाभी मेरा निक्कर तो दे दो. उसने मेरा निक्कर उठाया, दरवाजा खोला
ओर बाहर चल दी. मैने कहा भाभी कुछ पहन तो लो ओर मेरा निक्कर
दो मई भी पहन लू. उसने कहा- मेरी पेंटी गीली हो चुकी है, अंदर
जा कर पहन लूँगी. मैने कहा मेरा निक्कर तो दे दो. उसने कहा अभी
गीले हो पहले टवल से पोंच्छ कर सूखा तो लो. नही रहने दो, मई
ऐसे ही पहन लूँगा- मई बोला. पर वो बोली- नही इस तरह से मेल
जमा हो जाता है. पहले सूखा लो. पर मुझे बातरूम से बाहर आते
हुए शरम आ रही थी. क्योकि बातरूम लॉबी के बाहर बना था. ओर
रूम तक खुले आसमान के नीचे से हो कर जाना पड़ता था. पर जब वो
मेरा निक्कर ले कर चली गयी तो मई वहाँ नंगा खड़ा हुआ क्या कर
सकता था. मेरा लॅंड मुरझाया हुआ लटका था. पर जैसे ही मे भाभी
के बूब्स ओर छूट के बारे मे सोचने लगा, फिर से तनटानने लगा.
मुझे लगा जैसे मैने कुछ मिस कर दिया मुझे भाभी की छूट को
ओर सहलाना चाहिए था ओर उनके बूब्स का दूध पीना चाहिए था. पर
अब तक तो भाभी कपड़े पहन चुकी होगी. ये सोचते हुए मई बातरूम
से बाहर निकला तभी भाभी जो की बातरूम की ड्यूवर से च्चिपी खड़ी
थी मेरे पीछे आ गयी ओर मेरे चूटरो के बीच मे हाथ फेर दिया.
मई चिहुक गया- क्या करती हो भाभी? वो बोली चलो रूम मे, सूखने
के बाद निक्कर पहन लेना. वो अभी तक नंगी ही खड़ी थी. इस बार
मैने जो नज़रें उठाई तो उनके बूब्स पर ही जूम गयी. कितने बड़े-
बड़े थे ओर आयेज निपल्स ऐसे लग रहे थे जैसे खरबूजों मे अलग
से तो लंबे मोटी लगा दिए हों. जी चाहा खीच लून उनको. पर ऐसा
कर नही पाया.

फिर भाभी ओर मई बेडरूम मई गये. हम दोनो ही लगभग सूख
चुके थे. मैने फिर निक्कर की माँग की तो भाभी बोली- उपेर से
सूख चुके हैं पर अभी नामी है उसे सूखने के बाद ही पहनना.
मुझे भी अब ऐसे ही मज़ा आ रहा था. भाभी बोली बेड पर लेट जाओ
पहले मई तुम्हारा लॅंड सूखा देती हून. फिर तुम मेरी छूट को सूखा
देना. मई जनता था की मेरे कहने से कुछ नही होने वाला, सो बेड पर
सीधा लेट गया. मेरा लॅंड कुछ ताना भी था ऑफ कुछ हल्का भी हो
रहा था. भाभी ने मेरा निक्कर एक तरफ डाला ओर मेरा लॅंड अपने
हाथ मे ले लिया ओर मेरे पेट पर से नीचे की ओर फूक मरने लगी.
बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उन्होने मेरे लॅंड की खाल पकड़ी उपेर
उठाई ओर मेरे लॅंड के अंदर एक हल्की फूक मारी. "आ" मज़ा आ
गया. वो धीरे-धीरे मेरे लॅंड को सहलाते हुए उसमे फूक मारती
रही. मेरा लॅंड टाइट हो कर टन चुका था. अब उन्होने मेरे लॅंड की
टोपी के नीचे फूक मारनी शुरू कर दी, मुझे मज़े आ रहे थे.
अचानक उन्होने फूक की जगह मेरे लॅंड पर अपना थूक गिरा दिया.
मई चिल्ला पड़ा ये क्या किया भाभी. मेरे लॅंड पर थूक दिया. वो
बोली- सॉरी, अभी सॉफ कर देती हून. हन अब फिर धोऊॉगी ओर फिर
से सुखाऊगी. बस यही करते रहना. वो बोली- नही अब नही धोना.
फिर क्या अब गंदा ही रहेगा. पर उन्होने जवाब देने की जगह मेरे
लॅंड को अपने मूह मे घुसेड लिया ओर चूसने लगी. मेरे जिस्म मे जैसे
आग लग गयी. मई एकद्ूम उठ बेता-क्या करती हो भाभी "च्चि". वो
बोली नही च्चि इसी मे तो मज़ा आता है. अच्छा बताओ दूध पीना है.

नही रहने दो-मैने कहा. अरे नही पी लो. कहते हुए उन्होने मेरा
लॅंड छोड़ कर मेरे सर को अपने सीने से लगा लिया. उनके बूब्स मेरे
मूह से लग गये. अब मई समझा की वो किस दूध की बात कर रही है.
