Sunday, May 25, 2008

गांव की छोरी

गांव की छोरी

 

मेरा नाम ॐ है मैं २१ साल का नौजवान हूँ. मेरी ऊंचाई ५'११" है और पेहेलवानी वाला बदन रखता हूँ. दोसतों यह कीस्सा शुरू होता है वहाँ से जब मैं अपने गांव गया था. गांव में हमारी पुश्तैनी ज़मीन जयदत है. वैसे तो उसके देखभाल के लीये वहाँ हमारे ताउजी हैं पर पापा हर साल गांव जाते थे पर इस साल उनको समय नहीं मीला तो मुझे ही गांव जाना पड़ा.
मैं अपने गांव करीबन पंच साल बाद गया था. गांव में हमारे घर से करीबन बीस कदम दूर ही दीपा का घर था. मुझे बताया गया था की व्हो हमारे बचपन की दोस्त है. जिस दीन हम घर पहुंचे तो हमे मिलाने काफी लोग आ गए जिस्मे की दीपा भी अपने परिवार वालों के साथ ही आई थी. वैसे तो उसे देखते ही मैं उसपे फीदा हो ग्या पर इतने लोगों के बीच मैं उसे ठीक से देख भी नहीं प रहा था .More…
व्हो पूरी उन्नीस (१९) साल की हो गयी थी. उसका बदन भी पुरा देसी और गदराया हुआ था. वैसे तो वो मुझे देख ही नहीं रहीं थी पर काफी देर बाद हमारी नज़र उसकी नज़र से टकराई और व्हो शर्म गयी.

हमारी Bhabhi (हमारे ताउजी के लड़के की बीवी ) थोड़ी माजाकीया हैं और हमसे कुछ ज्यादा ही मजाक करती हैं. सबके जाने के बाद मैं थोडा अपनी पलंग पे लेट ग्या आराम करने के लीये. मेरी अभी आंख लगी ही थी की मुझे अपने कानों के पास चूड़ी के खनखनाहट की आवाज़ आई मुझे लगा Bhabhi हैं, हमने आंख बंद करके ही कह दिया "एक गिलास पानी पी ली जिए ". फीर ज़ोर से चूड़ी खंकने की आवाज़ आई मैने अपनी आंख खोली तो देखा की दीपा हाँथ में पानी का गिलास और एक हाँथ में एक प्लेट में गूढ़ का टुकडा पड़ा था मैं तुरंत उठ कर बैठ गया. हमने उससे पूछा "आप दीपा हैं क्या", तो उसने सर हीला दीया और शर्म के सर झुका लीया. मैने कहा "बैठो", पर वो खाडी ही रही मैने उसका हाँथ पकड़ के उसको बिठाना चाहा पर जैसे ही हमने उसका हाँथ पकड़ने की कोशिश की उसके हाँथ से पानी का गिलास और प्लेट दोनों ही गीर ग्या. तभी अंदर से Bhabhi की आवाज़ आई "क्या हुआ", Bhabhi दौड़ती हुईं आयीं उन्होने मुझे फटकारते हुए कहा "लगता है तुमने कोई गलत हरकत की है", तब दीपा ने कहा "नहीं Bhabhi मैं यहाँ रखने जा रहा थे तो खटिया का कोना लग गया", Bhabhi कहने लागीं " अभीआये हुए एक दीन भी नहीं हुआ और तू इसकी तरफ़दारी करने लगी". यह बोल कर Bhabhi ने हमारी तरफ देखते हुए एक अजीब से मुर्कुराहत देते हुए रसोईघर में चली गयीं. दीपा भी जाने लगी तो मैने हाँथ आगे बड़ा दीया जिससे व्हो आगे ना जा सके. हमने उससे माफी मांगी और उसे फीर से बिनती की की वो हमारे पास बैठे. पर उसने कहा "साँझ हो रही है हटो मुझे चूल्हा जलना है माँ मेरा इंतज़ार कर रही होंगी, मैं खाना खाने के बाद माँ के साथ आएँगी". यह बोल के वो चली गयी.