मैने जल्दी से एक निपल को मूह मई भर लिया ओर दूध खीचने
लग.पर कुछ नही आया. अब मैने दूसे निपल को मूह मे लेकर दूध
पीना चाहा. पर यहाँ भी कुछ नही. दूध तो है ही नही भाभी
मई बोला तो वो हास पड़ी, बोली- अभी से दूध थोड़े ही आता है. तो
कब आता है. बच्चा होने के बाद. बच्चा कब होगा. जब तुम्हारे
भैसाहब चाहेंगे, पर तुम उनसे पूच मत लेना. तुम थोड़ी देर रूको
मई अभी तुम्हे दूध पिलाती हून. कह कर वो उठी ओर कित्चान मे
चली गयी. मैने सोचा पीछा छ्होटा ओर जल्दी-जल्दी अपना निक्कर ओर
बनियान पहन लिया. पर वो जल्दी ही वापस आ गयी ओर खाली हाथ
ही, जबकि मई समझा था की वो दूध गिलास मे लेकर आएगी. आते ही
बोली अरे तुमने कपड़े पहन लिए क्यो? मैने कहा अब आप भी पहन लो
फिर सोते हैं. पर वो नही मानी बोली- मई तुम्हे दूध पिलाने आ
रही थी ओर तुमने कपड़े पहन लिए जल्दी से उतरो वरना मई उतारूगी
तो फट सकते हैं. मेरे काफ़ी माना करने पर भी वो नही मानी तो हार
कर मैने अपनी बनियान उतार दी. "ओर निक्कर"- वोबोली. नही भाभी अब
रहने दो मई तक गया हून सोना है. तो सो जाना पर निक्कर तो
उतरना ही पड़ेगा वरना मई आ रही हून उतरने. हार कर मैने
निक्कर भी उतार दिया. मेरा लॅंड मुरझा चुका था. वो देखते ही बोली-
है तुम्हारा लॅंड तो फिर से सो गया. अभी इसे जागते हैं. चलो
पहले दूध पियो. कहते हुए वो बेड पर बेत गयी. मैने देखा उनके
निपल्स कुछ चमक रहे थे. दूध आ गया क्या भाभी? मैने
पूछा. हन तुम पियो तो. मैने जैसे ही एक निपल को मूह मे लिए
जान गया भाभी शहद लगा कर आई थी. पर मीता निपल बड़ा
अच्छा लग रहा था तो मई चूसने लगा. अभी मई पहला निपल ही
चूस रहा था की उन्होने मेरा लॅंड फिर से पकड़ लिया. जो की अब फिर
टन चुका था. जैसे ही उन्होने मेरे लॅंड को पकड़ा मई चिहुक गया.


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Sunday, September 21, 2008

मस्तानी भाभी की मस्ती

मस्तानी भाभी की मस्ती

mastani bhabhi --hindi font story





हेलो दोस्तो आपका राज शर्मा एक ओर स्टोरी लेकर हाज़िर है ये कहानी एक ऐसीभाभी की है
जो आप को भी मस्त करने का दम रखती है तो अब आप कहानी का मज़ा लीजिये
मेरा नाम सोनिया, रंग गोरा और बॉडी एक दम स्लिम। मैं देल्ही की रहने वाली हू. 1 साल
पहले जब मैं 19 साल की थी तभी मेरी शादी मोहन के साथ हो गयी थी. उस समय मोहन की
उमर 21 साल की थी. उनका रंग गोरा है और वो एक दम दुबले पतले हैं. वो एक मल्टी नॅशनल
कंपनी मे कम करते हैं. मेरे ससुराल मे मेरे पति के अल्वा मेरा एक ड्यूवर है. उसका नाम राजू है
और उसकी उमर उस समय 20 साल की थी. अब वो 21 साल का है और बहुत ही हॅंडसम है. मेरे
पति के पेरेंट्स शादी के 2 साल पहले ही एक्सपाइर हो चुके थे. मोहन और राजू एक दम फ्रेंड की
तरह रहते हैं और एक दूसरे से कुच्छ च्छूपाते नही. राजू मुझसे एक दम खुला मज़ाक करता है.
मोहन भी हम दोनो के मज़ाक का खूब मज़ा लेते हैं और बीच बीच मे कॉमेंट भी करते रहते हैं.

ये 1 मंत पहले की बात है. मेरे पति को कंपनी के कम से 4 दीनो के लिए ऊशा जाना था. मेरे पति की
फ्लाइट रात के 10 बजे थी. उन्होने जाते समय राजू से कहा "सोनिया का हर तरह से ख्याल रखना."
राजू बोला "ठीक है, भैया. मैं पूरा ख़याल रखूँगा." मैने मोहन के जाने के दूसरे दिन सुबह जब मैं बातरूम
से नहा कर बाहर आई तो मैने देखा की राजू तो अभी तक सो रहा है. मैने अभी कपड़े भी नही पहने थे,
केवल एक टवल अपने बदन पर लपेट रखा था. मैं उसके रूम मे गयी. वो एक दम बेख़बर सो रहा था.
जब मेरी निगाह उसके उपर पड़ी तो मैं शरम से लाल हो गयी. मैने देखा राजू का लंड उसकी चड्धि से
बाहर निकला हुआ था. उसका लंड खड़ा था. मैने आज तक ऐसा लंड कभी नही देखा था. उसका लंड
लगभग 9" लंबा और बहुत मोटा था. मेरे पति का लंड तो केवल 4 1/2" लंबा था. मैं सोचने लगी
की 2 भाइयो के लंड मे कितना फराक है. मोहन का लंड छ्होटा और राजू का बहुत मोटा और लंबा.
undefinedमैं बहुत ही सेक्सी हून इस लिए इतना मोटा और लंबा लंड देखकर मुझे जोश आने लगा.
मैं बहुत देर तक राजू के लंड को देखती रही और सोचने लगी की काश मुझे इस लंड से छुड़वाने का
मौका मिल जाता. मैने मान ही मान सोचने लगी की राजू तो मेरा ड्यूवर है और इस से छुड़वाने मे
कोई रिस्क नही है. राजू भी मुझसे बहुत हसी मज़ाक करता था और बतो बतो मे मेरे बदन पर हाथ
भी लगा देता था. मैं भी उसे ड्यूवर होने की वजह से बहुत प्यार करती थी. हम दोनो दोस्त की तरह
रहते थे. मैं धीरे से जाकर बेड पर राजू के बगल मे बैठ गयी और अपने हाथो से उसके लंड को पकड़ लिया.
थोड़ी देर मे उसकी नीड खुल गयी.
उसने जब मुझे अपना लंड पकड़े हुए देखा तो बोला "भाभी आप, आप... ये क्या कर रही हो."
मैने कहा "राजू, तुम्हारा तो बहुत बड़ा है. मैने इतना लंबा और मोटा लंड कभी नही देखा है. इस लिए
मैं इसे देख रही हू." उसने शरम से अपनी आँखे बंद कर ली. मेरे हाथ लगाने से उसका लंड और ज़्यादा
टाइट हो गया. थोड़ी देर बाद उसने आँखे खोली और बोला "भाभी, अब रहने दो. अपना हाथ हटा लो." मैने
कहा "तोड़ा रुक जाओ, मुझे ठीक से देख लेने दो." वो कुच्छ नही बोला. मैं अपने हाथो से उसका लंड सहलाने
लगी. थोड़ी ही देर मे राजू का बदन अकड़ने लगा और वो बोला "भाभी, अब इसे छ्चोड़ दो नही तो इसका
पानी निकल जाएगा." मैने कहा "मैं इसका जूस अपने मूह मे लेना चाहती हू. तुम इसका जूस मेरे मूह मे
निकल दो." वो बहुत ज़्यादा जोश मे आ गया था. उसने मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड के पास कर दिया.
मैने उसका लंड अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी ही देर मे उसके लंड ने अपना जूस मेरे मूह मे
निकलना शुरू कर दिया. उसके लंड का जूस एक दम गरम गरम था. मैने वो सारा जूस निगल लिया. सारा
जूस निगल जाने के बाद मैने उसके लंड को छत छत कर सॉफ कर दिया. फिर मैने उस से कहा "चलो,
अब फ्रेश हो जाओ. 9 बाज रहे हैं."
वो मुझसे आँखे नही मिला पा रहा था. वो चुप छाप उठा और बातरूम चला गया. मैने किचन मे छाए
बनाने चली गयी. मैं अभी तक केवल टवल लपेट रखा था. राजू फ्रेश होने के बाद आकर सोफे पर
बैठ गया. उसने रोज़ की तरह अभी तक केवल टवल ही पहना हुआ था. मैने उसको छाए लाकर दी.
वो अपना सर नीचे किए हुए चुप छाप छाए पीने लगा. मैं भी उसके साथ ही साथ छाए पीने लगी.
छाए ख़तम होने के बाद मैं उसके बगल मे आकर बैठ गयी. मैने अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया.
वो कुच्छ नही बोला. फिर मैने उसकी टवल उपर कर दी तो उसका लंड बाहर आ गया. मैने उसके लंड
को सहलाना शुरू कर दिया. 2 मीं मे ही उसका लंड फिर से एक दम टाइट हो गया. वो बोला "भाभी, आप
तो मेरा लंड देखना चाहती थी और इसे देख भी चुकी हैं. प्ल्ज़, अब रहने दो." मैने कहा "मैने आज तक
इंते बड़े लंड से कभी नही करवाया है. मैं आज इसका मज़ा भी लेना चाहती हू. तुम्हारे भैया का तो बहुत
ही छ्होटा है. उनका तो केवल 4 1/2" का ही है. मुझे उस से छुड़वाने मे ज़्यादा मज़ा नही आता."
वो कुच्छ नही बोला.
मैने उसका टवल खीच कर फेक दिया. अब वो मेरे सामने एक दम नंगा हो गया. मैने उसके लंड को फिर
से सहलाना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद उसका दर कुच्छ कम हो गया तो उसने अपना एक हाथ मेरे बूब
पर रख दिया. मैने कहा "ड्यूवर जी, इस तरह नही. मेरा टवल तो खोल दो." उसने धीरे से मेरा टवल खीच
कर अलग कर दिया. अब मैं भी उसके सामने एक दम नंगी हो गयी. उसने मेरे बूब्स को सहलाना शुरू कर
दिया. मैं और ज़्यादा जोश मे आने लगी तो मैने उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी छूट पर सता दिया.
उसकी हिम्मत और बढ़ गयी. उसने अपनी उंगली मेरी छूट मे दल दी और अंदर बाहर करने लगा. मैं एक
दम बेकाबू सी होने लगी और उठ कर उसके पैरो पर बैठ गयी. उसने अपना हाथ मेरे पीठ पर फिरना शुरू
कर दिया.