वैसे गांव में खाना जल्दी बन जाता है और सात-सडेसात बजे (७- ७.३०प्म्) तक साबका खाना हो जता है. मै अब बेसब्री से उसके आने का इंतज़ार करने लगा. ७ बजे Bhabhi ने कहा चल के भोजन कर लेने को तो हमने मना कर दीया कहा मुझे आदत नहीं है इतने जल्दी खाना खाने की. पर Bhabhi ने खहा की चल के मैं अगर ताउजी और भैया के साथ खा लेते तो आछा होता. पर मेरा दील ही नहीं कर रह था. ताउजी का दुतालला माकन था (२-स्टोरी bunglov) और उसके ऊपर छत थी मैं छत पे खाट बिछाके आराम करने लगा.मुझे तारौ को देखना बहुत आछा लगता है सो मैं काफी देर तक तारों को देख रहा थे थाभी Bhabhi कीसीको लेकर हमारे पास आई उन्होने बताया की वो दीपा की माँ हैं . मैने उन्हें नमस्कार करके हाल चाल पुछा. फीर Bhabhi से पुछा दीपा नहीं आयी है क्या. Bhabhi ने बताया की नीचे हमारे भतीजे को कहानी सुना रही है. मैं नीचे की तरफ लपका Bhabhi के कमरे में देखा तो वहाँ दीपा हमारे भतीजे को कहानी सुना रही थी. मुझे देखते ही व्हो भाग गयी. थोड़ी देर बाद आयी और कहना खाने को चलने के लीये कहा. मैं रसोईघर में उसके पीछे पीछे चले ग्या. मैं वहाँ पे बैठा और वो हमारे लीये खाना निकलने लगी. हमने उससे बात करनी शुरू की. थोड़ी देर में ही वो हमसे घुलमील गयी. फीर व्हो मुझे अपने बचपन के कीस्से सुनने लगी. खाना खाने के बाद मैं दीपा के साथ Bhabhi के पास ग्या Bhabhi ने मुझे सोने के लीये जाने को कहा. और दीपा को कहा की मुझे कमरा दीखा दे और व्हो घर चली जाये, क्योंकी उसकी माँ
देरी से आएँगी.