फिर मैने उसके लंड का टोपा अपनी छूट पर रखा और दबाने लगी. मैने जैसे ही तोड़ा सा दबाया तो मेरे मूह
से एक सिसकारी सी निकल पड़ी. वो बोला "क्या हुआ." मैने कहा "तुम्हारा लंड बहुत मोटा है इस लिए दर्द
हो रहा है." मैने अपना होत उसके होत पर रख दिया और उसके होतो को चूमने लगी. मैने उसके लंड को
अपनी छूट से सताए हुए थोड़ी देर तक अपने कमर को हिलना जारी रखा. थोड़ी ही देर मे जब मेरा दर्द
कुच्छ कम हुआ तो मैने तोड़ा सा और ज़ोर लगाया. इस बार मेरे मूह से चीख निकल गयी. अब उसके
लंड का टोपा मेरी छूट मे घुस चुका था. मैं उसी तरह थोड़ी देर तक रुकी रही. जब मेरा दर्द तोड़ा कम
हुआ तो मैने अपनी कमर को आयेज पिच्चे करना शुरू कर दिया. अब उसके लंड का टोपा मेरी छूट
मे अंदर बाहर होने लगा. मेरी छूट ने उसके लंड को तोड़ा सा रास्ता दे दिया था.
अभी 2 मीं भी नही हुए थे की मेरी छूट ने पानी छ्चोड़ दिया. मेरी छूट एक दम गीली हो गयी और
उसका लंड भी एक दम भीग गया. अब किसी आयिल या क्रीम की ज़रूरत नही थी. मैने तोड़ा सा
ज़ोर लगाया तो इस बार मैं बहुत ज़ोर से चीख पड़ी. उसका लंड मेरी छूट मे 2" तक घुस गया. मैं
दर्द के मेरे रुक गयी और चुप छाप बैठी रही. राजू भी जोश से एक दम बेकाबू हो रहा था. उसने
अचानक मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खीच लिया. मेरे मूह से एक जोरदार चीख
निकल गयी तो उसने अपना होत मेरे होतो पर रख दिया. उसका लंड मेरी छूट मे 3" तक घुस गया था.
मेरी छूट से तोड़ा खून भी आ गया. राजू मेरी कमर को पकड़ कर धीरे धीरे आयेज पिच्चे करने लगा.

उसके होत मेरे होतो पर थे.
2-3 मीं बाद मेरा दर्द कुच्छ कम हो गया. मैं अपना हाथ उसके पीठ पर लपेट कर उसके सीने से एक
दम चिपक गयी और उसका साथ देना शुरू कर दिया. मेरे बदन मे आग सी लग चुकी थी. मेरी साँसे बहुत
तेज होने लगी और मेरी छूट ने फिर से पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया. राजू का लंड और मेरी छूट दोनो और
ज़्यादा गीले हो चुके थे. उसका लंड अब 3" तक आराम से मेरी छूट मे अंदर बाहर होने लगा था. राजू मेरी
कमर को पकड़े हुए मुझे तेज़ी से आयेज पिच्चे कर रहा था. मैने जोश के मेरे अपनी आँखे बंद कर ली थी.
तभी राजू ने मुझे फिर से अपनी तरफ ज़ोर से खीच लिया. मैं फिर से चिल्लाई तो उसने अपने होतो से मेरे
होतो को सील कर दिया. मुझे लग रहा था की किसी ने मेरी छूट मे चाकू घुसेड दिया हो. उसका लंड अब तक
मेरी छूट मे 5" घुस चुका था. राजू भी बहुत जोश मे आ गया था. उसने मुझे तेज़ी से आयेज पिच्चे करना
शुरू कर दिया. मैं भी बहुत ज़्यादा जोश मे आ चुकी थी और उसका साथ दे रही थी.
अभी तक राजू का लंड मेरी छूट मे केवल 5" ही घुस पाया था. 5 मीं भी नही बीते थे की राजू के लंड ने अपने
जूस से मेरी छूट को भरना शुरू कर दिया. उसके साथ ही साथ मेरी छूट ने भी अपना जूस छ्चोड़ना शुरू कर दिया.
लंड का सारा जूस निकल जाने के बाद भी मैं बहुत देर तक उसका लंड अपनी छूट मे डाले हुए बैठी रही. जब
उसका लंड एक दम ढीला हो गया तब मैं उसके उपर से हट गयी. मैने देखा की उसके लंड पर मेरी छूट का जूस
और तोड़ा खून लगा हुआ था. उसका लंड खून और जूस की वजह से एक दम गुलाबी दिख रहा था.
मैने राजू का हाथ पकड़ा और उसे बातरूम ले गयी. मैने उसका लंड और अपनी छूट को साबुन लगा कर सॉफ
किया. उसके बाद हम दोनो नंगे ही बेडरूम मे जाकर बेड पर लेट गये. मैं उस से एक चिपकी हुई थी. वो मेरी
पीठ को सहला रहा था और मैं उसके पीठ को सहला रही थी. मैने कहा "राजू, तुमहरे लंड से छुड़वा कर मुझे
तो भूत मज़ा आया. जब की अभी मैने तुम्हारा पूरा लंड अपनी छूट के अंदर नही लिया है. तुमने आज के
पहले कभी किसी के साथ किया है." वो बोला "नही, मैने आज के पहले किसी के साथ नही किया है. ये मेरा
पहली बार था इसी लिए मेरा जूस बहुत जल्दी निकल गया. मुझे भी आज पहली बार ये मज़ा मिला है."
मैने कहा "मैं भी तुमसे छुड़वा कर खूब मज़ा लूँगी और तुम्हे भी खूब मज़ा दूँगी." इतने मे राजू का लंड फिर
से खड़ा होने लगा था. वो बोला "भाभी, मुझे कहते हुए शरम आ रही है. अगर तुम्हे एतराज़ ना हो तो मैं फिर
से तुमको छोड़ डू." मैने कहा "मैं तो तुम्हारा लंड अब अपनी छूट मे ले चुकी हू. अब कैसी शरम. तुम जब
चाहो मुझे छोड़ सकते हो. मैं तो अब तुम्हारी हू." वो बोला "क्या मैं आपकी छूट को छत सकता हू." मैने
कहा "तुमको इज़ाज़त लेने की क्या ज़रूरत है. तुम जैसा चाहो करो. अभी तो मुझे तुम्हारा पूरा लंड अपनी
छूट के अंदर लेना है."
राजू उठ कर मेरे उपर 69 की पोज़िशन मे लेट गया. उसने मेरी छूट को चाटना शुरू कर दिया. मैं भी जोश
मे थी. मैने उसका लंड अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर बाद उसका लंड एक दम टाइट हो
गया. वो मेरे उपर से हट गया और मेरे पैरो के बीच आ कर बैठ गया. मैने राजू से कहा "मेरी कमर के नीचे
तकिया रख दो. इस से मेरी छूट उपर उठ जाएगी और तुमको छोड़ने मे आसानी हो जाएगी." उसने मेरी
कमर के नीचे 2 तकिये रख दिए. फिर उसने मेरी छूट के लिप्स को पहीलाया और अपने लंड का टोपा बीच
मे टीका दिया. उसके लंड का टोपा अपनी छूट पर महसूस करते ही मेरे सारे बदन मे सुरसुरी सी दौड़ गयी.
फिर उसने मेरे पैरो को पंजे के पास से पकड़ कर डोर डोर फैला दिया. मैने राजू से कहा "राजू, तुम मेरे पैरो
को मेरे कंधे के पास सता दो. उस ने मेरे पैरो को मेरे कंधे के पास सता दिया तो मेरी छूट और उपर उठ गयी.
वो बोला "भाभी, तुमहरि छूट तो एक दम उपर उठ गयी." मैने कहा "इस से तुमको अपना लंड मेरी छूट के
अंदर घुसने मे आसानी हो जाएगी और दूसरे जब तुम अपना पूरा लंड मेरी छूट मे घुसने लगॉगे तो मुझे
बहुत ज़्यादा दर्द होगा तब मैं उस दर्द की वजह से अपनी छूट को इधर उधर नही कर पौँगी और तुम
आसानी से अपना पूरा लंड मेरी छूट के अंदर दल कर मुझे छोड़ सकोगे. राजू मैं तुमसे एक बात और
कहना चाहती हू." राजू बे कहा "वो क्या." मैने कहा "जब तुम अपना पूरा लंड मेरी छूट मे घुसने की
कोशिश करोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा. मैं बहुत चिल्लौंगी और ताड़पुँगी लेकिन तुम इसकी परवाह
मत करना, अपना पूरा लंड मेरी छूट मे दल देना और खूब ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाना, रुकना मत."
राजू बोला "ठीक है, भाभी." फिर मैने उसके सिर को पकड़ कर अपनी तरफ खीचा और उसके होतो पर
अपने होत रख दिए और कहा "चलो, अब शुरू हो जाओ."
उसका लंड 5" तक तो मैं एक बार पहले ही अंदर ले चुकी थी लेकिन मेरी छूट अभी तक टाइट थी. उसने
मेरे पैरो को मेरे कंधे पर दबाते हुए जैसे ही एक धक्का मारा तो उसका लंड मेरी छूट के अंदर 5" तक
आसानी से चला गया. मुझे बहुत हल्का सा दर्द हुआ. मैने उसके सिर को पकड़ लिया और उसके होतो
को चूमने लगी. उसने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया. मुझे जोश आने लगा और थोड़ी देर मे ही
मेरी छूट से पानी निकल गया.
अब मेरी छूट एक दम गीली हो गयी और राजू का लंड भी भीग गया. अब किसी आयिल या क्रीम की
ज़रूरत नही थी. मैने राजू से कहा "अब पुर ताक़त के साथ अपना लंड मेरी छूट मे घुसना शुरू कर दो,
अब रुकना मत. पूरा लंड मेरी छूट मे घुसा देना और उसके बाद बिना रुके ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाना."
वो बोला "ठीक है, भाभी." राजू ने मेरी टॅंगो को ज़ोर से दबाते हुए एक जोरदार धक्का मारा तो मेरी चीख
निकल गयी "आआहह......... उईए....... माआ......" उसका लंड मेरी छूट मे और ज़्यादा गहराई तक घुस
गया. मैने पुचछा "क्या हुआ. कितना घुसा है." वो बोला "अभी तो केवल 6" ही घुस पाया है." मैने कहा "
राजू, मुझे बहुत दर्द हो रहा है. मैं बर्दस्त नही कर पा रही हू. तुम जल्दी से अपना पूरा लंड मेरी छूट
मे दल दो. मैं तुम्हारा ये लंबा और मोटा लंड जल्दी से अपनी छूट के अंदर लेना चाहती हू." राजू ने फिर
एक धक्का लगाया तो मैं दर्द के मारे तड़पने लगी और मेरे मूह से एक जोरदार चीख निकली. उसका
लंड मेरी छूट को फड़ता हुआ और ज़्यादा घुस चुका था और मेरे बच्चेड़नी के मूह को चूम रहा था.