मैने सोचा यही मौका है कुछ करने का. दीपा को देखते ही हमारा लंड सलामी देने लगता था. उसके उभरे हुए माम्मेय और चिकना हुआ बदन चांदनी रात में सोने पे सुहागा कीये जा रह था. हमारा कमरा सबसे नीचे ताउजी के कमरे के बगल में था. नीचे पहुंच के हमने देखा ताउजी सो ग्या हैं, हमने दीपा से कहा की व्हो थोडा रूक जाये क्योंकी मुझे इतनी जल्दी सोने की आदत नहीं है. वो हमारे साथ बैठकर बात करे. वो तयार हो गयी . व्हो हमारे बगल में ही बैठी थी. हमारा बहुत मन कर रह था उसको छूने का. मैने उसका हाँथ पकड़ लीया थोडा सा वीरोध करने के बाद वो शांत हो गयी. इससे मेरा हौसला और बढ गया. मैंने उसके क़मर पे हाँथ रख दीया जैसे ही हमने उसके क़मर पे हाँथ रखा वो सिहक गयी और अपना सर हमारे कंधे(शौल्देर) पे रख दीया. अब क्या था हमने उसके गाल पे चुम्बनों की बौछार शुरू कर दी. वो शरमाते हुए अपना मुह छुपाने लगी. हमने उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसके उरोझ(Boobs) पे हाँथ रख दीया और हल्का सा दबाया उसके मुह से हलकी सी सिस्कारी निकलने लगी स्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईईईईईईईई…आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…. इस तरह से. हमने देखा की वो विरोध नहीं कर रही तो हमने दोनो हाथों से उसके मुम्मे (Boobs) हलके हलके से दबाना शुरू कर दिया. और अपना मुख ( माउथ) उसके मुख के पास ले ग्या और उसके होंठों को चूमने लगे. इतने में हमारा एक हाँथ नीचे से उसके सलवार के अन्दर पहुंच गया , जैसे ही मेरे हाँथ ने उसकी चूत के रोंदर बलों( झंट) पे दौड़ उसके मुख से सीत्कार नीकल
गयी जो की हमारे होंटों से ही दबी रह गयी. हमने देखा की व्हो काफी गरम हो गयी है तो हमने हलके से उसका कुरता उठाने लगे और जैसे ही हमने देखा की व्हो तनीक भी विरोध नहीं कर रही हैं हमने तुरंत ही उसका कुरता उप्पर से उतर दीया. है हमने देखा उसके बगल में सुनेहेरे बाल उगे थे जो मुझे और भी उसके ऊपर कामुक (Sexy) लगा. मैं ऊपर ऊपर से ही उसकी चूची दबाने लगे उसकी चूची इतनी मांसल और बड़ी थी की हमारे हाँथ में नहीं आ रही थी, साथ ही साथ हमारा ६ इंच का लंड भी बहर आने के लीये बेक़रार हो रह था हमने अपनी पैंट की जीप खोली और vip की चड्डी में जो छेद रहता है, हमने वहीँ से अपना लंड बहार नीकल दीया. नीकाल के हमने देखा दीपा हमारे लंड को देख कर शर्म गयी तो हमने उसके शरम भगाने के लीये उसक हाँथ हमारे लंड पे रख कर मुठबजी का कला उसे सिखाने लगे. थोड़ी ही पल में उसकी शरम जाती रही फीर क्या था मैने बेशरम होके उसकी ब्रा खोल दी उसकी ब्रा खुलते ही उसके सुडौल चूचीयां लपकने लगी इतनी सुंदर और कामुक चूचीयां आज तक मैंने अपनी जिन्दगी में नहीं देखी थोड़ी देर तक मैं उसके चुचियों के साथ खेलते राह और अंत में उसकी उत्तेजना को और भड़काने के लीये मैंने ऊपर के तरफ उसकी चूचीयां खीची. उसे बहुत जम के दर्द का एहसास हुआ और उसके मुह से आआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्………… निकल आयी. फीर मैं उसके चूचियों को चूसने लगा और व्हो मेरा लंड मुठीया रही थी. मैंने बीना वक़्त गवाए उसके सलवार का नाडा खोल दीया और उसका सलवार चड्डी के साथ नीचे खींच लीया. हे राम उसकी अन्चुदी बुर (चूत) को देख कर मैं दंग रह गया. मैंने बीना वक़्त गवाये उसे बिस्तर पे लीटा दीया और उसके क़मर के नीचे ताकीया रख दीया और उसकी बुर चाटने लगा. मैंने एक हाँथ की उँगलियों से उसके बुर की फाकीयां फैलाई और अपनी चटोरी जीभ उसके बुर में पेल दी. वो चाट्पताने लगी. मैं अपने दूसरे हाँथ से उसकी चूचीयीओं को बरी बरी सेहेला-दबा
रह था. थोड़ी ही देर में व्हो झड गयी. और उसकी चूत से निकला हुआ रस मैं पुरा पी गया. दो मिनट के लीये व्हो ठण्डी पड़ गयी और वैसी ही लेटी रही.

मैंने अपना चूची दबाने का कार्यक्रम जरी रखा जिससे वो कुछ ही देर में फीर से उततेजीत हो गयी (गरम). मैंने उसके दोनों पांव फैला दीये और घुटने के बल उसके पैरों के बीच बैठ गया उसने मेरा बड़ा और मोटा लंड देखा और ड़र सी और कहा "अगर तुम यह मेरी बुर में घुसोगे तो मेरी बुर फट जायेगी, मेरी बुर मत फाडो" मैंने उसे समझाया की यह तो चोटी सी चीज है यही व्हो जगह है जहाँ से बच्चा पैदा होता है. कीसी तरह वो मनी मेनेआव देखा ना ताव जल्दी से अपने लंड पे और उसकी चूत पे अपने मुह से थोडा थूक नीकाल के लगा दीया और अपने लंड का सुपदा उसके चूत के मुहाने पे जैसे ही लगाया वो सीस कर उठी. मैंने धीरे से धक्का दीया पर मेरा लंड अन्दर जा ही नहीं रह था और उसे तकलीफ भी होने लगी.