मैने चिल्लाते हुए ही राजू से कहा "जल्दी करो, रूको मत. दल दो अपना पूरा लंड मेरी छूट मे." उसने
फिर से एक जोरदार धक्का मारा. मुझे इस बार दर्द बर्दस्त नही हुआ. मेरे मूह से फिर एक जोरदार
चीख निकली. मैं किसी मच्चली की तरह तड़पने लगी और अपने सर के बॉल नोचने लगी. मेरी चेहरे
पर पसीना आ गया और आँखो मे आँसू भर गये. राजू का लंड मेरी छूट मे और ज़्यादा गहराई तक घुस
चुका था. उसका लंड मेरी बच्चेड़नी को पिच्चे धकेल रहा था. मैने समझा की अब उसका पूरा लंड मेरी
छूट मे घुस चुका है.
मैने राजू से पुचछा "क्या हुआ, पूरा घुस गया." वो बोला "अभी नही, तोड़ा सा बाकी है." मैने कहा "
बाकी का लंड भी मेरी छूट मे जल्दी से दल दो." उसने पुर ताक़त के साथ एक फाइनल धक्का मारा.
मैं दर्द से तड़पने लगी और सर के बॉल नोचने शुरू कर दिए. मेरे आँखो से आँसू निकल रहे थे. वो मेरे
चेहरे को देख रहा था और बोला "भाभी, अब मेरा लंड तुम्हारी छूट मे पूरा घुस चुका है." मैं भी उसके
दोनो बॉल्स को अपनी छूट पर महसूस कर रही थी. मैने कहा "राजू, रूको मत. अब ज़ोर ज़ोर से धक्के
लगाओ. अभी मेरी छूट चौड़ी नही हुई है. जब तुम ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा कर मुझे छोड़ोगे तब मेरी छूट
चूड़ी हो कर तुम्हारे लंड के साइज़ की हो जाएगी और मेरा दर्द ख़तम हो जाएगा. फिर मैं भी मज़ा ले सकूँगी."
उसने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए. 20-25 धक्को के बाद मेरा दर्द धीरे धीरे कम होने लगा और
मेरी छूट ने इस बार ढेर सारा पानी छ्चोड़ दिया.
अब मेरी छूट और ज़्यादा गीली हो चुकी थी. छूट गीला हो जाने की वजह से राजू का लंड ज़्यादा आराम
अंदर बाहर होने लगा. जब राजू ने 20-25 धक्के और लगा दिए तो मेरी छूट कुच्छ चौड़ी हो गयी और
मेरा दर्द एक दम ख़तम हो गया. फिर मुझे भी मज़ा आने लगा. मैने चूतड़ उठा उठा कर राजू का साथ
देना शुरू कर दिया. मैने राजू से कहा "अब तुम मेरे पैरो को छ्चोड़ दो और मेरे बूब्स को मसालते हुए
मेरी चुदाई करो." उसने मेरा कहा मान लिया और मेरे पैरो को छ्चोड़ दिया. फिर उसने मेरे दोनो बूब्स
को अपने हाथो से मसालते हुए मेरी चुदाई शुरू कर दी. वो ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था. मैं भी चूतड़
उठा उठा कर उसका साथ दे रही थी. मैने उसका सिर पकड़ कर अपनी तरफ खीच लिया और अपने होतो
को उसके होतो पर रख दिया.
राजू जब धक्का लगता तो मैं अपना चूतड़ उपर उठा देती थी जिस से उसका लंड मेरी छूट मे और ज़्यादा
गहराई तक घुस जाता था. मेरे छूट के पानी से उसका लंड एक दम गीला हो गया था. इस वजह से रूम मे
फ़च फ़च की आवाज़ हो रही थी। वो मुझे बहुत तेज़ी के साथ छोड़ रहा था. 10 मीं बाद उसने मेरी कमर को
बहुत ज़ोर से जाकड़ लिया और बोला "भाभी, मेरा जूस निकालने वाला है." मैने कहा "तुम अपने लंड का
जूस मेरी छूट मे ही निकल दो." तभी राजू की स्पीड और तेज हो गयी और 2 मीं मे ही उसके लंड ने मेरी
छूट को भरना शुरू कर दिया. उसके साथ ही साथ मेरी छूट से भी पानी निकालने लगा. राजू मुझसे एक दम
चिपक गया था. उसकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड मेरी छूट से बाहर निकाला और मेरी छूट को देखने लगा. वो बोला "भाभी,
तुम्हारी छूट तो एक दम सुरंग की तरह हो गयी है. मैं एक बात कहना चाहता हू, तुम बुरा तो नही मनोगी."
मैने कहा "मैं क्यों बुरा मानूँगी. अब तो तुम मेरे ड्यूवर से मेरे प्राइवेट पति हो गये हो." वो बोला "जिस
तरह तुम मुझे ग्लास मे मिल्क पीने के लिए देती हो, मैं तुम्हारी छूट मे मिल्क भर कर पीना चाहता हू
क्यों की तुम्हारी छूट भी इस समय एक ग्लास की तरह दिख रही है." मैने कहा "ठीक है, जा कर मिल्क
ले आ और इसमे भर कर पी ले." उसने कहा "तुम अपना पैर इसी तरह उठा कर रखो जिस से ये सुरंग बंद
ना हो जाए." मैने भी अपना पैर उसी तरह उठा कर रखा. राजू किचन से मिल्क ले कर आया. उसने मेरी
छूट मे मिल्क भरना शुरू कर दिया. पूरा 1 ग्लास मिल्क मेरी छूट मे समा गया. राजू बोला "भाभी, तुम
जानती हो, इस मिल्क मे काई तरह का टॉनिक मिला हुआ है." मैने पुचछा "कौन सा टॉनिक." वो बोला "
इसमे मिल्क का टॉनिक तो है ही. लेकिन इस मिल्क मे तुम्हारी छूट और मेरे लंड का भी टॉनिक मिला
हुआ है." मैं हासणे लगी. राजू ने मेरी छूट पर मूह लगा कर उस मिल्क को पीना शुरू कर दिया. जब उसने
सारा मिल्क पी लिया तो मैने कहा "मुझे उस टॉनिक वाला मिल्क नही पिलाओगे." वो बोला "क्यों नही."
उसने फिर से मेरी छूट मे मिल्क भर दिया और उसके बाद वापस उसे ग्लास मे गिरा लिया. फिर मुझे देते
हुए बोला "लो, तुम भी ये मिल्क पी लो." मैने भी वो मिल्क पी लिया. मैने कहा "तुमने मेरी छूट इतनी
चौड़ी कर दी की इस मे 1 ग्लास मिल्क आने लगा." इस पर वो हासणे लगा और बोला "पहल तो आपने
ही की थी."
मैं बातरूम जाना चाहती थी लेकिन खड़ी नही हो पा रही थी. राजू मुझे गोद मेउठा कर बातरूम ले गया.
बातरूम के मिरर मे मेने अपनी छूट को देखा तो मेरी छूट एक दम सुरंग की तरह दिख रही थी. मैं अपनी
छूट की इस हालत पर हासणे लगी. उसके बाद हम दोनो बातरूम से वापस आ गये. बातरूम से वापस
आने के बाद मैं कहा "मैं खाना बनाने जाती हू, तब तक आराम कर लो." वो बोला "ठीक है." मैं कपड़े
पहन ने लगी तो राजू बोला "अब कहे की शरम. तुम इसी तरह एक दम नंगी ही खाना बना लो." मैं
ठीक से चल नही पा रही थी. धीरे धीरे मैं नंगी ही किचन मे खाना बनाने चली गयी. राजू ने कपड़े नही
पहने थे. वो उसी तरह बैठ कर टV देखने लगा.
जब मैं खाना बना कर बाहर आई तो मैने राजू से पुचछा "क्या तुम फिर से तय्यार हो." वो बोला "मैं
तो कब से तय्यार हू और आपका इंतेज़ार कर रहा हू।" मैने उसका लंड मूह मे ले लिया और चूसने लगी.
उसका लंड 2 मीं मे ही एक दम टाइट हो कर लोहे जैसा हो गया. मैं उस से लेट जाने को कहा. वो लेट गया
और मैं उसके उपर चढ़ गयी. मैने उसके लंड का टोपा अपनी छूट के बीच रखा और तोड़ा सा दबाया तो
उसका लंड मेरी छूट मे लगभग 2" तक घुस गया. मुझे तोड़ा दर्द हुआ और मेरे मूह से एक हल्की सी
चीख नियकाल पड़ी. राजू बोला "क्या हुआ, भाभी. आप तो पूरा लंड अंदर ले चुकी हैं तो फिर क्यों चीख
रही हैं।" मैने कहा "तू नही समझेगा. एक बार छुड़वाने से छूट थोड़े ही चौड़ी हो जाती है. जब मैं तुझसे 8-10
बार छुड़वा लूँगी तब जा कर तेरा लंड मेरी छूट मे बिना दर्द के जाएगा." मैने तोड़ा और दबाया तो उसका
लंड मेरी छूट मे 4" तक घुस गया. मेरी छूट मे फिर से दर्द होने लगा और मैं कराह उठी. मैने बिना और
ज़ोर लगाए धीरे धीरे धक्का लगाना शुरू कर दिया.