तुब मुझे अपने गुरू "मस्तराम" की याद आई जिसकी किताबें मैं पढ कर्ता था. मैंने कहीँ पढा था की अगर लडकी अन्चुदी हो या उसकी चूत कासी हो तो ऐसे लड़कियों के अगर चूचीयों को अगर नीचे से ऊपर के ऊर खीचा जाये और साथ में लंड घुसाया जाये तो लडकी को तकलीफ भी कम होती है और मेरा लंड भी आराम से जाने लगता है क्योंकी हमारे गुरुजी " मस्त्रमजी " का यह मनाना है की चूचीयां ही सारे द्वार खोल देती हैं. वो बात फीर कभी मैंने गुरुजी का नाम लीया और दीपा की चूचियां मसलन शुरू कर दीया और धीरे धीरे अपना लंड अन्दर की तरफ हलके हलके पेलने लगा, इस प्रकार दीपा को दर्द भी कम हो रह था और मुझे भी ज्यादा तकलीफ नहीं हो रही थी. अभी मेरा लंड आधा से थोडा ज्यादा ही अंदर गया था की मेरा लंड झ्हीली से टकरा गया. मैंने दीपा के चूची के टोक मसलन शुरू कीया और अपनी रफ्तार तेज करने लगा, धीरे धीरे रफ्तार तेज करते हुए मैं अपना लंड और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा. पर
झिल्ली आने की वजह से मेरा लंड और अंदर जा नहीं रह था फीर मैंने एक ज़ोर की थाप मरी और दीपा के होटों पे होंठ रख दीया क्योंकी मुझे मालूम था वो चिल्लाने वाली है. जैसे ही मैंने ज़ोर की थाप मरी उसकी झिल्ली फट गयी और चूत से ख़ून बेहेने लगा उसके आंखों से आंसू बेहेने लगे मैंने हिलना एकदम से बंद कर दीया और उसकी चूचियों को फीर से ऊपर की और पहेले जैसे खीचने लगा. उसका दर्द कम होने लगा और उसे मजा आने लगा, मैंने हलके हलके अपने थाप शुरू कर दी कुछ ही पल में व्हो बोलने लगी "फाड़ डालो ॐ आज मेरी बुर को पूरी तरह, जालीम क्या नशा छा रह है! हई ॐ चोदो मुझे और कास के चोदो". यह सुनते ही मेरे अंदर का शैतान जाग गया और मैंने अपने रफ्तार बहुत तेज कर दी. दस मिनट के अन्दर ही मैं दोनो झड ग्ये. मैंने कुछ पल रूककर एक बार और चढाई शुरू कर दी इस बार दीपा को मजा आने लगा और वो उच्चाल उच्चाल कर मेरा साथ देने लगी. थोड़े देर में मैं फीर झडा. फीर दो मिनट तक मैं उसके
ऊपर पड़ा रहा. मैंने उसे कहा की कपडे पहेन लो और चलो मैं घर छोड आता हूँ.

उसने जल्दी जल्दी अपने कपडे पेहेने और मैंने भी अपने कपडे पेहेने और उसे उसके घर छोड़ने चला गया. मैंने उसे कहा अगले दीन मुझे दोपहर में मेरे घर मील्ना क्योंकी अगले दीन मैं अपने घर में रेहेने जाने वाला था जो मेरे ताउजी के घर के बिल्कुल सामने ही था. ओउए वो मुस्कुरा के चली गयी …. ….

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