थोड़ी देर मे मेरा दर्द कुच्छ कम हुआ तो मैने तोड़ा और ज़ोर लगाया. इस बार उसका लंड मेरी छूट मे 6"
तक घुस गया और मैं दर्द के मारे तड़पने लगी. मेरे चेहरे पर पसीना आ गया. मैने फिर से धीरे धक्के
लगाने शुरू कर दिए. कुच्छ देर बाद मेरा दर्द जब कम हुआ तो मैने इस बार एक गहरी सास लेकर अपने
बदन का वजन डालते हुए उसके लंड पर बैठ गयी. इस बार मैं दर्द से तड़प उठी. मेरी आँखो मे आँसू आ
गये. मेरा चेहरा पसीने से भीग गया. उसका पूरा लंड मेरी छूट मे समा चुका था. मैं थोड़ी देर तक उसका
पूरा लंड अपनी छूट मे डाले हुए उसके लंड पर बैठी रही. 2-3 मीं बाद मैने धीरे धीरे धक्का मारना शुरू
किया. दर्द अभी भी हो रहा था लेकिन मज़ा भी आने लगा था. मैने अपनी स्पीड तोड़ा तेज की तो मेरा
दर्द बढ़ गया लेकिन जो मज़ा मुझे मिल रहा था उसके आयेज ये दर्द कुच्छ भी नही था. 25-30 धक्को
के बाद मेरा दर्द जाता रहा और मुझे खूब मज़ा आने लगा. मैने अपनी स्पीड तेज कर दी. मैं उसके लंड पर
हवा मे उच्छल रही थी. मैं जब नीचे आती तो पूरे बदन के वजन के साथ उसके लंड पर बैठ जाती थी. राजू
को भी खूब मज़ा आ रहा था. जब मैं नीचे आती तब वो भी अपने चूतड़ को उठा देता था. 5 मीं बाद ही मेरी
छूट ने पानी छ्चोड़ दिया. पूरा पानी निकल जाने के बाद मैं उसके उपर से हट गयी.
मैं बुरी तरह से हाफ़ रही थी. मेरा चेहरा पसीने से लत पाठ था. मैने राजू से कहा "अब मैं डॉगी स्टाइल मे
हो जाती हू. तुम मेरे पिच्चे से आकर मेरी चुदाई करो." मैं ज़मीन पर डॉगी स्टाइल मे हो गयी. राजू मेरे
पिच्चे आ गया. उसने मेरी छूट के लिप्स को फैला कर अपने लंड का टोपा बीच मे रख दिया तो मैं बोली "
एक झटके से पूरा लंड दल दो मेरी छूट के अंदर." उसने मेरी कमर को ज़ोर से पकड़ा और पूरी ताक़त के
साथ एक झटका मारा और उसका 9" का लंड सनसंता हुआ मेरी छूट की गहरैइिओं मे समा गया. डॉगी
स्टाइल मे होने की वजह से मेरी छूट एक दम दबी हुई थी इस लिए मुझे उसका मोटा और लंबा लंड
अपनी छूट के अंदर लेने मे फिर से तकलीफ़ हुई. मेरे मूह से एक जोरद्र चीख निकल पड़ी. मैने राजू से
कहा "रूको मत, ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाओ. खूब ज़ोर ज़ोर से छोड़ो मुझे." ऱाजु ने मेरी कमर को पकड़
कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने शुरू कर दिए. वो मुझे आँधी की तरह छोड़ने लगा. उसका हर धक्का मुझ
पर भारी पद रहा था. उसका लंड मेरे बच्चेड़नी को ज़ोर ज़ोर से ठोकर मार रहा था जैसे कोई उसकी
पिटाई कर रहा हो.
3-4 मीं मे ही मेरी छूट रोने लगी और उसके आँसू निकल पड़े. राजू का लंड एक दम भीग गया और
मेरी छूट मे आराम से अंदर बाहर होने लगा. राजू ने अपनी स्पीड और तेज कर दी. मैं हिचकोले खा
रही थी. मेरी छूट से फ़च फ़च की आवाज़ निकल रही थी. 10 मीं भी नही बीते थे की मेरी छूट ने फिर
से पानी छ्चोड़ दिया.
राजू ने मेरी कमर को छ्चोड़ कर मेरे बूब्स को पकड़ लिया. फिर उसने मेरे बूब्स को मसालते हुए ज़ोर
ज़ोर से धक्के लगा कर मुझे छोड़ने लगा. उसका हर धक्का इतना तेज था की मैं हर धक्के के साथ आयेज
सरक जाती थी. वो मुझे इसी तरह छोड़ता रहा और मैं आयेज सरक्ति रही. थोड़ी देर बाद मेरा सिर ड्रॉयिंग
रूम की दीवार से सात गया तो राजू बोल "भाभी, अब कहाँ भाग कर जाओगी." और उसने मुझे एक दम
आँधी की तरह छोड़ना शुरू कर दिया. अब मैं आयेज नही सरक पा रही थी इस लिए उसका हर धक्का
बहुत ज़ोर ज़ोर का लग रहा था.
15-20 मीं बाद मेरी छूट ने फिर से पानी छ्चोड़ दिया और इस बार मेरे साथ ही साथ राजू के लंड ने भी
पानी छ्चोड़ दिया और मेरी छूट भर गयी. पूरा पानी मेरी छूट मे निकल देने के बाद राजू ने अपना लंड
बाहर निकाला और जीभ से मेरी छूट को चाटने लगा. उसने मेरी छूट को छत छत कर सॉफ कर दिया
और उसके बाद उसने अपना लंड मेरे मूह के पास कर दिया. मैने भी उसका लंड छत छत कर एक दम
सॉफ कर दिया. उसके बाद हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर वही ज़मीन पर लेट गये.
इसी तरह 3 दीनो तक राजू मुझे तरह तरह के स्टाइल मे छोड़ता रहा. मुझे उस से छुड़वाने मे बहुत मज़ा
आया. अब मेरी छूट एक दम चौड़ी हो चुकी. राजू अब चाहे जिस स्टाइल मे मेरी छूट मे अपना लंड घुसता
मुझे तोड़ा भी दर्द नही होता था और उसका लंड मेरी छूट मे एक दम गहराई तक आराम से घुस जाता था.

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